Friday, 31 July 2026

 जानकारी के अभाव में डोटासरा ने बयान दिया-अशोक गहलोत, पूर्व सीएम।

लेकिन चौथी बार गहलोत सरकार के नारों पर कोई टिप्पणी नहीं की।

ऐरे-गैरे नत्थू गेरे कुछ बन जाते हैं तो पागल हो जाते हैं-संदीप चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष व गहलोत समर्थक।
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30 जुलाई को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने महेंद्रजीत सिंह मालवीय और उनके साथ आए समर्थकों को लेकर जो नाराजगी प्रकट की उसके संदर्भ में 31 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सफाई दी। मालूम हो कि बांसवाड़ा डूंगरपुर से आए 300 कार्यकर्ताओं को मालवीय पहले गहलोत के सरकारी आवास पर ले गए। यहां गहलोत की उपस्थिति में समर्थकों ने चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाए। इसके बाद मालवीय के नेतृत्व में सभी समर्थकों ने जयपुर में कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में डोटासरा से मुलाकात की। तभी डोटासरा ने नाराजगी जताते हुए कहा, मालवीय तो किसी नेता की ब्रांडिंग करने के लिए जयपुर आए हैं। डोटासरा की इस नाराजगी पर गहलोत ने कहा, ऐसा बयान जानकारी के अभाव में दिया गया। असल में जयपुर में कार्यकर्ताओं की जॉइनिंग का कोई कार्यक्रम नहीं था। मालवीय के नेतृत्व में कार्यकर्ता तो सिर्फ मिलने के लिए जयपुर आए थे। मैंने तो कार्यकर्ताओं से आग्रह किया था कि वे बांसवाड़ा डूंगरपुर से जयपुर नहीं आए। थोड़े दिनों में मैं स्वयं ही बांसवाड़ा आ जाऊंगा। लेकिन जब कार्यकर्ता आ ही गए तो मैं मिलने के बाद सभी कार्यकर्ता शिष्टाचार के नाते अध्यक्ष डोटासरा से भी मिलने के लिए चले गए। गहलोत ने कहा कि डोटासरा ने कोई नाराजगी नहीं जताई। मीडिया वाले बेवजह इस मामले को तूल दे रहे हैं। मेरे और डोटासरा के बीच कोई विवाद नहीं है।

 
नारों पर टिप्पणी नहीं:
असल में डोटासरा की सबसे ज्यादा नाराजगी गहलोत के निवास पर चौथी बार गहलोत सरकार के नारों को लेकर थी, लेकिन गहलोत ने इसे नारे को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। गहलोत की सफाई से प्रतीत होता है कि मालवीय के समर्थक तो सिर्फ अशोक गहलोत से मिलने के लिए ही जयपुर आए थे। मालवीय को तो सिर्फ गहलोत की ही ब्रांडिंग करनी थी। बाद में डोटासरा से मिलने का कार्यक्रम भी जोड़ा गया। इसलिए गहलोत ने कहा कि डोटासरा के पास जानकारी का अभाव रहा। असल में कांग्रेस की राजनीति में सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा चौथी बार गहलोत सरकार का नारा ही है। लेकिन अशोक गहलोत इस नारे पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे है। इससे जाहिर है कि गहलोत चौथी बार राजस्थान का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं।
 
संदीप चौधरी की टिप्पणी से विवाद और बढ़ा:
गहलोत भले ही डोटासरा के साथ कोई विवाद होने से इंकार करे,लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष संदीप चौधरी के ताजा बयान से विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस की राजनीति में गहलोत का समर्थक माने जाने वाले संदीप चौधरी ने 31 जुलाई को किसी नेता का नाम लिए बगैर कहा कि ऐरे गैरे नत्थू गेरे जब कुछ बन जाते हैं तो पागल हो जाते हैं। माना जा रहा है कि संदीप चौधरी की यह टिप्पणी डोटासरा को लेकर है। मालूम हो कि वर्ष 2020 में जब सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के 18 विधायक दिल्ली चले गए थे, तब मुख्यमंत्री रहते हुए अशोक गहलोत ने पायलट के स्थान पर डोटासरा को ही प्रदेशाध्यक्ष बनवाया था। तब गहलोत के समर्थन के कारण अनेक वरिष्ठ नेताओं के रहते हुए डोटासरा अध्यक्ष बने। चूंकि उस समय गहलोत को गांधी परिवार का पूरा संरक्षण था, इसलिए वे जूनियन होते हुए भी डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने में सफल रहे, भले ही गहलोत ने डोटासरा को अध्यक्ष बनवाया हो, लेकिन गहलोत को यह नहीं भूलना चाहिए कि अब डोटासरा भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं और उन्हें यह पसंद नहीं कि कांग्रेस का कार्यकर्ता चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाए। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-08-2026)

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