आरपीएससी के सचिव रामनिवास मेहता की सेवानिवृत्ति पर अनूठा प्रदर्शन।
लेकिन नौकरशाही की जीत को रस्सियों से खींचना कितना उचित।
यह कृत्य आयोग के सदस्यों की गरिमा के विपरीत भी है।
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31 जुलाई को आईएएस रामनिवास मेहता राजस्थान लोक सेवा आयोग के सचिव के पद से सेवानिवृत्ति हुए। दावा किया गया कि आयोग के इतिहास में यह पहला अवसर है जब कोई सचिव सेवानिवृत्त हुआ है। यानी अभी कोई भी आईएएस आयोग के सचिव के पद से सेवानिवृत्त नहीं हुआ। जो भी सचिव आए वे सेवानिवृत्ति से पहले ही तबादला करवाकर चले गए। मेहता ने सेवानिवृत्ति तक सचिव के पद पर काम किया। यह भी सही है कि सचिव के पद पर रहते हुए मेहता ने मन लगाकर काम किया। आयोग जब पेपर लीक के बुरे दौर से गुजर रहा था, तब मेहता ने अभ्यर्थी से सीधा संवाद कर भरोसा कायम करने का प्रयास किया। मेहता अपने कक्ष से उठकर आयोग के बाहर आ गए और अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान किया। इसलिए अब जब 31 जुलाई को मेहता की सेवानिवृत्ति हुई तो आयोग के सदस्यों अधिकारियों और कर्मियों ने खुली जीप मंगवाई और मेहता को जीप पर खड़ा किया तथा सभी ने मिलकर रस्सियों से जीप को खींचा। रस्सियों से जीप को खींचने वालों में आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष कर्नल केसरी सिंह राठौड़, सदस्य हेमंत प्रियदर्शी, डॉ. सुशील बिस्सू भी शामिल रहे। लेकिन सवाल उठता है कि क्या किसी नौकरशाह को सेवानिवृत्ति पर खुली जीप में बैठाकर रस्सियों से खींचा जाना चाहिए? आयोग के अधिकारी और कार्मिक कुछ भी तर्क दे, लेकिन यह आयोग के सदस्यों की गरिमा के विपरीत भी है। आयोग के सदस्य के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्यपाल द्वारा एक बार नियुक्ति आदेश करने के बाद सुप्रीम कोर्ट भी सदस्य को हटा नहीं सकता। इतनी मजबूत स्थिति वाले सदस्य यदि किसी नौकरशाह को सेवानिवृत्ति पर जीप में बैठाकर रस्सियों से खींचे तो इसे किसी भी दृष्टि में उचित नहीं माना जा सकता। रामनिवास मेहता की सेवाएं अपनी जगह है। मेहता की सेवाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन इस तरह का प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था में कतई उचित नहीं है। 31 जुलाई को आयोग के सदस्य डॉ. अशोक कुमार कलवार का कार्यकाल भी पूरा हो हुआ। इसलिए खुली जीप में मेहता के साथ डॉ. कलवार को भी खड़ा कर दिया गया। आयोग के इतिहास में पहली बार ऐसा प्रदर्शन हुआ, जब कार्यकाल पूरा होने के बाद किसी सदस्य को नौकरशाह के साथ खड़ा किया गया। आयोग के प्रशासनिक ढांचे में सदस्य और सचिव के बीच काफी अंतर है। सचिव आयोग के सदस्यों के निर्देश पर काम करता है। केसरी सिंह राठौड़ तो सेना में कर्नल के पद पर रह चुके हैं। क्या किसी सेन्य अधिकारी रहे व्यक्ति को किसी नौकरशाह की जीप को खींचना चाहिए?
S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-08-2026)
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