केन्द्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कॉल ड्रॉप या बेवजह राशि की कटौती पर टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं को राहत देनी ही होगी। यानि ये कंपनियां उपभोक्ताओं को राशि वापस करेंगी। सवल उठता है कि क्या एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस, एयरसेल, बीएसएनएल, एमटीएस जैसी बेईमान टेलीकॉम कंपनियां उपभोक्ताओं को पैसे वापस करेंगी? जिन उपभोक्ताओं ने इन कंपनियों में कॉल ड्राप और अवैध कटौती की शिकायत की है, उन्हें आज तक भी कोई राहत नहीं मिल पाई है। शिकायत पर उपभोक्ता के पास कंपनी के किसी कर्मचारी का फोन तो आता है, लेकिन शायद ही कोई भाग्यशाली उपभोक्ता होगा, जिसके बैलेंस में कोई राशि जमा हुई हो। इन बेईमान कंपनियों के उपभोक्ताओं को आम शिकायत है कि कॉल ड्रॉप के साथ-साथ बैलेंस में से भी अवैध कटौती हो जाती है। जिन उपभोक्ताओं ने 3-जी का नेट कनेक्शन ले रखा है, उन्हें शिकायत है कि नेट की एमबी बहुत तेजी से कम हो जाती है। कई बार तो बिना डाउनलोडिंग के सैकड़ों एमबी काट दी जाती है। उपभोक्ता बेचारा चिल्लाता ही रहा जाता है और इन बेईमान कंपनियों में उसकी सुनने वाला कोई नहीं होता है। 3-जी की सुविधा न्यूनतम पांच सौ रुपए में 28 दिन के लिए मिलती है। इन बेईमान कंपनियों से यह पूछने वाला कोई नहीं है कि जब एक माह में औसतन तीस दिन होते हैं तो यह 28 दिन क्यों मानते हैं। इन कंपनियों के मालिकों को भी पता है कि सरकार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो उनके विरुद्ध कार्यवाही कर सके। जहां तक दूर संचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का सवाल है तो उसके अधिकारी तो पहले ही बिके हुए हैं। कंपनियों से परेशान उपभोक्ता जब ट्राई में शिकायत करता है तो बिके हुए अधिकारी संबंधित कंपनी के पास ही शिकायत को भेज देते हैं, जबकि होना यह चाहिए कि ट्राई के अधिकारी अपने स्तर पर शिकायत की जांच कर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करें।
इन कंपनियों का ऐसा मकडज़ाल है कि कंपनी के मालिक से तो किसी उपभोक्ता की बात हो ही नहीं सकती। नौकर पर नौकर ऐसा चैनल बना हुआ है जिसमें उपभोक्ता थोड़े ही दिन में दु:खी हो जाता है। दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद कह तो रहे हैं कि वे इन बेईमान कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे, लेकिन देश के उपभोक्ताओं को मंत्री के कथन पर फिलहाल भरोसा नहीं है। ये कंपनियां ट्राई के बिके हुए अधिकारियों की वजह से जब चाहे तब कॉल रेट और नेट की रेट बढ़ा देते हैं। एक तरह से सरकार ने इन बेईमान कंपनियों को उपभोक्ताओं को लूटने की खुली छूट दे रखी हैं। देश में अब मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या सौ करोड़ पहुंचने वाली है। अधिकांश उपभोक्ता प्रीपेड है, जो पहले धन राशि देकर मोबाइल में बेलेंस डलवाते हैं। बेईमान कंपनियां उपभोक्ता की अमानत में से लूट कर लेती है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Monday, 1 June 2015
बेईमान टेलीकॉम कंपनियों पर नहीं होगा मंत्री का असर
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