Thursday, 17 September 2026
अजमेर में भाजपा की आपत्ति पर फैसला आने से पहले ही कांग्रेसियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।
अनिल पूनियां के निर्वाचन अधिकारी रहते मेयर चुनाव में गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं।
बेंगलूरू में बंद होने के बाद भी कांग्रेस को अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं।
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अजमेर नगर निगम के मेयर के चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से श्रीमती किरण गढ़वाल और भाजपा की ओर से अनामिका शर्मा ने नामांकन किया है। मतदान 21 सितंबर को होना है। 80 पार्षदों में से कांग्रेस को 37, ीााजपा को 32 मिले हैं, 11 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं। ऐसे में दोनों दल मेयर पद के लिए निर्दलीय पार्षदों पर निर्भर है। 17 सितंबर को भाजपा की उम्मीदवार अनामिका ने निर्वाचन अधिकारी अनिल पूनिया के समक्ष एक आपत्ति दर्ज कराई। इस आपत्ति में कहा गया है कि कांग्रेस की प्रत्याशी किरण के मालिकाना हक वाले समारोह स्थल पर 19 लाख रुपए का टैक्स बकाया है। नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 (18) के तहत कोई प्रत्याशी सरकारी बकाया होने पर चुनाव नहीं लड़ सकता, इसलिए कांग्रेस की प्रत्याशी का नामांकन खारिज किया जाए। आपत्ति पर फैसला आने से पहले ही कांग्रेसियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कांग्रेस के उत्साही नेताओं ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। चूंकि कांग्रेस प्रत्याशी पर वाकई 19 लाख रुपया बकाया था। इसलिए कांग्रेसियों ने मान लिया कि नामांकन खारिज होगा और भाजपा की प्रत्याशी अनामिका निर्विरोध मेयर बन जाएंगी। कांग्रेयिों का यहां तक आरोप रहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अजमेर के जिला निर्वाचन अधिकारी लोकबंधु को भी फोन किया है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ही भाजपा के बागी नेता धर्मेन्द्र गहलोत भी नगर निगम के कार्यालय में आ गए। उनका कहना रहा कि पार्षद के चुनाव में वार्ड संख्या 4 से उनकी पत्नी और निर्दलीय उम्मीदवार हेमा गहलोत ने भाजपा प्रत्याशी मोनिका जैन के खिलाफ ऐसी ही आपत्ति दर्ज कराई थी। मोनिका के पति दीपक जैन के खिलाफ नगर निगम का लाखों रुपया बकाया है, लेकिन तब निर्वाचन अधिकारी ने उनकी आपत्ति पर कोई निर्णय नहीं लिया। जब उनकी आपत्ति पर भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज नहीं किया गया, तब अब बकाया राशि के मुद्दे पर कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन कैसे खारिज किया जा सकता है? धर्मेन्द्र गहलोत ने आरोप लगाया कि निर्वाचन विभाग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। इस बीच निर्वाचन अधिकारी और अजमेर विकास प्राधिकरण के सचिव अनिल पूनिया ने कांग्रेसियों को भरोसा दिलाया कि नियमों के तहत ही फैसला होगा। वह स्वयं नगर पालिका अधिनियम का गहराई के साथ अध्ययन कर रहे है, लेकिन कांग्रेसियों ने पूनिया के कथन पर भरोसा नहीं किया। बड़ी संख्या में कांग्रेसी निगम कार्यालय में एकत्रित हो गए। तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए भारी पुलिस बल को मौके पर बुलाना पड़ा। शाम को 6 बजे निर्वाचन अधिकारी पूनिया ने भाजपा की आपत्ति को खारिज कर दिया और कांग्रेस प्रत्याशी किरण की उम्मीदवार को बरकरार रखा। पूनिया ने अपने फैसले में कहा कि अब जब किरण गढ़वाल का निर्वाचन पार्षद के रूप में हो गया है और कोई भी पार्षद मेयर का चुनाव लड़ सकता है, इसलिए भाजपा प्रत्याशी की आपत्ति मायने नहीं रखती, लेकिन भाजपा प्रत्याशी दूसरी न्यायिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। इस फैसले के बाद किरण के पति दिलीप गढ़वाल ने कहा कि उन्हें निर्वाचन अधिकारी की निष्पक्षता पर कोई संदेह नहीं हे। निर्वाचन अधिकारी ने पूर्ण निष्पक्षता के साथ फैसला दिया है। गढ़वाल ने अनिल पूनिया के फैसले का स्वागत किया। यानी फैसले से पहले कांग्रेसी जो आशंका जता रहे थे, वह सब निर्मूल साबित हुई। प्रशासनिक क्षेत्र के उच्च अधिकारियों का मानना है कि अनिल पूनिया के निर्वाचन अधिकारी रहते अजमेर नगर निगम के मेयर के चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती। पूनिया बेहद ईमानदार और कुशल प्रशासक है। यह सही है कि आपत्ति के बाद पूनिया ने जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर लोक बंधु से विमर्श किया। इससे जाहिर था कि प्रशासन पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं था। जहां क धर्मेन्द्र गहलोत की आपत्ति का सवाल है तो जानकार मानते हैं कि हेम गहलोत और अनामिका शर्मा की आपत्तियों में अंतर है। हेमा गहलोत आपत्ति में बकाया राशि भाजपा प्रत्याशी मोनिका के पति दीपक जैन पर है, जबकि अनामिका की आपत्ति में बकाया राशि स्वयं कांग्रेस की प्रत्याशी किरण गढ़वाल पर है।
कांग्रेस को भरोसा नहीं:
कांग्रेस अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में ले गई है। बेंगलुरु में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ साथ 3 निर्दलीय पार्षद भी है। बहुमत के लिए 41 पार्षद चाहिए। कांग्रेस की मजबूत स्थिति के बाद भी बड़े नेताओं को अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं है। नेताओं को आशंका है कि भले ही पार्षद बेंगलूरू में बंद हो, लेकिन 21 सितंबर को क्रॉस वोटिंग हो सकती है। लाख कोशिश के बाद भी कांग्रेस के पार्षदों के तार भाजपा के नेताओं खासकर विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से जुड़े हुए हैं, कहा तो यहां तक जा रहा है कि कांग्रेस के मुस्लिम पार्षदों के मकानों और होटलों की फाइल की जांच पड़ताल भी तो रही है। एक पार्षद की होटल को गैर कानूनी मानते हुए नगर निगम ने तोड़ने का नोटिस दे रखा है। एक अन्य पार्षद की विशालकाय कोठी का निर्माण भी अवैध माना गया है। पार्षदों के रिश्तेदार चाहते हैं कि अवैध होटल और कोठियों पर कोई कार्यवाही न हो। इसी प्रकार निर्दलीय पार्षद भी भाजपा के नेताओं के संपर्क में है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-09-2026)
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