यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है बल्कि एक ऐसी मिसाल है जिसका अनुसरण सभी लोगों को करना चाहिए। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान और मुस्लिम धर्मगुरु सैयद जेनुअल आबेदीन ने 26 अप्रैल को ईटीवी के उर्दू चैनल को एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में दीवान ने कहा कि ख्वाजा साहब के उर्स और अन्य दिनों में लाखों रुपए मूल्य की चादरे पवित्र मजार पर पेश की जाती है। अच्छा हो कि यदि चादर पेश करने के बजाय किसी गरीब परिवार की लड़की की शादी, बीमार व्यक्ति का इलाज, असहाय और जरुरतमंद व्यक्ति की मदद जैसे सामाजिक कार्य करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह में खड़े होकर दुआ करने मात्र से ही मुराद पूरी हो जाती है। जो लोग यह समझते है कि कीमती चादर या मोटा नजराना देने से मुराद पूरी होगी उन्हें धर्म और आस्था के सही मायने समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम धर्म में तो जकात का विशेष महत्व बताया गया है और फिर ख्वाजा साहब तो एक फकीर सूफी थे। ख्वाजा साहब ने इंसानियत और मोहब्बत का पैगाम दिया। जो लोग ख्वाजा साहब को मानते है उन्हें उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं कि दरगाह दीवान का यह बयान वर्तमान हालातों में महत्वपूर्ण और साहसिक है। यदि चादर की कीमत की राशि गरीब परिवार को ही जाएगी तो उसके दिल और मन से जो दुआ निकलेगी वह ज्यादा कारगर साबित होगी।
दीवान आबेदीन ने यह बयान तब दिया है,जब इन दिनों अजमेर में ख्वाजा साहब का 803वां सालाना उर्स चल रहा है। इस समय लाखों जायरीन दरगाह में जियारत के लिए आए हुए है। उर्स के समय में ही लाखों रुपए की कीमत की चादरे भी पेश की गई है। कीमती चादरे पाकिस्तान से आए जायरीनों ने भी पेश की है। देश के पीएम और कितने ही प्रांतों के सीएम ने भी चादरे पेश कराई है। दरगाह दीवान ने राजनेताओं को संकेत दिए है कि वह चादर भेजने के बजाए दरगाह में आने वाले जायरीन की सुविधा के लिए काम करें। इसे अफसोसजनक ही कहा जाएगा कि दरगाह के आसपास जायरीन की सुविधा के लिए एक भी सुलभ कॉम्पलेक्स नहीं है। दरगाह कमेटी ने हाल ही में जो सुलभ कॉम्पलेक्स बनाया है, उसमें शुल्क वसूला जाता है। जो लोग चादरे पेश करते है क्या वह दरगाह के आसपास ऐसा सुलभ कॉम्पलेक्स नहीं बनवा सकते, जहां जायरीन को नि:शुल्क सुविधा मिले। दीवान ने 25 अप्रैल को जो मुस्लिम देशों को लेकर बयान जारी किया है, वह भी साहसिक है। इस बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, ईराक, सीरिया आदि मुस्लिम देशों में जहां शिया और सुन्नी आपस में खूनी संघर्ष कर रहे हैं, वहीं भारत में मुसलमान हिन्दुओं के साथ अमन चैन के साथ रह रहे हैं। दीवान ने मुस्लिम देशों के मुसलमानों को भारत के मुसलमानों से सीख लेने की सलाह दी है। इससे पहले भी दीवान आतंकवाद के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Sunday, 26 April 2015
मुसलमान हो तो दरगाह दीवान जैसा
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