Sunday, 20 September 2026

चार वर्ष में अजमेर में सर्वाधिक लोकप्रिय दगड़ू सेठ वाले गणेशजी। ======== अजमेर के रामनगर स्थित पंचोली चौराहे के निकट वाटर पंडाल में दगड़ू सेठ वाले गणेश जी विराजमान है। 14 सितंबर को इस पांडाल में गणेश स्थापना की गई थी। दगड़ू सेठ महाराज समिति के प्रतिनिधियों अनुसार 25 सितंबर को समापन समारोह होगा। अजमेर में इसी स्थान पर तीन वर्ष पहले दगड़ू सेठ के तौर पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित की गई थी, तभी से प्रति वर्ष यहां गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। इन चार वर्षों में दगड़ू सेठ वाले गणेशजी अजमेर में सर्वाधिक लोकप्रिय हो गए हैं। प्रतिदिन शाम को आरती के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। शहर भर के श्रद्धालुओं की उपस्थिति बताती है कि दगड़ू सेठ की लोकप्रियता अजमेर में तेजी से बढ़ी है। यहां समारोह समिति की ओर प्रतिदिन प्रसाद का वितरण भी किया जाता है। बरसात के मौसम में ध्यान में रखते हुए वाटरप्रूफ पंडाल बनाया गया है, इस पांडाल को आकर्षक तौर पर सजाया भी गया है। 20 सितंबर को आरती में श्री अजमेर व्यापारिक महासंघ के अध्यक्ष महेंद्र बसंल, महासचिव रमेश लालवानी, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण कुमार, चितलेश बंसल, संजय अरोड़ा, बीके कौल नगर स्थिति प्राचीन वीर हनुमान मंदिर के उपासक भूपेश सांखला आदि उपस्थित रहे। सभी ने गणेश प्रतिमा की आरती की। व्यापारिक महासंघ के अध्यक्ष बंसल ने कहा, यहां श्रद्धालुओं के लिए माकूल व्यवस्था की गई है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि दगड़ू सेठ वाले गणेशजी के दर्शन आवश्यक किए जाए। यहां यह उल्लेखनीय है कि दगडू सेठ वाले गणेश जी की प्रसिद्धि महाराष्ट्र के पुणे शहर की। पूर्व में पुणे में गणेश महोत्सव के दौरान व्यापारी दगडू सेठ ने गणेश प्रतिमा स्थापित की थी, तभी से पुणे में दगड़ू सेठ वाले गणेश जी प्रसिद्ध हो गए। पुणे की तर्ज पर ही अजमेर में भी दगडू सेठ के स्वरूप में गणेश जी को विराजमान किया गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
केकड़ी पालिका के अध्यक्ष पद के कांग्रेसी उम्मीदवार अनिल मित्तल की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई। केकड़ी के भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम पर पूर्व मंत्री रघु शर्मा 50 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा करेंगे। सिंधी समुदाय को पाकिस्तानी कहने पर पहले ही हो चुका है मुकदमा। ============== अजमेर के केकड़ी नगर पालिका के चुनाव में अध्यक्ष पद के कांग्रेस के उम्मीदवार अनिल मित्तल की गिरफ्तारी पर 20 सितंबर की रात को हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट की ओर से कहा गया है, मित्तल और कांग्रेस के अन्य पार्षदों को बिना किसी बाधा के 21 सितंबर को मतदान करने दिया जाए। मित्तल के विरुद्ध भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने 20 सितंबर को जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया था। इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि अनिल मित्तल भाजपा के पार्षदों को प्रलोभन दे रहे हैं। इसी आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। बताया जा रहा है कि मित्तल को गिरफ्तार करने के लिए रात को तलाशी अभियान भी चलाया गया। लेकिन इसी बीच एडवोकेट आरपी सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। मुख्य न्यायाधीश की विशेष अनुमति के बाद जस्टिस अनूप दंड ने मामले की सुनवाई की और रात को ही मित्तल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट की इस कार्यवाही के दौरान केकड़ी के पूर्व विधायक रघु शर्मा ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार पुलिस का दुरुपयोग कर रही है। मानहानि का मुकदमा: अजमेर के केकड़ी के पूर्व विधायक और कैबिनेट मंत्री रहे रघु शर्मा, भाजपा के मौजूदा विधायक शत्रुघ्न गौतम पर 50 करोड़ रुपए के मानहानि का मुकदमा करेंगे। रघु शर्मा ने कहा कि केकड़ी नगर पालिका चुनाव के दौरान विधायक गौतम ने सार्वजनिक तौर पर कह रहे है कि केकड़ी में पार्षदों के टिकट कांग्रेस के नेताओं ने 3 करोड़ रुपए में बेच दिए हैं। रघु शर्मा ने कहा कि विधायक गौतम का यह कथन झूठा और निराधार है। केकड़ी में गहन जांच पड़ताल और जिताऊ स्थिति को देखते ही टिकट दिए गए। यही वजह रही कि 40 में से 20 उम्मीदवार कांग्रेस के विजयी हुए। अब केकड़ी में पालिकाध्यक्ष भी कांग्रेस का बन रहा है,इसलिए विधायक गौतम बौखलाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि विधायक गौतम ने अपने झूठ कथन के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी तो वह जल्द ही 50 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा अदालत में दायर करेंगे। पहले भी हो चुका है मुकदमा: नगर पालिका के चुनाव में सिंधी समुदाय के लोगों को पाकिस्तानी कहने पर विधायक गौतम के विरुद्ध हाल ही में अदालत में एक वाद दायर किया है। एडवोकेट मनोज आहूजा की ओर से दायर इस वाद में कहा गया है कि विधायक गौतम की यह टिप्पणी संपूर्ण सिंधी समाज की छवि खराब करने वाली है। आहूजा ने अदालत में विधायक गौतम का वीडियो भी प्रस्तुत किया है। वाद में विधायक गौतम के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। इस मामले में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। इस वाद के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414434927 पर मनोज आहूजा से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
राहुल गांधी ने हास्य कलाकार के साथ मिल कर पीएम मोदी का मजाक उड़ाया। इसलिए राजनीति में राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लिया जाता। राहुल गांधी का ऐसा कृत्य प्रतिपक्ष के नेता के पद पर भी सवाल उठता है। ============== कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और मौजूदा समय में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों की गूंज के कार्यक्रम में मंच पर हास्य कलाकार पुलकित मणि को बुलाया और फिर दोनों ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाया। दोनों ने पीएम मोदी की दिवंगत माता जी को भी घसीट लिया। राहुल गांधी राजनीतिक मुद्दों पर पीएम मोदी पर हमला करे, इस पर किसी को भी ऐतराज नहीं है, लेकिन जब राहुल गांधी किसी हास्य कलाकार के साथ देश के प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाएंगे, तो इसे लोकतंत्र में सभ्य तरीका नहीं माना जाएगा। यह माना कि नरेंद्र मोदी के कारण कांग्रेस पिछले 12 वर्षों से सत्ता से बाहर है। राज्यों में भी कांग्रेस की लगातार हार हो रही है। 28 राज्यों में से मात्र चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। लगातार हार की वजह से राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता निराश और हताश है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि सार्वजनिक मंचों पर पीएम मोदी और उनकी दिवंगत माताजी का मजाक उड़ाया जाए। जो राहुल गांधी 150 वर्ष पुरानी कांग्रेस के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे, उन्हें जब पीएम ेादी पर हमला करने के लिए हास्य कलाकार की जरूरत हो रही है? राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता भी है। प्रतिपक्ष का नेता होने के कारण राहुल गांधी संवैधानिक पद पर है। राहुल को कम से कम अपने संवैधानिक पद की मर्यादाओं का तो ख्याल रखना ही चाहिए। जब राहुल गांधी सार्वजनिक मंच पर किसी हास्य कलाकार के साथ मिमिक्री करते हैं तो स्वयं का भी मजाक उड़ाते हैं। क्या विपक्ष का नेता मिमिक्री करते हुए अच्छा लगाता है? राहुल गांधी माने या नहीं, लेकिन ऐसे कृत्यों के कारण ही देश की राजनीति में उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। राहुल गांधी को तथ्यों के आधार पर पीएम मोदी की आलोचना करनी चाहिए। इसके लिए राहुल गांधी के पास संसद में विशेषाधिकार है। राहुल गांधी चाहे जितने समय तक संसद में पीएम मोदी की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन सब जानते है कि राहुल गांधी संसद सत्र को चलने ही नहीं देते। पिछले एक वर्ष से संसद के तीनों सत्र हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। अच्छा होता कि राहुल गांधी तथ्यों के आधार पर संसद में आलोचना करते। चूंकि संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण भी होता है, इसलिए राहुल गांधी की राजनीतिक कुशलता देखने और सुनने का अवसर देशवासियों को मिलता, लेकिन राहुल गांधी संसद के बाहर पीएम मोदी की मिमिक्री करते है। राहुल गांधी के इस मर्यादाहीन कृत्य को पूरा देश देख रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
विद्या भारती के 13 हजार और निजी स्कूलों में एक करोड़ से ज्यादा छात्र और अभिभावक 25 सितंबर को प्रात: 11 बजे पूरा वन्देमातरम का गायन करेंगे। यह विश्व रिकॉर्ड बनेगा। ============== वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर वंदे मातरम गीत एक लय और एक साथ गायन के लिए अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान विद्या भारती ने एक अनूठी पहल की है। देशभर में विद्या भारती के 13 हजार से ज्यादा विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में 30 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। विद्या भारत की पहल पर देश भर के सभी 13 हजार विद्यालयों के साथ साथ निजी क्षेत्र के अनेक विद्यालयों में भी 25 सितंबर को प्रात: 11 बजे वंदे मातरम गीत का गायन होगा। इसमें छात्रों के अभिभावक और क्षेत्र के सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग भी भाग लेंगे। यानी कोई भी नागरिक विद्या भारती और संबंधित निजी स्कूलों में पहुंचकर वंदे मातरम गीत का गायन कर सकता है। विद्या भारती के अजमेर स्थित आदर्श विद्या निकेतन विद्यालय के प्राचार्य भूपेंद्र उबाना ने बताया कि देश की आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम गीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वतंत्रता सेनानियों ने इस गीत को गाकर ही अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलाया। आज भी यह गीत देश के हर नागरिक को देशभक्ति की प्रेरणा देता है। किन्हीं कारणों से आजादी के बाद वंदे मातरम गीत के सिर्फ दो छंद का ही गायन हुआ। जबकि पूरे गीत में 6 छंद है। हाल ही में वंदे मातरम गीत के लिए एक कानून भी बनाया गया है। अब सरकारी समारोह में वंदे मातरम गीत का गायन अनिवार्य हो गया है। 25 सितंबर को प्रात: 11 बजे विद्या भारती के सभी विद्यालयों में पूरा गीत गाया जाएगा। इसके लिए देश भर के विद्यालयों में विशेष प्रबंध किए गए है। विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी आमंत्रित किया गया है। राजस्थान में विद्या भारती के एक हजार विद्यालय हैं, इनमें 6 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन करते हैं, इस कार्यक्रम के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9166213003 पर भूपेंद्र उबाना से ली जा सकती है। सभी 6 छंद वाला वंदे मातरम: छंद 1 वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलाम् मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥ छंद 2 शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम्, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्। सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्, सुखदां वरदां मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ छंद 3 कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले, द्विसप्तकोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले, के बोले मा तुमि अबले। बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं, रिपुदलवारिणीं मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ छंद 4 तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हृदि तुमि मर्म, त्वं हि प्राणाः शरीरे। बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे॥ वन्दे मातरम्॥ छंद 5 त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्। नमामि कमलाम अमलाम अतुलाम, सुजलां सुफलां मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ छंद 6 श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्, धरणीम् भरणीम् मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ S.P.MITTAL BLOGGER ( 21-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
क्या पार्षदों को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के साथ नाश्ता करवा देने से अजमेर में कांग्रेस का मेयर बन जाएगा? धर्मेन्द्र राठौड़ और डॉ. जयपाल की प्रतिष्ठा दांव पर। ब्रह्माजी आ जाए तब भी भाजपा का मेयर नहीं बन सकता-रामचंद्र चौधरी। ============== अजमेर के सभी 37 कांग्रेस के पार्षद इन दिनों कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में है। अजमेर में कांग्रेस के पार्षद इधर उधर न हो जाए, इसलिए पार्षदों को बेंगलुरु में सुरक्षित रखा गया है। कांग्रेस के नेताओं की योजना के मुताबिक पार्षदों को 20 सितंबर को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के.शिवकुमार के साथ नाश्ता करने का अवसर भी मिलेगा। बड़े नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री के साथ नाश्ता करने से पार्षदों की हौसला अफजाई होगी। वे कांग्रेस के प्रति वफादार बने रहेंगे, लेकिन सवाल उठता है कि क्या पार्षदों के मुख्यमंत्री के साथ नाश्ता कर लेने से अजमेर में कांग्रेस का मेयर बन जाएगा? मेयर बनने के लिए 41 पार्षदों के बहुमत की जरूरत है। कांग्रेस का दावा है कि 11 निर्दलीय पार्षदों में से चार का समर्थन मिल गया है। मेयर पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है। इसलिए कांग्रेस के सभी पार्षद 20 सितंबर की रात तक अजमेर आ जाएंगे। 21 सितंबर को 11 बजे मतदान शुरू होने के साथ ही कांग्रेस के पार्षद वोट डाल देंगे। नगर निगम के चुनाव में इस बार शहरी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल और आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई हैै। यदि कांग्रेस की उम्मीदवार किरण गढ़वाल मेयर बनती है तो इसका पूरा श्रेय डॉ. जयपाल और राठौड़ को मिलेगा। पार्षदों को कर्नाटक ले जाने का फैसला भी इन दोनों ही नेताओं ने लिया। वही भाजपा के नेताओं खासकर विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का मानना है कि कांग्रेस के पार्षदों में क्रॉस वोटिंग होगी। भाजपा ने श्रीमती अनामिका शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं डेयरी के अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामचंद्र चौधरी ने कहा, अब ब्रह्माजी भी आ जाए तब भी भाजपा का मेयर नहीं बन सकता है। अजमेर में कांग्रेस का मेयर बनना तय है। मालूम हो कि भाजपा के पार्षदों की संख्या 32 है। भाजपा को अनेक निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी बताया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
साम्यवाद से नहीं हिंदू कट्टरता से भारत को खतरा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि हामिद अंसारी ने 10 वर्ष तक किस मानसिकता से उपराष्ट्रपति के पद पर काम किया। पीएम मोदी तो 9 वर्ष पहले ही अंसारी की छटपटाहट समझ गए थे। ============== 19 सितंबर को पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने ए.जी.नूरानी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से आयोजित एक समारोह में भाग लिया। अंसारी ने देश के हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज जितना खतरा साम्यवाद से नहीं है, उससे कहीं ज्यादा हिंदू कट्टरता से है। अंसारी ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी हिंदू कट्टरता को खतरा बताया था। हिंदू कट्टरता की परिभाषा क्या है, यह तो हामिद अंसारी ही जानते हैं, लेकिन हामिद अंसारी के इस बयान से पता चलता है कि उनके मन में बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय के प्रति कितनी नफरत है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंसारी ने 10 वर्षों तक किस मानसिकता के साथ उपराष्ट्रपति के पद पर काम किया। अंसारी हिंदू कट्टरता को तो खतरा मानते हैं, लेकिन साम्यवाद को नहीं। शायद हामिद अंसारी को साम्यवादी देशों में रहने का अवसर नहीं मिला है। दुनिया में साम्यवादी देश के रूप में चीन की पहचान है। भारत में तो उपराष्ट्रपति के पद से कार्यमुक्त होने के बाद भी हामिद अंसारी ऐसे बयान दे सकते हैं। यदि यही हामिद अंसारी चीन में रहकर ऐसा बयान देते तो उनके गायब होने की सूचना भी नहीं मिलती। जिस साम्यवाद को बेहतर बताया जा रहा है, उस साम्यवाद वाले देश चीन में हामिद अंसारी को कुछ माह रहना चाहिए। अंसारी को पता चल जाएगा कि कट्टरता क्या होती है। हिन्दू कट्टरता की आड़ लेकर अंसारी ने मौजूदा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर हमला बोला है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पीएम मोदी सनातन संस्कृति और धर्म के प्रबल समर्थक और संरक्षण है। अपने इन विचारों को नरेंद्र मोदी छिपाते भी नहीं है। यदि मोदी में कट्टरता होती तो आज 25 करोड़ मुसलमान पूर्ण सुरक्षा के साथ भारत में नहीं रह सकते थे। हामिद अंसारी को भले ही देश में हिंदू कट्टरता नजर आए, लेकिन आज दुनिया में मुसलमान सबसे ज्यादा भारत में सुरक्षित है। पड़ोसी और इस्लामिक देश पाकिस्तान में 18 सितंबर को ही मस्जिद के पास जो बम विस्फोट हुआ उस में 40 से ज्यादा मुसलमान मारे गए। हामिद अंसारी को कट्टरता देखनी ही है तो एक बार पाकिस्तान का दौरा करे। हामिद अंसारी को यह भी समझना चाहिए कि सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों का सम्मान करता है। जिस इस्लाम धर्म को हामिद अंसारी मानते हैं, उसमें अन्य धर्मों के बारे में क्या लिखा है, यह हामिद अंसारी को पढऩा और समझना चाहिए। यह पहला अवसर नहीं है जब हामिद अंसारी ने हिंदुओं को लेकर ऐसा बयान दिया है, इससे पहले भी कई अवसरों पर अंसारी ने अपनी हिन्दू विरोधी भावनाओं को प्रकट किया है। हिंदुओं को लेकर हामिद अंसारी के मन में जो छटपटाहट है, उसे 9 वर्ष पहले ही पीएम मोदी ने समझ लिया था। हामिद अंसारी वर्ष 2007 से लेकर 2017 तक उपराष्ट्रपति के पद पर रहे। यानी करीब साढ़े तीन साल अंसारी को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए के साथ काम करना पड़ा। चूंकि उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के सभापति होते हैं, इसलिए कई बार हामिद अंसारी की मानसिकता राज्यसभा में भी देखने मिली। वर्ष 2017 में जब अंसारी का विदाई समारोह हुआ तो पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मुझे पता है कि उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति रहते हुए आपके (अंसारी) के मन में छटपटाहट रही। लेकिन अब आप इस छटपटाहट से मुक्त हो रहे हैं। अब आप अपनी मानसिकता और विचारों के अनुरूप जीवन जी सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
राहुल गांधी देश भर में छात्रों को भड़काते रहे और दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ पर भाजपा समर्थित एबीवीपी की जीत हो गई। कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई का एक भी उम्मीदवार नहीं जीत सका। ============== लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों देशभर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने का काम कर रहे हें। 19 सितंबर को भी राहुल गांधी ने इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने छात्रों से सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क पर आकर आवाज उठाने का आह्वान किया। इधर राहुल गांधी देश भर में कार्यक्रम कर छात्रों को भड़का रहे हैं तो दूसरी और 19 सितंबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ के चुनाव में चार में से तीन प्रमुख स्थानों पर भाजपा समर्थित एबीवीपी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। अध्यक्ष पद पर विजय डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह विजयी हुए। जबकि दीपांशु शौकीन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपाध्यक्ष बने। यानी कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के उम्मीदवार सभी पदों पर हार गए। एबीवीपी की इस जीत के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और किरण रिजिजू ने सीधे राहुल गांधी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी चाहे जितना भी भड़काने का काम करे, लेकिन देश के छात्र समझते हैं कि शिक्षा नीति में जो बदलाव किए जा रहे है, वह देश हित में है। एबीवीपी की जीत बताती है कि छात्रों ने राहुल गांधी के बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भरोसा जताया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी को देश भर की यूनिवर्सिटीज की प्रतिनिधि संस्था माना जाता है। एबीवीपी की जीत बताती है कि देश के विद्यार्थियों का भरोसा केंद्र सरकार की नीतियों पर है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
जयपुर में सच बेधड़क मीडिया ग्रुप के प्रॉपर्टी एक्सपो में फ्लैट, विला, फार्म हाउस और भूखंड खरीदने वालों की भीड़। मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों ने भी भाग लिया। 2047 तक राजस्थान को भी विकसित प्रदेश बनाना है-पवन अरोड़ा, सीएमडी ====================== सच बेधड़क मीडिया समूह की ओर से जयपुर के एंटरटेनमेंट पैराडाइज परिसर में दो दिवसीय प्रीमिय प्रॉपर्टी एक्सपो का शुभारंभ 19 सितंबर को धूमधाम से हुआ। एक्सपो का समापन 20 सितंबर की शाम को होगा। इस एक्सपो में एक ही छत के नीचे प्रदेश भर के बिल्डर्स, कॉलोनाइजर्स को अपनी संपत्तियों को बेचने का अवसर मिल रहा है। यही वजह है कि फ्लैट, विला, फार्म हाउस और भूखंड खरीदने वालों की भीड़ इस एक्सपो में लगी है। खरीदारों को विभिन्न प्रोजेक्ट, लोकेशन सुविधाओं, निर्माण की गुणवत्ता और प्रॉपर्टी के विकल्पों की जानकारी मिल रही है। 19 सितंबर को एक्सपो के शुभारंभ पर नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा, सच बेधड़क मीडिया ग्रुप ने एक अच्छी पहल की है। जो लोग जयपुर में प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, उन्हें इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी। शुभारंभ समारोह में सच बेधड़क मीडिया समूह के सीएमडी पवन अरोड़ा (पूर्व आईएएस) ने कहा कि बिल्डर्स, कॉलोनाइजर्स और आम खरीदारों को एक छत के नीचे जोड़ने की पहल की है, ताकि लोगों को विश्वसनीय प्रोजेक्ट्स की जानकारी मिले और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता व विश्वास मजबूत हो। समारोह में स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव रवि जैन, जयपुर नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा, ट्रैफिक डीसीपी योगेश गोयल आवासन मंडल के चीफ इंजीनियर अमित अग्रवाल डीसीपी साउथ राजर्षि राजा डब्ल्यूटीपी के सीएमडी अनूप बरतरिया भाजपा प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज अशोक सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ाकर और हरियाली के प्रतीक पौधे भेंट कर स्वागत किया गया। समारोह में सच बेधड़क मीडिया ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिशिर अवस्थी सच बेधड़क चैनल के एडिटर रमाकांत चतुर्वेदी और सच बेधड़क दैनिक अखबार के संपादक मनोज माथुर भी मौजूद रहे। आयोजन की व्यवस्थाएं सच बेधड़क न्यूज़ चैनल की बिजनेस एवं ब्रांडिंग हेड आस्था मेहंदीरत्ता ने संभाल रखी थीं। सच बेधड़क मीडिया ग्रुप ने द खटक को टेकओवर कर लिया है। इस मौके पर द खटक के प्रतिनिधि अशोक शेरा भी उपस्थित रहे। प्रथम पूज्य गणेश की पूजा अर्चना: दोपहर में आयोजित मुख्य समारोह से पहले प्रातः 11 बजे राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और मोती डूंगरी गणेश मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने गणेश पूजन और फीता काटकर एक्सपो का औपचारिक उद्घाटन किया। एक क्लिक पर कई प्लेटफॉर्म, ओटीटी एप लॉन्च: मुख्य समारोह के दौरान अतिथियों ने संयुक्त रूप से सच बेधड़क के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'SB ONE' ओटीटी एप लॉन्च किया। इसके जरिए सच बेधड़क टीवी, सच बेधड़क अखबार, गणगौर टीवी और द खटक सहित उपलब्ध डिजिटल कंटेंट को एक ही प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकेगा। अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच को एक जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'SB ONE' ओटीटी ऐप को लॉन्च किया गया है। 25 से ज्यादा स्टॉल पर प्रॉपर्टी के विकल्प एक्सपो में 25 से अधिक स्टॉल पर विभिन्न प्रोजेक्ट्स की लोकेशन, सुविधाओं और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दी जा रही है। इनमें केजीके रियलिटी द हाउस ऑफ शुभाशीष, नेचर होम्स एंड स्पेसेज, अक्षत, मंगलम, ओके प्लस बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, समन्वय, इम्पीरियल होम्स, त्रिमूर्ति, विराट ग्रुप, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, वीजी ग्रुप, जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर नगर निगम, आशीष ग्रुप, संजीवनी बिल्डहोम पृथ्वी, आशादीप और टर्बन सहित कई संस्थान व कंपनियां शामिल हैं। 20 को समापन: दो दिवसीय एक्सपो का समापन 20 सितंबर को शाम 5 बजे क्लोजिंग सेरेमनी के साथ होगा। समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी जलदाय मंत्री सुरेश रावत विधायक कालीचरण सराफ, बालमुकुंदाचार्य, गोपाल शर्माए कैलाश वर्मा, जेडीसी सिद्धार्थ महाजन और आर्किटेक्ट रितु खंडेलवाल मौजूद रहेंगी। ग्रुप के सीएमडी पवन अरोड़ा ने कहा,भरोसे से विकास तक सच बेधड़क की पहल यह सिर्फ प्रॉपर्टी एक्सपो नहीं बल्कि भरोसे और विकास को एक मंच पर लाने की कोशिश है। मीडिया की जिम्मेदारी केवल खबर दिखाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज और प्रदेश के आर्थिक विकास में भी भूमिका निभानी चाहिए। विकसित भारत 2047 और विकसित राजस्थान 2047 की दिशा में निजी क्षेत्र और मीडिया मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस एक्सपो के बारे में और अधिक जानकारी ग्रुप एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिविर अवस्थी से मोबाइल नंबर 9024939667 पर ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अजमेर में इस बार सोनार दुर्ग में विराजे हैं लम्बोदर राजा। ============= अजमेर के पुरानी मंडी के कायस्थ मोहल्ला में गुलाब प्रांगण में इस बार भी गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। यहां पिछले 19 वर्षों से लम्बोदर राजा के रूप में गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है। हर वर्ष नई थीम के अनुरूप प्रांगण को सजाया जाता है। इस बार लम्बोदर राजा को राजस्थान के प्रसिद्ध सोनार दुर्ग में विराजमान किया गया है। लम्बोदर राजा को भी स्वर्ण आभूषणों से सजाया गया है। यही वजह है कि इस बार अजमेर में लम्बोदर राजा के दर्शन करने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आ रहे है। 18 सितंबर को शाम को मुझे भी लम्बोदर राजा की आरती करने का अवसर मिला। आरती के दौरान जो अनुभूति हुई उससे मैं कह सकता हूं कि गुलाब प्रांगण में आने वाले हर श्रद्धालु को गणेशजी का आशीर्वाद मिल रहा है। आयोजन समिति के प्रमुख कमल पवार ने बताया कि प्रांगण में राजस्थान के महापुरुषों और वी योद्धाओं की तस्वीरों को भी लगाया गया है ताकि युवा पीढ़ी राजस्थान के इतिहास से प्रेरणा ले सके। मेरे साथ महाआरती में बीके कौल नगर स्थित प्राचीन वीर बालाजी मंदिर के उपासक भूपेश सांखला और अन्य गणमान्य नागरिक भी शामिल रहे। इस आयोजन के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9358805477 पर कमल पंवार से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 19-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
दो निगम, 6 परिषद और 22 नगर पालिकाओं में भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन। राजस्थान के इतिहास में ऐसा पहली बार। पूर्व सीएम गहलोत ने माना कि कांग्रेस का चुनावी प्रबंधन कमजोर रहा। डोटासरा ने हिंसा होने की आशंका जताई। ============= राजस्थान के 309 शहरी निकायों के प्रमुखों का चुनाव 21 सितंबर को होना है, लेकिन 18 सितंबर को नाम वापसी के बाद 32 निकायों के प्रमुखों का चुनाव निर्विरोध हो गया। इन 32 में से 30 भाजपा के प्रमुख है, जबकि कांग्रेस सिर्फ 2 में ही निर्विरोध निर्वाचन करवा सकती है। 10 नगर निगम में से भाजपा भीलवाड़ा और भरतपुर में अपने मेयर को निर्विरोध निर्वाचित करवा सकती है। इसी प्रकार 6 नगर परिषद और 22 पालिकाओं में भी भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। राजस्थान के इतिहास में पहला अवसर है, जब 30 निकायों में भाजपा के उम्मीदवार का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। यह सब भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री रहते हुए हुआ है। दिसंबर 2023 में जब पहली बार विधायक बने शर्मा को भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया, तब आशंका जताई गई थी कि शर्मा कमजोर मुख्यमंत्री साबित होंगे, लेकिन शहरी निकायों के 30 स्थानों पर निर्विरोध प्रमुख बनना दर्शाता है कि भजनलाल शर्मा कमजोर मुख्यमंत्री नहीं है। 21 सितंबर को जब शेष निकाय प्रमुखों के परिणाम सामने आएंगे, तब चुनाव की असली तस्वीर सामने आएगी। असल में शहरी निकायों के चुनाव में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा शुरू से ही हमलावर रही। शहरी निकायों का परिणाम इसलिए भी महत्व रखता है कि अगले माह ही पंचायती राज के चुनाव होने हैं। सीएम शर्मा की यह भी बड़ी उपलब्धि है कि राजस्थान में वन स्टेट, वन इलेक्शन की नीति के तहत शहरी निकाय और पंचायती राज के चुनाव एक साथ हो रहे हैं। कमजोर प्रबंध स्वीकारा: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने स्वीकार किया है कि शहरी निकाय के चुनाव में कांग्रेस का प्रबंधन कमजोर रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी को जो प्रभावी रणनीति बनानी चाहिए थी, वह नहीं बनाई गई। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के रोड शो का जवाब कांग्रेस के नेताओं के रोड शो से देना चाहिए था। उन्होंने माना कि निर्णय लेने में चूक हुई है। हिंसा की आशंका: वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। उन होटलों की जांच की जा रही है, जहां कांग्रेस के पार्षद ठहरे हुए हैं। जांच के नाम पर कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को पुलिस उठाकर ले जा रही है। पार्षदों को डराया धमकाया जा रहा है। डोटासरा ने राज्य के डीजीपी राजीव शर्मा से कहा कि पुलिस के दुरुपयोग को रोका जाए, नहीं तो खून खराबा हो जाएगा। पार्षदों के परिजन आक्रोशित है। लोगों में भी पुलिस के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। डोटासरा ने कहा कि भाजपा के उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन इसलिए हुआ है कि पुलिस ने कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों को डरा धमका कर नाम वापसी करवाई। पहले वार्ड चुनाव में और अब निकाय प्रमुख के चुनाव में भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 19-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
पुष्कर में सभापति निर्विरोध करवाकर भाजपा ने अजमेर जिले में खाता खोला। अजमेर पुलिस भाजपा के एजेंट-कांग्रेस। ============= अजमेर जिले के शहरी निकायों में भाजपा का खाता खुल गया है। 18 सितंबर को पुष्कर नगर पालिका में भाजपा के राजेंद्र बाकोलिया निर्विरोध सभापति बन गए है। बाकोलिया का निर्विरोध निर्वाचन इसलिए हो सकता कि कांग्रेस समर्थक नारायण दायमा ने अपना नामांकन वापस ले लिया। भाजपा उम्मीदवार के निर्विरोध निर्वाचन में पुष्कर के विधायक व कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत और पूर्व सभापति कमल पाठक की अहम भूमिका रही। पुष्कर में 25 में से 19 पार्षद भाजपा के जीते थे। इसलिए भाजपा को पूरा बहुमत था। लेकिन नारायण दायमा की उम्मीदवारी से मतदान का हालात उत्पन्न हो गए थे, लेकिन रावत और पाठक ने प्रयास कर दायमा का नामांकन वापस करवा दिया। अजमेर जिले में अजमेर नगर निगम सहित 10 निकायों में प्रमुख के चुनाव 21 सितंबर को होंगे। अजमेर नगर निगम में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए दोनों के उम्मीदवार 11 निर्दलीयों उम्मीदवारों पर निगाह टिकाए हुए है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास 42 पार्षदों का जुगाड़ है, जबकि भाजपा को उम्मीद है कि मतदान वाले दिन कांग्रेस के पार्षद क्रॉस वोटिंग करेंगे। किशनगढ़ नगर परिषद में भी किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है। इसलिए दोनों दलों के उम्मीदवारों की नजर 10 निर्दलीय पार्षदों पर है। सावर नगर पालिका में 20 में से भाजपा को 15 सीटें मिली है, इसलिए भाजपा की उम्मीदवार पद्मिनी धाबाई का अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। नसीराबाद नगर पालिका में 20 वार्डों में से 9-9 भाजपा और कांग्रेस जीत हुई है। ऐसे में दोना दल निर्दलीय उम्मीदवार पर निर्भर है। पीसांगन नगर पालिका 25 सीटों में भाजपा को 9 और कांग्रेस को 8 सीट मिली है, जबकि 9 सीटें निर्दलीय पार्षदों के पास है, भाजपा को उम्मीद है कि निर्दलीय पार्षदों के दम पर लोकेश लांबा अध्यक्ष बन जाएंगे। सरवाड़ में भी भाजपा के उम्मीदवार मनोज सैनी की स्थिति मजबूत है, क्योंकि 25 में से 15 पार्षद भाजपा के हैं। मसूदा में भी भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए भाजपा उम्मीदवार टीकम चंद का अध्यक्ष बनना तय है। विजयनगर नगर पालिका भाजपा उम्मीदवार ममता मोदी को निर्दलीय प्रत्याशी हेमलता मेहता की उम्मीदवारी से खतरा हो गया है। विजय नगर में 19 पार्षद भाजपा, 15 कांग्रेस और 6 निर्दलीय हैं। टांटोटी में भाजपा को 20 में से 14 सीटों पर जीत मिली है, इसलिए भाजपा के टीकम चंद का अध्यक्ष बनना तय है। लेकिन केकड़ी में कांग्रेस के उम्मीदवार अनिल मित्तल की मजबूत स्थिति माना जा रही हे। 40 में से 20 पार्षद कांग्रेस के हैं, जबकि भाजपा के 18 पार्षद जीते हैं। कांग्रेस के पास आरएलपी के 2 पार्षद बताए जा रहे हैं। यहां भाजपा ने विनीत चौरडिय़ा को उम्मीदवार बनाया है। पुलिस भाजपा की एजेंट: अजमेर देहात कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विधायक डॉ. विकास चौधरी के नेतृत्व में 18 सितंबर को कांग्रेस के एक प्रतिनिधि मंडल ने जिला निर्वाचन अधिकारी लोकबंधु से मुलाकात की। कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि अजमेर पुलिस भाजपा का एजेंट बनकर कार्यवाही कर रही है। किशनगढ़ अजमेर और केकड़ी में पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है। कलेक्टर को बताया गया कि 16 सितंबर की रात को नगर निगम के पुराने भवन से जरूरी फाइलों को ले जाया गया। लेकिन इस मामले में पुलिस कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं कर रही है। इसी प्रकार केकड़ी में भी कांग्रेस के पार्षदों को डराने धमकाने का काम किया जा रहा है। कांग्रेस के नेता रामचंद्र चौधरी, विजय जैन, डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, राजेश टंडन, महेंद्र सिंह रलावता, फखरे मोइन, विवेक पाराशर, शैलेश गुप्ता, सुनील लारा आदि ने पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के कक्ष के बाहर बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। S.P.MITTAL BLOGGER ( 19-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
जयुपर में फ्लैट, विला, फार्म हाउस और भूखंड खरीदने का सुनहरा अवसर। सच बेधड़क मीडिया ग्रुप की ओर से 19 व 20 सितंबर को प्रीमियम प्रॉपर्टी एक्सो। राजस्थान के प्रमुख रियल एस्टेट ब्रांडस और बिल्डर्स भाग लेंगे। ============= दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि महानगरों की तरह बढ़ रहे राजस्थान के जयपुर में फ्लैट, विला, फार्महाउस और भूखंड लेने का सुनहरा अवसर सच बेधड़क मीडिया ग्रुप ने उपलब्ध करवाया है। इस मीडिया ग्रुप की ओर से 19 और 20 सितंबर को जयपुर के एंटरटेनमेंट पैराडाइज के सेंट्रल हॉल में प्रीमियम प्रॉपर्टी एक्सपो का आयोजन किया गया है। मीडिया ग्रुप के सीएमडी पवन अरोड़ा पूर्व आईएएस ने बताया कि यह पहला अवसर है कि जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के किसी समूह ने ऐसा आयोजन किया है। इस प्रॉपर्टी एक्सपो में राजस्थान के प्रमुख रियल स्टेट ब्रांडस और बिल्डर्स की स्टालें लगेंगी। रियल एस्टेट के प्रतिनिधि अपने अपने प्रोजेक्टों के बारे में जानकारी देंगे। अरोड़ा ने कहा कि जो लोग जयपुर जैसे महानगर में प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं उनके लिए हमारा यह आयोजन सुनहरा अवसर है। एक ही स्थान पर जयपुर महानगर और राजस्थान के अन्य शहरों के प्रोजेक्टों के बारे में जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि हमारे एक्सपो में प्रॉपर्टी खरीदने वालों को डिस्काउंट भी मिलेगा। इसके साथ ही आने वाले सभी लोगों के लिए लक्की ड्रॉ भी रखा गया है। एक्सपो प्रात: 11 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा। हमारे मीडिया समूह के इस आयोजन में रियल एस्टेट के प्रतिनिधि जबरदस्त उत्साह दिखा रहे है। इस आयोजन के बारे में और अधिक जानकारी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिविर अवस्थी से मोबाइल नंबर 9024939667 पर ली जा सकती है। यहां यह उल्लेखनीय है कि सच बेधड़क मीडिया ग्रुप सच बेधड़क न्यूज़ चैनल के साथ साथ राजस्थानी भाषा का गणगौर टीवी का प्रसारण कर रहा है। इसके साथ ही सच बेधड़क दैनिक अखबार का प्रकाशन भी किया जा रहा है।

Thursday, 17 September 2026

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री की तरह अजमेर और जोधपुर का दौरा किया। ================ 17 सितंबर को राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री भजनलाल की तरह अजमेर और जोधपुर का दौरा किया। सीएस की यह पहल प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 सितंबर को सीएस श्रीनिवास ने सड़क मार्ग से जयपुर से अजमेर का सफर किया, यहां राजस्व मंडल में उच्च अधिकारियों की बैठक कर न्याय को निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने की बात कही। उच्च अधिकारियों की बैठक के तुरंत बाद मुख्य सचिव ने राजस्व मंडल बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह में भाग लिया। इस समारोह में मुख्य सचिव ने कहा, भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि त्वरित न्याय के लिए बार और बेंच के बीच तालमेल भी होना चाहिए। अजमेर के दोरे मेें मुख्य सचिव ने राजस्व मंडल के नए भवन के लिए लिए भूमि आवंटन पर भी आवश्यक निर्देश दिए। अजमेर के बाद श्रीनिवास सड़क मार्ग से जोधपुर पहुंचे और जोधपुर स्थित एम्स अस्पताल के 15 वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। एम्स प्रबंधन की ओर से मुख्य सचिव को समारोह का मुख्य अतिथि बनाया गया। आमतौर पर ऐसे समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अथवा राज्य के मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि होते हैं। लेकिन एम्स प्रबंधन ने परंपराओं से हट कर प्रदेश के मुख्य सचिव को समारोह का मुख्य अतिथि बनाया। समारोह में श्रीनिवास ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ मरीजों को अधिक से अधिक मिलना चाहिए। उन्होंने अस्पताल के स्थापना दिवस को अमृतकाल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार मरीजों के लिए अनेक कार्यक्रम चला रही है, इन सभी का लाभ जरूरतमंदों को मिलना चाहिए। सीएस ने जोधपुर में जनसुनवाई भी की और समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। सीएस का कहना रहा कि आम लोगों की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी भी प्रशासनिक अधिकारियों की है। सीएस ने रात्रि विश्राम जोधपुर के सर्किट हाउस में ही किया। अजमेर और जोधपुर में सीएस तमाम प्रशासनिक अधिकारियों से आत्मीयता के साथ मिले। मालूम हो कि श्रीनिवास के सेवाकाल में हाल ही में 6 माह की वृद्धि की गई है। यानी श्रीनिवास 6 माह के कार्य विस्तार पर मुख्य सचिव का काम कर रहे हैं। आमतौर पर एक दिन में चार पांच कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ही भाग लेते हैं। लेकिन 17 सितंबर को मुख्य सचिव श्रीनिवास ने भी मुख्यमंत्री की तरह दो जिलों का दौरा कर अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अजमेर में भाजपा की आपत्ति पर फैसला आने से पहले ही कांग्रेसियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। अनिल पूनियां के निर्वाचन अधिकारी रहते मेयर चुनाव में गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं। बेंगलूरू में बंद होने के बाद भी कांग्रेस को अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं। ================ अजमेर नगर निगम के मेयर के चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से श्रीमती किरण गढ़वाल और भाजपा की ओर से अनामिका शर्मा ने नामांकन किया है। मतदान 21 सितंबर को होना है। 80 पार्षदों में से कांग्रेस को 37, ीााजपा को 32 मिले हैं, 11 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं। ऐसे में दोनों दल मेयर पद के लिए निर्दलीय पार्षदों पर निर्भर है। 17 सितंबर को भाजपा की उम्मीदवार अनामिका ने निर्वाचन अधिकारी अनिल पूनिया के समक्ष एक आपत्ति दर्ज कराई। इस आपत्ति में कहा गया है कि कांग्रेस की प्रत्याशी किरण के मालिकाना हक वाले समारोह स्थल पर 19 लाख रुपए का टैक्स बकाया है। नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 (18) के तहत कोई प्रत्याशी सरकारी बकाया होने पर चुनाव नहीं लड़ सकता, इसलिए कांग्रेस की प्रत्याशी का नामांकन खारिज किया जाए। आपत्ति पर फैसला आने से पहले ही कांग्रेसियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कांग्रेस के उत्साही नेताओं ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। चूंकि कांग्रेस प्रत्याशी पर वाकई 19 लाख रुपया बकाया था। इसलिए कांग्रेसियों ने मान लिया कि नामांकन खारिज होगा और भाजपा की प्रत्याशी अनामिका निर्विरोध मेयर बन जाएंगी। कांग्रेयिों का यहां तक आरोप रहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अजमेर के जिला निर्वाचन अधिकारी लोकबंधु को भी फोन किया है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ही भाजपा के बागी नेता धर्मेन्द्र गहलोत भी नगर निगम के कार्यालय में आ गए। उनका कहना रहा कि पार्षद के चुनाव में वार्ड संख्या 4 से उनकी पत्नी और निर्दलीय उम्मीदवार हेमा गहलोत ने भाजपा प्रत्याशी मोनिका जैन के खिलाफ ऐसी ही आपत्ति दर्ज कराई थी। मोनिका के पति दीपक जैन के खिलाफ नगर निगम का लाखों रुपया बकाया है, लेकिन तब निर्वाचन अधिकारी ने उनकी आपत्ति पर कोई निर्णय नहीं लिया। जब उनकी आपत्ति पर भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज नहीं किया गया, तब अब बकाया राशि के मुद्दे पर कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन कैसे खारिज किया जा सकता है? धर्मेन्द्र गहलोत ने आरोप लगाया कि निर्वाचन विभाग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। इस बीच निर्वाचन अधिकारी और अजमेर विकास प्राधिकरण के सचिव अनिल पूनिया ने कांग्रेसियों को भरोसा दिलाया कि नियमों के तहत ही फैसला होगा। वह स्वयं नगर पालिका अधिनियम का गहराई के साथ अध्ययन कर रहे है, लेकिन कांग्रेसियों ने पूनिया के कथन पर भरोसा नहीं किया। बड़ी संख्या में कांग्रेसी निगम कार्यालय में एकत्रित हो गए। तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए भारी पुलिस बल को मौके पर बुलाना पड़ा। शाम को 6 बजे निर्वाचन अधिकारी पूनिया ने भाजपा की आपत्ति को खारिज कर दिया और कांग्रेस प्रत्याशी किरण की उम्मीदवार को बरकरार रखा। पूनिया ने अपने फैसले में कहा कि अब जब किरण गढ़वाल का निर्वाचन पार्षद के रूप में हो गया है और कोई भी पार्षद मेयर का चुनाव लड़ सकता है, इसलिए भाजपा प्रत्याशी की आपत्ति मायने नहीं रखती, लेकिन भाजपा प्रत्याशी दूसरी न्यायिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। इस फैसले के बाद किरण के पति दिलीप गढ़वाल ने कहा कि उन्हें निर्वाचन अधिकारी की निष्पक्षता पर कोई संदेह नहीं हे। निर्वाचन अधिकारी ने पूर्ण निष्पक्षता के साथ फैसला दिया है। गढ़वाल ने अनिल पूनिया के फैसले का स्वागत किया। यानी फैसले से पहले कांग्रेसी जो आशंका जता रहे थे, वह सब निर्मूल साबित हुई। प्रशासनिक क्षेत्र के उच्च अधिकारियों का मानना है कि अनिल पूनिया के निर्वाचन अधिकारी रहते अजमेर नगर निगम के मेयर के चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती। पूनिया बेहद ईमानदार और कुशल प्रशासक है। यह सही है कि आपत्ति के बाद पूनिया ने जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर लोक बंधु से विमर्श किया। इससे जाहिर था कि प्रशासन पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं था। जहां क धर्मेन्द्र गहलोत की आपत्ति का सवाल है तो जानकार मानते हैं कि हेम गहलोत और अनामिका शर्मा की आपत्तियों में अंतर है। हेमा गहलोत आपत्ति में बकाया राशि भाजपा प्रत्याशी मोनिका के पति दीपक जैन पर है, जबकि अनामिका की आपत्ति में बकाया राशि स्वयं कांग्रेस की प्रत्याशी किरण गढ़वाल पर है। कांग्रेस को भरोसा नहीं: कांग्रेस अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में ले गई है। बेंगलुरु में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ साथ 3 निर्दलीय पार्षद भी है। बहुमत के लिए 41 पार्षद चाहिए। कांग्रेस की मजबूत स्थिति के बाद भी बड़े नेताओं को अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं है। नेताओं को आशंका है कि भले ही पार्षद बेंगलूरू में बंद हो, लेकिन 21 सितंबर को क्रॉस वोटिंग हो सकती है। लाख कोशिश के बाद भी कांग्रेस के पार्षदों के तार भाजपा के नेताओं खासकर विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से जुड़े हुए हैं, कहा तो यहां तक जा रहा है कि कांग्रेस के मुस्लिम पार्षदों के मकानों और होटलों की फाइल की जांच पड़ताल भी तो रही है। एक पार्षद की होटल को गैर कानूनी मानते हुए नगर निगम ने तोड़ने का नोटिस दे रखा है। एक अन्य पार्षद की विशालकाय कोठी का निर्माण भी अवैध माना गया है। पार्षदों के रिश्तेदार चाहते हैं कि अवैध होटल और कोठियों पर कोई कार्यवाही न हो। इसी प्रकार निर्दलीय पार्षद भी भाजपा के नेताओं के संपर्क में है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
जोधपुर में 7 निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया तो पूर्व सीएम अशोक गहलोत बोले-दो-दो करोड़ रुपए में बिक रहे हैं पार्षद। गहलोत ने ऐसे ही आरोप सचिन पायलट समर्थकों पर लगाए थे, लेकिन साबित नहीं कर सके। मुख्यमंत्री की तरह रोड शो नहीं करने पर गहलोत अब डोटासरा से भी नाराज। गहलोत को अपने ही घर में मात देने में भाजपा नेता लखावत की अहम भूमिका। ================ सब जानते हैं कि जोधपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तीन बार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह शहर है। नगर निगम के चुनाव में जोधपुर में कांग्रेस का मेयर बनवाने की जिम्मेदार गहलोत पर ही है। 11 सितंबर को मतदान से दो दिन पहले गहलोत ने जोधपुर में डेरा जमाया और भरतपुर कोशिश की कि कांग्रेस के पार्षद चुनाव जीते, लेकिन 14 सितंबर को घोषित परिणाम में कांग्रेस को 100 वार्डों में से 44 में ही जीत मिली। जबकि मेयर बनाने के लिए 51 पार्षद की जरुरत हे। जोधपुर में भाजपा को भी 45 सीटें ही मिली। 17 सितंबर को 11 निर्दलीय पार्षदों में से 7 ने मेयर चुनाव में भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी। जिन निर्दलीय पार्षदों ने समर्थन दिया उनमें विशाल सांखला, दिनेश शर्मा, चेतन गहलोत, मोहन राम चौधरी, दुर्गा मेवाड़ा, निर्मला नायक शामिल है। यानी भाजपा को 52 पार्षदों का समर्थन मिल गया है, इसलिए भाजपा का मेयर बनना तय है। इधर जोधपुर में 7 निर्दलीयों ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की, उधर जयपुर में सिविल लाइन स्थित अपने सरकारी आवास पर गहलोत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि भाजपा निर्दलीय पार्षदों को 2-2 करोड़ रुपए में खरीद रही है। असल में गहलोत को जवाब तो अपने घर के 7 निर्दलीय उम्मीदवारों के भाजपा में चले जाने का जवाब देना था, लेकिन अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए गहलोत ने भाजपा पर पार्षदों को खरीदने का आरोप लगा दिया। सवाल उठता है कि गहलोत के घर में ही निर्दलीय पार्षद भाजपा के पास कैसे चले गए? गहलोत ने अपनी राजनीतिक नाकामी पर पर्दा डालने के लिए पार्षदों को ही बिकाऊ कह दिया। गहलोत ने ऐसे आरोप सचिन पायलट के समर्थक विधायकों पर भी लगाए थे। तब गहलोत ने भाजपा पर विधायकों को 35-35 करोड़ रुपए में खरीदने के आरोप लगाए। यह बात अलग है कि गहलोत आज तक भी अपने आरोपों को साबित नहीं कर सके। असल में गहलोत जब भी विफल होते हैं तो अपनी गलती का दोष दूसरों पर डाल देते हैं। गहलोत को पता था कि जोधपुर में 7 निर्दलीय पार्षदों के भाजपा में शामिल होने को लेकर उनसे सवाल पूछा जाएगा, लेकिन गहलोत ने उसी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी खामियों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा दिया। इतना ही नहीं गहलोत ने शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस के पिछड़ने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को जिम्मेदार माना। गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नगर निगम वाले शहरों में भाजपा के लिए रोड शो किए, उसी प्रकार प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भी कांग्रेस के बड़े नेताओं के रोड शो करने चाहिए थे। गहलोत ने इसे कांग्रेस संगठन की राजनीतिक चूक बताया। गहलोत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। कांग्रेस के पिछड़ने की जिम्मेदारी गहलोत की भी है, लेकिन गहलोत ने अपनी जिम्मेदारी डोटासरा पर डाल दी है। देखना होगा कि गहलोत के इस बयान पर डोटासरा क्या प्रतिक्रिया देते हैं। लखावत ने दी मात: गहलोत के गृह शहर जोधपुर में 7 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भाजपा को दिलवाने में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी के साथ लखावत भी जोधपुर संभाग के प्रभारी है। लखावत ने जो रणनीति बनाई उसी के अंतर्गत 11 निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधा गया। 11 में से 7 ने तो भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। माना जा रहा है कि 21 सितंबर को मतदान से पहले शेष चार पार्षद भी भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर सकते हैं। लखावत का कहना है कि अब जोधपुर में गहलोत का जादू खत्म हो गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Wednesday, 16 September 2026

भगवान राम की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर, अनुच्छेद 370 हटाकर अब देश के अधिकांश राज्यों में समान नागरिक संहिता। भारत के सौ करोड़ से ज्यादा सनातनियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से और क्या चाहिए? 17 सितंबर की शाम को हर सनातनी घर के बाहर आशीर्वाद दीप जलाएं। ================== 17 सितंबर 2026 को दुनिया भर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन सेवा संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। अनेक धर्मगुरुओं ने देशभर के सनातनियों से अपील की है कि 17 सितंबर की शाम को घर के बाहर आशीर्वाद का दीया जलाएं। ताकि नरेंद्र मोदी और मजबूती के साथ सनातन संस्कृति वाले भारत की रक्षा कर सके। यूं तो नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के अनेक कार्य गिनाए जा रहे हैं, लेकिन देश के 100 करोड़ से ज्यादा सनातनियों के लिए 3 बड़े काम बहुत मायने रखते हैं। जम्मू कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर मोदी ने देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया। अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थल पर भव्य मंदिर बनवाकर हर सनातनी को गौरवान्ति होने का अवसर प्रदान किया और अब देश के अधिकांश क्षेत्र में समान नागरिक संहिता लागू की जा रही है। ये तीनों बड़े काम एक सनातनी ही कर सकता है। हालांकि जब वर्ष 2014 में मोदी पीएम बने तब कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि गुलामी की मानसिकता में जीने वाले भारत में यह तीन काम हो सकेंगे, लेकिन मोदी ने इन 12 वर्षों में सनातनियों को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकाला और एक एक कर तीनों काम किए। आज हर सनातनी गर्व के साथ कह सकता है कि भारत में उनके सम्मान और अधिकार में वृद्धि हुई है। गुलामी की मानसिकता वाले लोग भले ही मोदी की कार्यशैली की आलोचना करें, लेकिन मोदी ने तीन बड़े काम कर यह दिखाया है कि भारत सनातन संस्कृति वाला देश है। यहां सनातन संस्कृति को नष्ट करने वालों का कोई स्थान नहीं है। जब सनातन संस्कृति मजबूत हो रही है, तब दूसरे धर्मों के लोग भी सुरक्षित हैं। भारत में सौ करोड़ सनातनियों के साथ 25 करोड़ से ज्यादा इस्लाम धर्म को मानने वाले मुसलमान भी रहते हैं। आज दुनिया में मुसलमान सबसे ज्यादा भारत में सुरक्षित है। पिछले 12 वर्षों में तो मुसलमान और ज्यादा सुरक्षित हुए हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति का परचम फैला है। यदि वर्ष 2014 के पहले वाले हालात रहते तो भारत में न सनातनी और न मुसलमान सुरक्षित होता। पूरे देश में उन हालातों को देखा है, जब अधिकांश राज्यों में कर्फ्यू लगा रहता था। जब पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी, तब दोनों प्रमुख धर्मों के लोग और ज्यादा सुरक्षित होंगे। कोई भी देश दो कानूनों के रहते मजबूत नहीं हो सकता। अब जब दुनिया में युद्ध की स्थिति है, तब भारत में अमन चैन और शांति बनी हुई है। कोई माने या नहीं लेकिन इसका श्रेय नरेंद्र मोदी की नीतियों को जाता है। आशीर्वाद का दीया तो मुसलमानों को भी जलाना चाहिए। क्योंकि भारत में रहने वाले मुसलमान आज खुशहाल है, इसके विपरीत इस्लामिक देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश ईरान, इराक में रहने वाले मुसलमानों के हालात देखे जा सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
सत्ता का दुरुपयोग तो सबसे ज्यादा खुद गहलोत और डोटासरा ने किया। शहरी निकाय के चुनाव में आरोप लगाने से पहले अपने कृत्य देख लें। ================== राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि शहरी निकायों का प्रमुख चुनने के लिए भाजपा के नेता सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्दलीय और कांग्रेस के पार्षदों को जबरन उठाया जा रहा है। पुलिस भाजपा का मोहरा बनी हुई है। पूरे प्रदेश में भाजपा ने भय का माहौल बना दिया है। मालूम हो कि राजस्थान के 309 शहरी निकायों के प्रमुख का चुनाव 21 सितंबर को होना है। 14 सितंबर को वार्ड पार्षदों के परिणाम के बाद दोनों ही प्रमुख दलों के पार्षदों की बाड़ाबंदी हो रखी है। पार्षदों को दूसरे राज्यों में भी रखा गया है। अजमेर के कांग्रेसी पार्षद कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में है। इसी प्रकार भाजपा के पार्षद राजस्थान के साथ साथ हरियाणा और दिल्ली में रखे गए है। गहलोत और डोटासरा को आरोप लगाने से पहले अपने कृत्यों को देख लेना चाहिए। जुलाई 2020 में जब डिप्टी सीएम और प्रदेशाध्यक्ष रहते सचिन पायलट 18 कांग्रेसी विधायकों को दिल्ली ले गए थे, तब मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के विधायक दिल्ली न जा सके इसके लिए कोरोना संक्रमण की आड़ लेते हुए लोगों के राजस्थान के बाहर जाने पर रोक लगा दी। जिस पुलिस को गहलोत आज कोस रहे हैं, उसी पुलिस ने राजस्थान की सीमा पर खड़े रहकर आम लोगों को जाने नहीं दिया। जब कोरोना संक्रमण रोकने के लिए दूसरे राज्यों से आने वालों पर रोक लगनी चाहिए थी, लेकिन गहलोत ने अपने राजनीतिक स्वार्थ की खातिर जाने वालों पर ही रोक लगा दी। निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को गहलोत ने प्रशासन की मदद से किस तरह कब्जे में लिया, यह किसी से छिपा नहीं है। इतना ही नहीं सचिन पायलट समर्थक कांग्रेसी विधायकों के खिलाफ देशद्रोह तक का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पूरा प्रदेश जानता है कि जिन अधिकारियों ने गहलोत की सरकार को बचाने का काम किया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद लाभ के पद दिए गए। गहलोत सरकार में मुख्य सचिव रहे निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य को तो राज्य लोकसभा आयोग का सदस्य बना दिया। आईपीएस संजय श्रोत्रिय को आयोग का अध्यक्ष बना दिया। डीबी गुप्ता जैसे मुख्य सचिव को भी सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया। जब गहलोत सत्ता का दुरुपयोग कर रहे थे, तब प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए डोटासरा भी मजा ले रहे थे। प्रदेशाध्यक्ष के साथ साथ डोटासरा कैबिनेट मंत्री भी रहे। जब खुद गहलोत और डोटासरा ने सत्ता का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, तब इन दोनों को सत्ता का दुरुपयोग का आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
पार्षदों के लिए बेंगलुरु जैसे प्रबंध गढ़वाल परिवार ही कर सकता है। इसलिए अजमेर में किरण गढ़वाल मेयर पद के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार। ================== 16 सितंबर को अजमेर नगर निगम के मेयर के पद के लिए श्रीमती किरण गढ़वाल ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन कर दिया है। भाजपा की ओर से श्रीमती अनामिका शर्मा ने नामांकन किया है। इस बार अजमेर के मेयर का पद महिला के लिए अनारक्षित रखा गया है। यानी सामान्य वर्ग की महिला मेयर बन सकती है। लेकिन कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग की किरण गढ़वाल को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस में सामान्य वर्ग की महिला पार्षद भी दावेदार थी, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने गहन मंथन के बाद किरण गढ़वाल को उम्मीदवार घोषित किया। असल में गढ़वाल परिवार ीह कांग्रेस और कुछ निर्दलीय पार्षदों के लिए बेंगलुरु जैसे प्रबंध करने में सक्षम है। कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को 16 सितंबर को जयपुर से हवाई जहाज के जरिए कांग्रेस शासित कर्नाटक के बेंगलुरु में ले जाया गया। जिस रिसोर्ट में अब कांग्रेस के पार्षद रखते हुए हैं, उसका प्रतिदिन का खर्चा लाखों रुपया है। चुनाव में कांग्रेस को 37 वार्डों में जीत मिली, जबकि मेयर चुनने के लिए 41 पार्षदों की जरूरत है। निर्दलीय पार्षदों को कांग्रेस के खेमे में लाने के लिए गढ़वाल परिवार ने पूरी ताकत लगा रखी है। चूंकि कांग्रेस का मेयर बनवाने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता धर्मेन्द्र राठौड़ ने ले रखी है, इसलिए किरण गढ़वाल की उम्मीदवार में धर्मेन्द्र राठौड़ की राय को माना गया। राठौड़ को पता है इसलिए किरण गढ़वाल को उम्मीदवार बनाया गया। यही वजह है कि कांग्रेस के सभी 37 और कुछ निर्दलीय पार्षद पूरे आराम और मस्ती के साथ बेंगलुरु के रिसोर्ट में ठहरे है। कई पार्षद तो ऐसे रहे जिन्होंने पहली बार हवाई जहाज का सफर किया। यदि किरण गढ़वाल की उम्मीदवारी नहीं होती तो ऐसे पार्षद हवाई जहाज का सफर नहीं कर पाते। असल में किरण गढ़वाल के पति दिलीप गढ़वाल का जमीनों का कारोबार विरासत में मिला है। उनके पिता छोटेलाल गढ़वाल की पाल बीसला में कई बीघा जमीन थी। इस जमीन पर खेती का कार्य होता था। चूंकि पाल बीसला की इसी जमीन के निकट तालाब भी था, इसलिए खेती का काम अच्छा रहा। धीरे धीरे खेती वाली भूमि पर बड़े बड़े मकान बन गए। समय के साथ पिता के निधन के बाद दिलीप गढ़वाल ने गढ़वाल समारोह स्थल भी बनाया और समाज सेवा का काम भी किया। रेलवे ने जो दूसरा गेट बनाया है, वह पाल बीसला में गढ़वाल पैलेस के ठीक सामने है। रेलवे स्टेशन का गेट बन जाने से गढ़वाल परिवार की जमीनों के भाव भी बहुत बढ़ गए है। इसमें कोई दो राय नहीं कि दिलीप गढ़वाल अपने माली समाज के साथ साथ अन्य समाजों में भी दानवीर की भूमिका निभाते हैं। गढ़वाल परिवार की ओर से एक शव वाहन भी उपलब्ध है। इस शव वाहन को स्वयं दिलीप गढ़वाल चलाते हैं। यानी किसी परिवार में मृत्यु होने पर दिलीप गढ़वाल अपना वाहन शव को श्मशान स्थल तक ले जाने के लिए उपलब्ध करवाते हैं। कोरोना काल में तो परिवार के सदस्य ही शव को हाथ लगाने से डरते थे, तब दिलीप गढ़वाल ने शवों को न केवल अपने वाहन में रखा बल्कि शव का अंतिम संस्कार तक करवाया। सामाजिक कार्यों में गढ़वाल समारोह स्थल को निशुल्क दिया जाता है। कांग्रेस के के बड़े नेताओं ने सोच समझ कर ही किरण गढ़वाल को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा की अनामिका: 80 पार्षदों वाले अजमेर निगम में भाजपा को 32 सीटें मिली है। लेकिन भाजपा ने भी श्रीमती अनामिका शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा को अपना मेयर बनवाने के लिए 9 अतिरिक्त पार्षदों की जरूरत है। भाजपा का कहना है कि 11 निर्दलीयों में से 9 के वोट उन्हें मिलेंगे। भाजपा को कांग्रेस पार्षदों में क्रॉस वोटिंग की भी उम्मीद है, लेकिन कांग्रेस के पार्षदों के वोट भाजपा को न मिले इसके इंतजाम कांग्रेस से ज्यादा गढ़वाल परिवार ने किए हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

Tuesday, 15 September 2026

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निर्वाचन क्षेत्र अलवर और खैरथल के 19 निकायों में से भाजपा को मात्र तीन में बहुमत। लेकिन 45 पार्षदों वाली खैरथल नगर परिषद में कांग्रेस के सभापति के दावेदार विक्रम चौधरी को ही भाजपा में शामिल कर लिया। अब सभी निकायों में भाजपा के बोर्ड का दावा। भंवर जितेंद्र सिंह और टीकाराम जूली हाथ मसलते रह जाएंगे। ================== केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निर्वाचन क्षेत्र अलवर और खैरथल के 19 शहरी निकायों में से मात्र 3 में भाजपा को बहुमत मिला। 14 सितंबर को घोषित चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा, यह अलवर के सांसद भूपेंद्र यादव की व्यक्तिगत हार है। अलवर संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं ने दर्शा दिया है कि अब अलवर में भूपेंद्र यादव ने जन समर्थन खो दिया है। दोनों जिलों में 19 शहरी निकायों के 580 वार्डों में चुनाव हुआ। इनमें से भाजपा उम्मीदवार 271 वार्डों में ही जीत पाए। कांग्रेस को भले ही 133 वार्डों में जीत मिली हो, लेकिन 228 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी पार्षद बने। कांग्रेस के नेता अभिजीत का जश्न ही मना रहे थे कि 15 सितंबर को भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस को जबरदस्त मात दे दी। 45 पार्षदों वाली खैरथल नगर परिषद में भाजपा को मात्र 8 सीटें मिली, जबकि कांग्रेस को 20, लेकिन वहीं 17 निर्दलीय उम्मीदवार भी पार्षद बने। कांग्रेस आश्वस्त थी कि निर्दलियों की मदद से सभापति चुन लिया जाएगा, लेकिन भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस में सभापति पद के सबसे मजबूत दावेदार विक्रम चौधरी को ही भाजपा में शामिल कर लिया। चौधरी ने दावा किया कि उनके साथ 8 और कांग्रेस पार्षदों ने भाजपा का समर्थन किया है। खैरथल में सभापति चुनने के लिए 23 पार्षदों की जरूरत है। अब 17 में से अनेक निर्दलीय पार्षद भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए तत्पर है। असल में परिणाम आने के बाद विक्रम चौधरी ने भंवर जितेंद्र सिंह ेस संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन राजशाही प्रवृत्ति वाले भंवर जितेंद्र सिंह से मुलाकात नहीं हो सकी। कांग्रेस में राजशाही की स्थिति को देखते हुए भूपेंद्र यादव ने विक्रम चौधरी से संपर्क साधा और उन्हें सभापति के लिए भाजपा का उम्मीदवार बनाने का भरोसा दिलाया। यही वजह रही कि विक्रम चौधरी 8 कांग्रेस पार्षदों के साथ भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंच गए। यानी जिस नगर परिषद में भाजपा का 45 में से 8 सीटें मिली, उस में अब भाजपा का सभापति नब जाएगा। भूपेंद्र यादव ने परिणाम के अगले ही दिन कांग्रेस को जो मात दी उसकी चर्चा अब कांग्रेस के उच्च स्तर पर हो रही है। भले ही 19 निकायों में से सिर्फ 3 में भाजपा को बहुमत मिला है। लेकिन खैरथल के बाद अलवर शहर के नगर निगम में भी भाजा का बोर्ड बनवाना आसान हो गया है। 65 पार्षदों वाले निगम में भाजपा को 28 और कांग्रेस को 23 सीट मिली है हालांकि 14 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से भाजपा आसानी के साथ बोर्ड बनवा रही है, लेकिन अब कांग्रेस के 23 पार्षदों में भी फूट की आशंका उत्पन्न हो गई है। अलवर और खैरथल जिलों के जिन तीन निकायों में भाजपा को बहुमत मिला है, उनमें नौगावां नगर पालिका, खेरली और मुंडावर पालिका शामिल है। वही खैरथल की तीनों नगर परिषद भिवाड़ी, खैरथल और तिजारा में भाजपा को बहुमत नहीं मिला है। तिजारा के 35 वार्डों में से भाजपा को सिर्फ 3 वार्डों में जीत दर्ज कर सकी है, लेकिन यहां भी भाजपा का बोर्ड बनेगा, क्योंकि निर्दलीय पार्षदों की संख्या 31 है। कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली है। इसी प्रकार रामगढ़, मालाखेड़ा, बहादुरपुर, कटुमर, थानागाजी, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, गोविंदगढ़, बड़ौदामेव, किशनगढ़बास,कोटकासिम तथा टपूकड़ा पालिकाओं में भी भाजपा को बहुमत नहीं मिला है। हाथ मसलते रह जाएंगे: भूपेंद्र यादव को भाजपा में चुनावी राजनीति का चाणक्य माना जाता है। अलवर में कांग्रेस की कमान राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली के पास है, लेकिन भूपेंद्र यादव ने चुनाव परिणाम के बाद जो आक्रामक रणनीति अपनाई है, उसमें भंवर जितेंद्र सिंह और जूली हाथ मसलते रह जाएंगे। जूली आए दिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हमला करते है, लेकिन खैरथल की घटना बताती है कि जूली को अपने गृह क्षेत्र में पकड़ नहीं है। वहीं भूपेंद्र यादव ने सांसद बनने के बाद अलवर के आम लोगों से सीधा संवाद किया। यही वजह है कि 19 में से 16 निकायों में बहुमत नहीं मिलने के बाद भी अधिकांश निकायों में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
अजमेर के कांग्रेसी पार्षद बेंगलुरु पहुंचे। अब भाजपा के लिए सेंध लगाना आसान नहीं। 80 में से 37 पार्षद कांग्रेस के हैं। मेयर चुनने के लिए 41 वोट चाहिए। ================== कांग्रेस इस बार हर कीमत पर अजमेर में अपना मेयर बनवाना चाहती है। इसलिए नवनिर्वाचित पार्षदों को जयपुर से हवाई जहाज से बेंगलुरु भेज दिया गया है। सभी पार्षद बेंगलुरु की एक सुरक्षित होटल में ठहरे हुए है। बेंगलुरु भेजने का निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। कांग्रेस को आशंका थी कि यदि पार्षदों को राजस्थान में रखा गया तो पुलिस उठाकर ले जाएगी। खास तौर से निर्दलीय पार्षदों को तो अपने कब्जे में किया ही जा सकता है। अजमेर नगर निगम में मेयर चुनने के लिए 41 पार्षदों की जरूरत है। कांग्रेस को 80 में से 37 सीटें मिली है, लेकिन कांग्रेस के समर्थन में 11 निर्दलीय पार्षदों में से चार समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि उनके पास 42 पार्षदों का जुगाड़ है। हालांकि 32 सीटें जीत कर भाजपा भी दावा कर रहे हैं कि मेयर उन्हीं की पार्टी का बनेगा। भाजपा को उम्मीद है कि मतदान वाले दिन 21 सितंबर को कांग्रेस के पार्षदों में बगावत होगी और अनेक पार्षद भाजपा के उम्मीदवार को अपना वोट देंगे। चूंकि स्थानीय निकाय के चुनाव में बदल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता, इसलिए पार्षदोंं की सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भाजपा के एक नेता का दावा है कि भले ही कांग्रेस के पार्षद सुरक्षित स्थान पर हो, लेकिन कई पार्षदों से संपर्क बना हुआ है। लेकिन अब जब कांग्रेस के पार्षद बेंगलुरु पहुंच गए हैं, तब भाजपा का सेंध लगाना आसान नहीं है। कांग्रेस के पार्षदों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता और आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के पास है। जानकार सूत्रों के अनुसार अजमेर के कांग्रेसी पार्षदों को बेंगलुरु भिजवाने में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका रही है। बताया जा रहा है कि राठौड़ के आग्रह पर ही गहलोत ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से बात की और तभी कांग्रेसी पार्षदों को बेंगलुरु ले जाना का निर्णय लिया गया। कहा जा सकता है कि कांग्रेसी पार्षद कर्नाटक पुलिस की निगरानी में है। मालूम हो कि धर्मेन्द्र राठौड़ को विधायकों की बाड़ाबंदी करने का खास अनुभव है। वर्ष 2020 में भी राठौड़ ने मुख्यमंत्री गहलोत के लिए कांग्रेस के विधायकों के साथ साथ निर्दलीय और अन्य पार्टियों के विधायकों की बाड़ाबंदी की थी। धर्मेन्द्र राठौड़ भले ही समर्थक हो, लेकिन निकाय चुनाव में राठौड़ ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ भी अच्छे संबंध बनाए। यही वजह है कि अजमेर में कांग्रेस का मेयर बनवाने की पूरी जिम्मेदारी धर्मेन्द्र राठौड़ के पास है। यदि 21 सितंबर को कांग्रेस का मेयर बनता है तो 36 वर्ष बाद अजमेर में कांग्रेस को इतनी बड़ी सफलता मिलेगी। वहीं भाजपा में मेयर बनवाने की जिम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के पास है। देवनानी ने ही भाजपा के 32 और कुछ निर्दलीय पार्षदों को सुरक्षित स्थान पर रखा हुआ है। भाजपा को अपना मेयर बनवाने के लिए 9 निर्दलीय पार्षदों की जरूरत है। देखना होगा कि भाजपा 9 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ किस प्रकार करती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 16-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511