Thursday, 21 April 2016

तो यह हार देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की है। उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटा।



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21 अप्रैल को नैनीताल हाईकोट ने एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने के आदेश दिए। आजाद भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी हाईकोर्ट ने देश के राष्ट्रपति शासन को हटा दिया हो। इस फैसले से देश की राजनीति में तूफान आ गया है। कांग्रेस और विपक्षी दल सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इस्तीफा मांग रहे हैं। यह माना की केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद ही उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन प्रणब मुखर्जी ने लगाया था, लेकिन हमारे संविधान में राष्ट्रपति को विवेकशील माना है। ऐसे कई मौके आए हैं, जब राष्ट्रपति ने मंत्रिमंडल के फैसले को पुनर्विचार के लिए वापस सरकार को भेज दिया। प्रणब मुखर्जी भी चाहते तो उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के निर्णय को पुनर्विचार के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल को भिजवा सकते थे, लेकिन तब प्रणब मुखर्जी ने यह देखा कि कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत बागी विधायकों को 20 करोड़ रुपए में खरीद रहे हैं। इतना ही नहीं उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के 9 बागी विधायकों की सदस्यता ही समाप्त कर दी। प्रणब मुखर्जी कोई रबड़ स्टेम्प राष्ट्रपति नहीं हंै। प्रणब मुखर्जी ने कोई चालीस बरसा कांग्रेस का नमक खाया है। ऐसे में वे कांग्रेस की किसी सरकार को बेवजह बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन नहीं लगा सकते। मुखर्जी ने बहुत सोच समझ कर संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट को लगा कि प्रणब मुखर्जी ने देश के लोकतंत्र की हत्या की है। अपने फैसले को जायज ठहराने के लिए हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने राष्ट्रपति पर भी अमर्यादित टिप्पणी की। नैनीताल हाईकोर्ट गौरवांवित होगा की उसने देश के राष्ट्रपति के आदेश को हटा दिया है। नैनीताल हाईकोर्ट का जिस तरह फैसला आया है, उसे देखते हुए केन्द्र सरकार के सामने अब सुप्रीम कोर्ट जाने का ही रास्ता बचा है। देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर क्या रुख अपनाता है। जहां तक उत्तराखंड में राजनीतिक हालातों का सवाल है तो विधायकों को ही सरकार बनाने का फैसला करना चाहिए। यह सवाल अपने आप में महत्त्वपूर्ण है जिन हरीश रावत पर 20-20 करोड़ रुपए में विधायकों को खरीदने के आरोप है क्या वही हरीश रावत फिर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनेंगे?
(एस.पी. मित्तल)  (21-04-2016)
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