Tuesday, 13 October 2026
संघ प्रचारक की नरेना थाने में बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की कड़ी नाराजगी के बाद भी जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद को नहीं हटाया।
वही वकील थप्पड़ प्रकरण में माफी मांग लेने के बाद डीएसपी अंजू यादव को एपीओ किया, क्योंकि वकीलों की तरह संघ के स्वयं सेवक सड़कों पद प्रदर्शन नहीं कर सकते।
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राजस्थान में बिगड़ी कानून व्यवस्था के मद्देनजर 13 अक्टूबर को गृह विभाग के प्रभारी वाले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस के उच्च अधिकारियों की एक बैठक ली। इस बैठक में सीएम शर्मा ने कहा कि लापरवाह पुलिस अधिकारियों का स्थानांतरण दूरस्थ स्थानों पर किया जाएगा। प्रदेश में लगातार हो रही अपराध की घटनाओं पर सीएम ने चिता जताई। सीएम की बैठक के बाद विभिन्न घटनाओं से जुड़े तीन एएसपी, चार डीएसपी, 2 एसएचओ तथा कई पुलिस कर्मियों को निलंबित और एपीओ कर दिया गया। इन्हीं में जयपुर ग्रामीण के सांभार क्षेत्र के डीएसपी मुकेश जोशी भी शामिल रहे। जोशी को गत 10 अक्टूबर को नरेना थाने पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक कृष्ण अवतार की बेरहमी से पिटाई के प्रकरण में एपीओ किया गया। लेकिन इस गंभीर प्रकरण में अभी तक भी जयपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। ऐसा तब हो रहा है, जब 13 अक्टूबर को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने संघ प्रचारक की थाने में बेरहमी से पिटाई पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पुलिस का व्यवहार पशुओं के समान बताया। राठौड़ ने यह भी कहा कि इस मामले में कड़ी कार्यवाही होगी। ऐसा प्रतीत होता है कि भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार संघ के प्रचारक की थाने में पिटाई की घटना को हल्के में ले रही है। संघ का प्रचारक घर परिवार को छोड़कर राष्ट्र सेवा का काम करता है। यदि भाजपा शासित राज्य में संघ प्रचारक की थाने में बेवहज पिटाई हो जाए तो यह भाजपा सरकार के लिए कलंक की बात है। कुछ पुलिस कर्मियों के निलंबन और डीएसपी के एपीओ कर देने से मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता है। किसी भी थाने में घटने वाली घटना के लिए पुलिस अधीक्षक की सुपरवाइजरी जिम्मेदारी होती है। क्या संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण में पुलिस अधीक्षक के खिलाफ कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? एक ओर भजन सरकार संघ प्रचारक की पिटाई के प्रकरण में पुलिस अधीक्षक को बचा रही है तो वहीं अजमेर के किशनगढ़ में एक वकील बाबूलाल बागोरिया को थप्पड़ मारने के मामले में अजमेर की टे्र्रफिक डीएसपी अंजू यादव को एपीओ कर दिया गया है। अंजू को तब एपीओ किया गया, जब उन्होंने सार्वजनिक तोर पर वकील बागोरिया से माफी मांग ली। यहां तक कि बागोरिया ने वकील समुदाय से अपील की वह इस मामले को लेकर कोई आंदोलन नहीं करे। बागोरिया का कहना था जब डीएसपी ने माफी वाली वीडियो स्वयं सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया है, तब वकीलों को सड़कों पर आंदोलन नहीं करना चाहिए, लेकिन डीएसपी के माफीनामे के बाद भी जिला बार एसोसिएशन ने माफीनामे को खारिज करते हुए 13 अक्टूबर को आरोपी डीएसपी को निलंबित करने की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया था। वकीलों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने अंजू यादव कोएपीओ कर दिया। यानी सरकार को पता है कि संघ के स्वयं सेवक वकीलों की तरह प्रदर्शन नहीं कर सकते है। यदि स्वयं सेवक भी प्रदर्शन करते तो हनुमान प्रसाद को पुलिस अधीक्षक के पद से हटा दिया जाता।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-10-2026)
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