Tuesday, 30 June 2015

क्या राजनीति के दबंग दबा रहे हैं जिला प्रमुख नोगिया को


(spmittal.blogspot.in)

अजमेर की जिला प्रमुख कुमारी वंदना नोगिया की उम्र मात्र 23 वर्ष है और अभी भी कुमारी नोगिया एमडीएस यूनिवर्सिटी में स्नातकोत्तर की छात्रा हैं। भाजपा ने राजनीति के पुराने और दबंग नेताओं को परे ढकेलते हुए कोई चार माह पहले नोगिया को अजमेर की जिला प्रमुख बनाया। अनुसूचित जाति की नोगिया से उम्मीद थी कि वह राजनीति में कुछ नया करेंगी। लेकिन राजनीति के दबंगों को नोगिया का जिला प्रमुख बनना रास नहीं आया। यही वजह है कि जिस दिन से नोगिया ने जिला प्रमुख की शपथ ली है, उस दिन से आज तक नोगिया का राजनीतिक दृष्टि से अपमान ही अपमान हो रहा है।
इसकी शुरुआत अजमेर की जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक ने की। मलिक ने अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही नोगिया को जिला प्रमुख के पद की शपथ दिलाई।  यानि नोगिया ने तो खड़े होकर शपथ ली और कलेक्टर ने बैठे बैठे ही शपथ दिलाई। पहले के सभी जिला प्रमुख सरकारी वाहन में लालबत्ती लगाकर घूमते रहे। एकाध जिला प्रमुख के तो रिश्तेदार ही लालबत्ती के वाहन को लेकर अपना रौब गालिब करते रहे। तब किसी ने भी नहीं कहा कि जिला प्रमुख को लालबत्ती लगाने का अधिकार नहीं है। वंदना नोगिया ने जब पहले के जिला प्रमुखों की परंपराओं को निर्वाह करते हुए लालबत्ती वाले वाहन का उपयोग किया तो राजनीति के दबंगों को रास नहीं आया। एसीओ जगदीशचन्द हेड़ा पर दबाव डालकर नोगिया के वाहन से न केवल लालबत्ती को उतरवाया, बल्कि अखबारों में छपवाया कि जिला प्रमुख अवैध रूप से लालबत्ती लगाकर घूमती रही। कोई कल्पना कर सकता है कि 23 साल की वंदना नोगिया को कितना अपमानित होना पड़ा होगा। लेकिन इसे नोगिया की हिम्मत ही कहा जाएगा कि दबंगों की परवाह नहीं करते हुए जिला परिषद में सुधार का काम शुरू किया। बरसों से जो कार्मिक जमा थे, उन्हें नियमों के अनुरूप अपने मूल पदों पर भेज दिया।
वंदना का यह कदम तो दबंगों को खुली चुनौती देने जैसा था। राजनीति के मजबूत खिलाड़ी जो दबंगों की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकते थे, उनसे वंदना ने आंख मिलाने की कोशिश की। इस कोशिश का नतीजा यह रहा कि वंदना के जिला प्रमुख के कार्यालय में जो कर्मचारी लगे हुए थे, उनके ही तबादले करवा दिए गए। इस पर भी वंदना ने हार नहीं मानी और विगत दिनों ही 20 ग्रामसेवकों के स्थानांतरण कर दिए। वंदना की इस कार्यवाही से दबंगों की जमीन हिल गई। दबंगों ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार से स्थानांतरण सूची ही रद्द करवा दी।
हालांकि 20 ग्राम सेवकों की तबादला सूची जिला परिषद के सीईओ राजेश चौहान ने ही जारी की थी, तब चौहान ने यह नहीं कहा कि तबादले नियमों के विरुद्ध हो रहे हैं, लेकिन सरकार ने तबादलों को नियमों के विरुद्ध मानतें हुए निरस्त कर दिए। यानि वंदना नोगिया जो भी काम करती हैं वह राजनीति के दबंगों को रास नहीं आता है। इससे ज्यादा और क्या मजाक होगा कि वंदना नोगिया के पास सरकारी स्तर पर निजी सहायक तक नहीं है। नोगिया को मजबूरी में सीईओ के पीए से ही काम चलाना पड़ रहा है। यह हालात तब हैं जब प्रदेश में नोगिया की ही पार्टी भाजपा की सरकार है और सरकार की मुखिया भी वंदना की तरह महिला ही हैं। देखना है कि नोगिया आगे भी अपने विवेक से ही काम करती रहेंगी या फिर दबंगों के इशारों पर चलेगी।
(एस.पी. मित्तल) M-09829071511

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