दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेन्द्र तोमर की फर्जी डिग्री के मामले को न्यूज चैनलों और अखबारों ने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि गत पांच जून को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के डिग्री कॉलेज के प्रथम वर्ष की एक छात्रा के साथ कॉलेज के ही चार सीनियर छात्रों ने जो दुष्कर्म किया, उस घटना की एक लाइन की भी खबर प्रिंट और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में नहीं दिखाई गई। मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली सिस्टर कैरोल गीता ने दस जून को अपने फेसबुक अकाउंट पर धर्मशाला की घटना की जानकारी दी है। सिस्टर गीता ने बताया कि दुष्कर्म के बाद आरोपियों ने छात्रा को मरा हुआ समझकर सड़क के किनारे फेंक दिया। अब यह छात्रा कहां है इसका कोई पता नहीं चल रहा है। कॉलेज प्रशासन से लेकर पुलिस, जिला प्रशासन और हिमाचल की सरकार को भी सांप सुंघ गया है। मीडिया की हालत तो इससे पता चलती है कि हिमाचल दस्तक नामक अखबार की वेबसाइट पर इस खबर को पोस्ट किया गया, लेकिन अखबार के मालिक ने कुछ ही घंटों में इस पोस्ट को हटा दिया। जानकारी के मुताबिक दुष्कर्म करने वाले छात्र धनाढ्य और प्रभावशाली परिवारों के हैं। सिस्टर गीता को इस बात का अफसोस है कि दिल्ली में हुए निर्भया कांड को तो मीडिया ने प्रमुखता के साथ दिखाया, लेकिन धर्मशाला की इस घटना को अभी तक भी मीडिया में स्थान नहीं मिला है। इस मामले में मीडिया भी कटघरे में खड़ा है। क्योंकि दुष्कर्म की घटना की खबर नहीं देना भी मानवाधिकारों का हनन है। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया को यह गुमान हो गया है कि जो खबर उनके द्वारा दिखाई जाती है, वही उजागर होती है। यह दोनों मीडिया अब समझ ले कि सोशल मीडिया का जमाना है। आज भले ही सोशल मीडिया को सरकारी अमला गंभीरता से न लेता हो, लेकिन किसी भी घटना का प्रचार आज सबसे ज्यादा सोशल मीडिया से ही होता है। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया ने तो उत्तर प्रदेश के शाहजहापुर के पत्रकार जोगेन्द्र सिंह की हत्या की खबर को भी उजागर नहीं किया था। जोगेन्द्र सिंह की हत्या की खबर सोशल मीडिया के पिटारे से ही निकली और गत 8 जून को यूपी के मंत्री राममूर्ति और संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 में मुकदमा दर्ज किया। जोगेन्द्र सिंह ने सोशल मीडिया पर ही राममूर्ति की कारगुजारियों को उजागर किया था। इससे नाराज होकर मंत्री ने अपनी गुलाम पुलिस से जोगेन्द्र सिंह पर हमले करवाए। उपचार के दौरान जोगेन्द्र सिंह की 7 जून को मौत हो गई। आज भी न्यूज चैनलों और अखबारों में इस खबर को दबाए रखा गया है। यह तो सोशल मीडिया का ही बिच्छु है जो धीरे-धीरे अपना जहर सरकार तक पहुंचा रहा है। सिस्टर गीता ने धर्मशाला कांड को लेकर जो पहल की है, वह भी आने वाले दिनों में रंग लाएगी।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Wednesday, 10 June 2015
मीडिया क्यों नहीं बता रहा धर्मशाला के गैंगरेप की घटना
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