Monday, 7 September 2026
अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी, लेकिन उनमें भाजपाई संस्कार तो है ही-मदन राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष।
कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं, इसलिए स्नेहलता अग्रवाल बागी उम्मीदवार।
भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद लिया।
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राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी हो, लेकिन उनमें भाजपा के संस्कार बने हुए है। मालूम हो कि गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत अजमेर नगर निगम के वार्ड संख्या 4 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ी हे। अपनी पत्नी को चुनाव जितवाने के लिए गहलोत ने पूरी ताकत लगा रखी है। प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि मैं चाहता हूं कि गहलोत अपनी पत्नी की उम्मीदवार वापस ले और भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार मोनिका को समर्थन दे। गहलोत की नाराजगी भाजपा किसी नेता से हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत नाराजगी के कारण पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। भाजपा ने ही गहलोत को दो बार अजमेर का मेयर बनाया है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के प्रति तो नाराजगी दूर हो सकती है, लेकिन पार्टी के प्रति नाराजगी दिखाने के बाद कोई गुंजाइश नहीं रहती। मालूम हो कि गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। गहलोत का यहां तक आरोप है कि उनके आर्किटेक्ट पुत्र ने जिन भवनों का निर्माण करवाया उन्हें भी नियम विरुद्ध मानते हुए देवनानी के दबाव में सीज करवा दिया गया।
महिलाओं का सम्मान नहीं:
अजमेर नगर निगम के वार्ड 70 से निर्दलीय उम्मीदवार स्नेहलता अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है। वे पिछले 25 साल से कांग्रेस में सक्रिय हैं। मौजूदा समय में ब्लॉक, महासचिव, सेवादल की सह-उपाध्यक्ष आदि पदों पर आसीन हंू। इसके अलावा वर्ष 2007 से राष्ट्रीय पंचायत परिषद की सदस्य भी हैं। कांग्रेस में अपनी सक्रियता को देखते हुए ही उन्होंने वार्ड 70 से टिकट मांगा था। लेकिन शहर जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल और वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता ने उनकी अनदेखी की। वार्ड 70 सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित रहा,लेकिन डॉ. जयपाल और रलावता ने आपसी मिलीभगत कर ओबीसी वर्ग की गीता गुर्जर को कांग्रेस का उम्मीदवार बनवा दिया। चूंकि मेरे साथ अन्याय हुआ,इसलिए मैं अब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हंू। मुझे अपने वार्ड में व्यापक समर्थन भी मिल रहा है। चुनाव अधिकारी ने अलमारी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। कांग्रेस से हुई उपेक्षा के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9214865836 पर स्नेहलता अग्रवाल से ली जा सकती है।
मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद:
नगर निगम के वार्ड 38 के भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने 6 सितंबर को राजगढ़ स्थित मसाणिया भैरव धाम के उपासक चंपालाल महाराज का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर बाशानी ने धाम पर स्थित मनोकामना स्तंभ की परिक्रमा भी की और धाम में स्थित मसाणिया भैरव मंदिर के दर्शन भी किए।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026)
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अजमेर में भाजपा के उम्मीदवार विकास की कार का चौथा पहिया हैं। चौथा पहिया पंचर हो गया तो कार चल नहीं पाएगी।
वार्ड संख्या 4 में कांग्रेस का हाथ किसके साथ है, यह सबको पता है-देवनानी भाजपा विधायक।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी की चुनावी सक्रियता पर कांग्रेस को ऐतराज। चुनाव आयोग में शिकायत।
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राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी इन दिनों नगर निगम के चुनाव में अपने निर्वाचन क्षेत्र अजमेर उत्तर में सक्रिय है। देवनानी वार्ड के भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में सभाएं कर रहे हैं। चार सितंबर को देवनाी ने वार्ड संख्या 4 में भाजपा की उम्मीदवार मोनिका के कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए देवनानी ने भाजपा के उम्मीदवार की तुलना कार के चौथे पहिए से की। देवनानी ने कहा कि कार का पहला पहिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है, दूसरा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा है और तीसरा पहिया विधायक होने के नाते वे स्वयं है। कार तभी चल पाएगी जब चौथे पहिए के रूप में भाजपा उम्मीदवार पार्षद बनेगा। देवनानी ने कहा कि गत 6 बार से अजमेर में स्थानीय निकाय में भाजपा का बोर्ड बन रहा है। यही वजह है कि पिछले ढाई वर्ष में अजमेर उत्तर क्षेत्र में 1500 करोड़ रुपए के विकास कार्य हुए है। विकास की यह कार चलती रहे इसके लिए निगम के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत जरूरी है। जन्माष्टमी पर्व का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा कि वे हमेशा कर्म करने में विश्वास रखते है। उन्होंने फल की इच्छा कभी भी नहीं की। यही वजह है कि वे अजमेर उत्तर क्षेत्र से लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने हमेशा मर्यादाओं का पालन किया। देवनानी ने कहा कि वार्ड संख्या चार में मैं स्वयं भी मतदाता हंू। शायद इसलिए कांग्रेस ने इस वार्ड से अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया, लेकिन सबको पता है कि कांग्रेस का हाथ किसके साथ है। मालूम हो कि इस वार्ड से पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत भाजपा की बागी उम्मीदवार के तौर पर खड़ी है। देवनानी ने गहलोत दम्पत्ति का नाम लिए बगैर कहा कि मेरे इस वार्ड के मतदाता भाजपा उम्मीदवार मोनिका को भारी मतों से जितवाएंगे और सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाएगी। देवनानी ने सभा में उपस्थित लोगों से हाथ खड़े करवाकर पूछा कि क्या मोनिका के सामने वालों की जमानत जब्त करवाओगे? सभी लोगों ने सहमति में हाथ उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार पार्षद बन भी जाए तो उसके मायने नहीं है। विकास तो भाजपा का पार्षद ही करवा सकता है। देवनानी ने अपने संबोधन में भाजपा उम्मीदवार मोनिका के पति समाजसेवी दीपक जैन का भी उल्लेख किया। देवनानी ने कहा कि पूर्व में जनसंघ का चुनाव चिन्ह दीपक ही था। दीपक का मतलब प्रकाश फैलाने वाला होता है।
चुनावी सक्रियता पर ऐतराज:
देवनानी की नगर निगम के चुनाव में सक्रियता पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया है। अजमेर में कांग्रेस की चुनावी कमान संभाल रहे आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि देवनानी विधानसभा के अध्यक्ष होने के नाते संवैधानिक पद पर है। ऐसे में उन्हें किसी एक दल के लिए काम नहीं करना चाहिए। लेकिन देवनानी विधानसभा अध्यक्ष की मर्यादाओं और आचरण का उल्लंघन कर भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे है। देवनानी की वजह से प्रशासन भी भाजपा के दबाव में काम कर रहा है। राठौड़ ने कहा कि देवनानी की चुनावी सभाओं के भाषण केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को भेजे गए है। इसके साथ ही अजमेर के कलेक्टर और निर्वाचन अधिकारी लोक बंधु से भी शिकायत की गई है। राठौड़ ने आरोप लगाया कि देवनानी चुनाव को प्रभावित कर रहे है। राठौड़ ने कहा कि नगर निगम के वार्ड संख्या 3 और 4 में रणनीति के तहत कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित नहीं किए है। कांग्रेस का उद्देश्य निगम चुनाव में भाजपा को हराना है। अजमेर में गत 6 बार से भाजपा का बोर्ड बन रहा है, लेकिन आज भी सीवरेज की समस्या से हर शहरवासी परेशान है। अजमेर शहर के दोनों विधायक चुने जा रहे है। लेकिन आज भी शहर की दुर्दशा आम जनता के सामने है। इस बार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनवाने का संकल्प लिया है।
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Friday, 4 September 2026
निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर।
अगले माह ही होने है पंचायतीराज के चुनाव।
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राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों में अब उम्मीदवारों की स्थिति साफ हो गई है। 3 सितंबर को नाम वापसी के बाद 38891 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। 14 सितंबर को परिणाम आएंगे। सत्तारूढ़ भाजपा ने इन चुनावों को लेकर जो रणनीति बनाई है उसके अनुसार शहरी निकाय चुनाव मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के चेहरे पर लड़े जाएंगे। यही वजह है कि संभाग मुख्यालय पर सीएम शर्मा की सभाएं करवाई जाएगी। स्टार नेता के तौर पर भाजपा के किसी भी बड़े नेता की सभाएं नहीं होंगी। जब सीएम शर्मा के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा तब सीएम शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर होंगी। 309 शहरी निकायों के परिणाम इसलिए भी महत्व रखते हैं कि अगले माह ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होने हैं। राजस्थान में वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत दोनों संस्थाओं के चुनाव कराए जा रहे हैं। देखा जाए तो सीएम शर्मा की यह भी एक बड़ी उपलब्धि है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पूर्व में कहा था कि मुख्यमंत्री के काकाजी भी एक साथ चुनाव नहीं करवा सकतै। डोटासरा के इस कटाक्ष पर सीएम शर्मा का कहना है कि अब काकाजी ही चुनाव करवा रहे हैं। शहरी निकाय के चुनाव में प्रचार के क्षेत्र में भाजपा ने बाजी मार ली है। 2 सितंबर को ही मुख्यमंत्री शर्मा ने शहरी विकास का संकल्प पत्र जारी कर दिया है। जबकि अभी कांग्रेस के संकल्प पत्र की कोई खबर नहीं है। रामसेतु लिंक परियोजना, यमुना जल एग्रीमेंट, बाड़मेर में एचपीसीएल की रिफाइनरी आदि कार्यों को सीएम शर्मा अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि मानते हैं। सीएम शर्मा का कहना है कि जो कार्य वर्षों से लंबित थे। उन्हें ढाई वर्ष के कार्यकाल में पूरा किया गया है। वादे के मुताबिक अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां युवाओं को दी गई है। इतना ही नहीं बिजली के क्षेत्र में राजस्थान आत्मनिर्भर हो गया है। प्रदेश को अब किसी दूसरे राज्य से बिजली नहीं मांगनी पड़ती। उल्टे दूसरे राज्यों को बिजली दी जा रही है। बिजली की पर्याप्त उपलब्धता के कारण किसानों को भी दिन में बिजली दी जा रही है। सीएम शर्मा को लगता है कि ढाई वर्ष में जो कार्य हुए है, उनकी बदौलत शहरी निकायों में भाजपा की जीत होगी। इन चुनावों का असर पंचायती राज के चुनावों पर भी पड़ेगा। पंचायती राज चुनाव के परिणाम के दो वर्ष बाद विधानसभा के चुनाव होंगे। राजस्थान में गत पांच बार से सत्ता में बदलाव की परंपरा है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार को रिपीट करवाने की योजना बनाई जा रही है, जबकि कांग्रेस को उम्मीद है कि परंपरा के अनुरूप इस बार विधानसभा के चुनाव में उसे सरकार बनाने का अवसर मिलेगा।
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तो क्या ब्यावर में भाजपा ने अपराधियों और सटोरियों को उम्मीदवार बनाया? पूर्व जिलाध्यक्ष भूतड़ा का तगड़ा कटाक्ष।
अजमेर में वार्ड 72 से तारा पारीक की निर्दलीय उम्मीदवारी से भाजपा संगठन की पोल खुली।
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अजमेर संभाग के ब्यावर जिले की नगर परिषद के चुनाव में क्या अपराधियों और सटोरियों को भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया है? राजनीति में यह सवाल भाजपा के पूर्व विधायक और दो बार लंबे समय तक देहात जिलाध्यक्ष रहे देवीशंकर भूतड़ा के कटाक्ष के बाद उठा है। भूतड़ा ने टिकट बंटवारे के बाद 3 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में कहा गया कि जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ से लेकर मंडल स्तर तक संगठन को मजबूत किया, उनकी उपेक्षा कर आपराधिक पृष्ठभूमि और सटोरियों को उम्मीदवार बनाया गया। इस पोस्ट पर जब भूतड़ा से सवाल किया गया तो उनका कहना रहा कि मैंने यह पोस्ट भाजपा के कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप डाली है। आज ब्यावर का कार्यकर्ता स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा है। जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ और मंडल स्तर पर संगठन को मजबूत किया उनकी नगर परिषद के चुनाव में पूरी उपेक्षा की गई है। भूतड़ा ने कहा कि उनका भाजपा से कोई विरोध नहीं है। वह हमेशा भाजपा के साथ रहेंगे, लेकिन वे कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए आवाज उठाते रहेंगे। अच्छा होता कि जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ और मंडल स्तर पर संगठन का काम किया उन्हें नगर परिषद के चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाता। भूतड़ा ने कहा कि पार्टी ने बूथ और मंडल स्तर पर उम्मीदवारों के लिए जो सर्वे करवाया उसकी भी अनदेखी की गई है। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को अपनी भावनाओं से अवगत करवाया है। भूतड़ा ने कहा कि जो उम्मीदवार बनाए गए है उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराई जानी चाहिए। यहां उल्लेखनीय है कि ब्यावर जिले की प्रभारी उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है। बताया जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत और नवनियुक्त जिलाध्यक्ष आशीष सांड की राय को प्राथमिकता दी गई है। ब्यावर के उम्मीदवारों के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414010555 पर देवी शंकर भूतड़ा से ली जा सकती है।
अजमेर में भी पोल खुली:
अजमेर नगर निगम के वार्ड संख्या 72 से श्रीमती तारा पारीक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही है। तारा पारीक मौजूदा समय में अजमेर भाजपा के दाहरसेन मंडल की मंत्री है। पारा पारीक की उम्मीदवारी से अजमेर में भाजपा संगठन की पोल खुल गई है। इस वार्ड से भाजपा नेता गोपाल शर्मा की पुत्रवधू अनुश्री को भाजपा का अधिकृत उम्मीदवार बनाया गया है। अनुश्री को उम्मीदवार बनाए जाने पर तारा पारीक का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही है। जबकि अनुश्री को संगठन के किसी भी कार्यक्रम में नहीं देखा गया है। वे मंडल मंत्री ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सेविका समिति में भी सक्रिय रही। सेवा भारती अजयमेरु की योग प्रमुख भी है। दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान में योग शिक्षक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने योग साइंस में ही एमए की डिग्री ली है। सामाजिक सेवा के कारण ही इसी वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मानित भी किया गया। यदि इतनी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता के बाद भी वार्ड पार्षद का टिकट न मिले तो फिर राजनीति में महिलाओं को निराशा ही मिलेगी। क महिला कार्यकर्ता सिर्फ धरना प्रदर्शन के लिए ही होती है? वहीं तारा पारीक के पति अनिल पारीक ने भी पत्नी को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सेवक संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित कार्यकर्ता है। पत्नी को टिकट दिलवाने के लिए उन्होंने भाजपा के सभी बड़े नेताओं से आग्रह किया था, लेकिन नेताओं ने उनके आग्रह को ठुकरा दिया। अब यह पत्नी का निर्णय है कि वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा के नेताओं को बताना चाहिए कि उनकी पत्नी को उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया गया? उल्लेखनीय है कि इस वार्ड से कांग्रेस ने पूर्व मनोनीत पार्षद कपिल सारस्वत की पत्नी रिचा जोशी को उम्मीदवार बनाया है। चूंकि निर्दलीय उम्मीदवार तारा पारीक इस वार्ड में लंबे समय से सक्रिय हैं और निशुल्क योग शिविर का संचालन कर रही है इसलिए वार्ड के आम मतदाता से सीधा संवाद है। इस संबंध में मोबाइल नंबर 9257873135 पर और अधिक जानकारी तारा पारीक से ली जा सकती है।
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फिल्म हनुमान अंश पर हो गई नीम करौली बाबा की कृपा।
नेत्रहीन सुनील का भजन-मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दी, भी सुपरहिट हुआ।
दो करोड़ के बजट वाली फिल्म ने अब तक 50 करोड़ कमाएं।
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पिछले दिनों जब फिल्म हनुमान अंश रिलीज हुई तो अधिकांश सिनेमाघर खाली पड़े रहे। फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को उम्मीद थी कि हिन्दुओं के आराध्य देव हनुमानजी पर बनी फिल्म लोकप्रिय होगी, लेकिन जब अपेक्षा के अनुरूप फिल्म नहीं चली तो निर्देशक चतुर्वेदी ने उत्तराखंड में नैनीताल के निकट बने कैंची धाम में नीम करौली बाबा से प्रार्थना की। असल में यह फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन पर ही आधारित है। निर्देश की प्रार्थना के बाद फिल्म पर ऐसी कृपा हुई कि पिछले दस दिनों में यह फिल्म सुपरहिट हो गई। अब सभी सिनेमाघर में उम्मीद से ज्यादा दर्शक हे। भारतीय सनातन संस्कृति में आस्था रखने वाला हर व्यक्ति फिल्म हनुमान अंश को देखने के लिए उत्सुक हे। 2 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने अब तक 50 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई कर ली है। हनुमान अंश के मुकाबले में बड़े बजट वाली कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धाराशायी हो गई। फिल्म उद्योग में जब इसे नीम करौली बाबा का चमत्कार ही माना जा रहा है कि 2 करोड़ के बजट वाली फिल्म सुपरहिट हो रही है। उल्लेखनीय है कि नीम करौली बाबा भी हनुमान जी के ही भक्त थे। 17 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने घर परिवार त्याग कर अध्यात्म की राह पकड़ ली थी। उन्होंने जिस स्थान पर अधिक समय गुजारा वही पर आज कैंची धाम (नैनीताल के निकट) बना हुआ है। चूंकि इस धाम को दो पहाड़ों के बीच बनाया गया है,इसलिए इसका नाम कैंची धाम रखा गया है। यही पर नीम करौली बाबा की प्रतिमा भी है। प्रतिमा के दर्शन के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कैंची धाम आते हैं। यह बात अलग है कि 11 सितंबर 1973 को अपना शरीर वृंदावन में त्यागा था। वृंदावन में बाबा का समाधि स्थल है। देश ही नहीं दुनिया के बड़े लोग बाबा के अनुयायी है।
नेत्रहीन सुनील भी हिट हुआ:
हनुमान अंश फिल्म में एक भजन नेत्रहीन गायक सुनील का भी है। सुनील बुंदेलखंड का रहने वाला है और उसने कुछ माह पहले अपना एक भजन मोबाइल पर रिकॉर्ड किया। यह भजन जब सोशल मीडिया पर चला तब निर्देशक विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश का निर्माण कर रहे थे। सुनील के भजन से प्रभावित होकर चतुर्वेदी ने सुनील को बुलाया और उसके भजन की रिकॉर्डिंग स्टूडियो में करवाई। सुनील का यह भजन मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डाल दी, जब फिल्म के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंचा तो नेत्रहीन सुनील भी रातों रात सुपरहिट हो गया। अपनी लोकप्रियता से उत्साहित सुनील का कहना है कि उसने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन इतनी प्रसिद्धि मिलेगी। सुनील भी इसे नीम करौली बाबा की कृपा मानते हैं। हिन्दी फिल्म उद्योग के विशेषज्ञ स्वीकार कर रहे है कि हनुमान अंश पर नीम करोली बाबा की कृपा हो गई है। यह भारत की आध्यात्मिक शक्ति का सबूत भी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि 1975 में जय संतोषी मां फिल्म भी इसी तरह लोकप्रिय हुई थी। तब सिनेमा घरों में पूजा पाठ तक होने लगी थी। अब 50 वर्ष बाद एक बार फिर सिनेमा घरों में भारत के आध्यात्म की गूंज हो रही है।
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