Thursday, 28 April 2016

दलित नाथूलाल को आखिर अजमेर कलेक्टर ने ढाबे की अनुमति क्यों नहीं दी? इसलिए होता है दलालों का बोलबाला।


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सत्ता के दलाल कैसे मालामाल होते हैं, इसका ताजा और पुख्ता उदाहरण खटीक जाति के नाथूलाल को ढाबा लगाने की अनुमति नहीं मिलना है। पीएम नरेन्द्र मोदी और सीएम वसुंधरा राजे पूरा जोर लगा रहे हैं कि युवाओं को किसी भी तरह रोजगार उपलब्ध करवाया जाए। इसके लिए स्किल डवलमेंट का अभियान पूरे देश में जोर शोर से चालया जा रहा है, लेकिन लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की वजह से पीएम मोदी और सीएम राजे के मनसबूों पर पानी फिर रहा है। अजमेर के निकटवर्ती रेवत (कडैल) गांव की कृषि भूमि पर ढाबा लगाने के लिए खटीक जाति के नाथूलाल ने अजमेर की जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया। इस आवेदन में कृषि भूमि का उपयोग वाणिज्यिक करने का आग्रह किया गया। कलेक्टर ने भू उपयोग परिवर्तन के लिए संबंधित विभागों की एनओसी लेने के आदेश जारी किए। नाथूलाल ने पूरा जोर लगाकर तहसीलदार, उपखंड अधिकारी नगर नियोजक आदि सभी से एनओसी प्राप्त कर ली और इंडिया रोड कॉन्फ्रेंस के नियमों के अनुरूप 400 मीटर भूमि सरकार को समर्पित भी कर दी। इतना ही नहीं भू-रूपांतरण शुल्क 64 हजार 223 रुपए सरकार के खजाने में जमा भी कर दिए। नाथूलाल पिछले एक वर्ष से इस प्रक्रिया में लगा हुआ था, उसे उम्मीद थी कि इतना सब कुछ होने पर उसकी 3 हजार वर्गमीटर जमीन का भूरूपांतरण हो जाएगा। और फिर वह ढाबा लगाकर आजीविका लेगा। लेकिन नाथूलाल के अरमानों पर उस समय पानी फिर गया, जब जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक ने नाथूलाल का भूरूपांतरण आवेदन निरस्त कर दिया। आवेदन को निरस्त करने का कारण भूमि पर लगा विद्युत निगम  का ट्रांसफार्मर बताया गया। ट्रांसफार्मर की आड़ लेकर आवेदन को निरस्त करने पर दलित नाथूलाल को भारी आश्चर्य हो रहा है। क्योंकि इस ट्रांसफार्मर की वजह से ही उसने चार सौ मीटर भूमि सरकार को समर्पित की थी। यह भूमि भी सरकार के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भी हो गई। यानि जो ट्रांसफार्मर लगा है, वह अब सरकारी भूमि पर है। ऐसी स्थिति में क्या ट्रांसफार्मर की आड़ लेकर आवेदन को निरस्त नहीं किया जा सकता? इतना ही नहीं रेवत गांव के जिस भूखंड का रूपांतरण नाथूलाल करवा रहा है, उसके समीप ही 19 बीघा कृषि भूमि का वाणिज्यिक उपयोग करने का आदेश कलेक्टर ने ही दिया है। यह आदेश स्क्रप्टंम फ्रूट कंपनी को किया गया है। ट्रांसफार्मर स्क्रप्टंम फ्रूट कंपनी और दलित नाथूलाल के भूखंड की सीमा पर लगा हुआ है। यदि ट्रांसफार्मर की वजह से नाथूलाल के भूखंड का भूउपयोग नहीं बदला जा सकता है तो फिर इसी ट्रांसफार्मर की वजह से स्क्रप्टंम कंपनी  की 19 बीघा भूमि भी वाणिज्य नहीं की जा सकती। दलित नाथूलाल को अब यह कोई समझाने वाला नहीं है कि कंपनी के धनाढ्य मालिकों और एक दलित में बहुत फर्क होता है। कंपनी के मालिकों को पता होता है कि लालफीताशाही से किस प्रकार से अनुमति ली जाती है, जबकि बेचारा नाथूलाल जिला कलेक्टर के दफ्तर के चक्कर काटता ही रह गया। नाथूलाल ने अपनी पीड़ा को रोते हुए बताया कि अपनी तीनों पुत्रियों के साथ वह कलेक्टर आरुषि मलिक के सामने गिड़गिड़ाया भी, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। दलित नाथूलाल को अब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के तीन मई को अजमेर आने का इंतजार है। नाथूलाल अपनी तीनों पुत्रियों के साथ मुख्यमंत्री से मिलकर अजमेर जिला प्रशासन की करतूत के बारे में जानकारी देगा। 

(एस.पी. मित्तल)  (28-04-2016)
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