Sunday, 5 October 2025
लंदन में जिस मकान में रहकर अंबेडकर ने पढ़ाई की उसी मकान (म्यूजियम) में बैठकर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष देवनानी ने दुर्लभ साहित्य पढ़ा। सावरकर हाउस भी देखा।
भारत में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने पर अनेक समारोह हो रहे हैं, तब राहुल गांधी की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में संघ की विचारधारा को कायरता वाली बता रहे है, जबकि राहुल ने तो गांधी वाला सरनेम उधार ले रखा है। राहुल का राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के परिवार से कोई सरोकार नहीं है। फिर भी राहुल अपने नाम के साथ गांधी शब्द का उपयोग करते हैं ताकि महात्मा गांधी के नाम का फायदा उठाया जा सके। उधार का सरनेम का उपयोग करने वाले राहुल को अब संघ की विचारधारा कायरता वाली नजर आती है, जबकि अपनी विचारधारा से ही संघ आज दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। राहुल गांधी अपने अधूरे ज्ञान से संघ के बारे में कुछ भी कहे, लेकिन संघ की विचारधारा भारत की सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई है। दुनिया में सनातन संस्कृति ही ऐसी संस्कृति है, जिसमें सभी धर्मों और विचारधाराओं का सम्मान होता है। जबकि राहुल गांधी तो उस संस्कृति के संरक्षक हैं, जिसने देश के विभाजन के समय 20 लाख हिंदुओं की हत्या की। इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर से चार लाख हिंदुओं को पलायन करना पड़ा। ऐसी संस्कृति को राहुल ने कभी भी आलोचना नहीं की। राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं तो भारत में लोकतंत्र को खतरा बताते हैं। राहुल लोकतंत्र को खतरा बता रहे है, जब लोकसभा में 545 सांसदों में से 234 विपक्ष के सांसद है। खुद राहुल गांधी लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता है। प्रतिपक्ष का नेता होने के कारण राहुल को लोकसभा में हर विषय पर बोलने का विशेषाधिकार है। लेकिन लोकसभा में राहुल विपक्षी सांसदों के साथ हंगामा करवाते हैं। संसद का बजट और मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। राहुल संसद के अंदर स्वस्थ बहस नहीं होने देते और विदेश में जाकर लोकतंत्र को खतरा बताते हैं। राहुल गांधी हमेशा उन ताकतों के साथ खड़े नजर आते हैं जो भारत विरोधी है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में प्रतिपक्ष के नेता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लोकतंत्र में प्रतिपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री के बराबर सम्मान मिलता है। लेकिन आमतौर पर देखने में आया है कि राहुल अपने नेता पद के अनुरूप आचरण नहीं करते हैं। राहुल को सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन राहुल गांधी सरकार की आलोचना करने के बजाए देश का विरोध करते हैं। यही वजह है कि देश भर में कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो रहा है। आज कांग्रेस क्षेत्रीय दलों पर निर्भर हो गई है।
S.P.MITTAL BLOGGER (03-10-2025)
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Friday, 3 October 2025
अजमेर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। भाग - 6 पाकिस्तान से आकर अजमेर में पार्षद बने सेवकराम सोनी। आपातकाल में बेटे के साथ रहे जेल में। हिंदुओं की बहन-बेटियों को तंग करने वालों को सबक भी सिखाया।
देश के विभाजन के समय 1948 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत से जो सिंधी हिंदू परिवार किसी तरह जान बचाकर अजमेर आए, उनमें नारूमल सोनी का परिवार भी शामिल था। नारूमल अपने भरे पूरे परिवार के साथ अजमेर आए थे। उनके साथ पांच वर्षीय पुत्र सेवकराम सोनी भी था। चूंकि नारूमल स्वयं भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़े रहे इसलिए अजमेर आते ही पुत्र सेवकराम को शाखा में भेजना शुरू कर दिया। सेवकराम को बचपन से ही गीत लिखने का शौक रहा। 'यह हिमालय से उठा शीर्षक वाला गीत तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर देता था। सेवकराम का संघ के प्रति समर्पण के कारण ही आपातकाल में उन्हें जेल जाना पड़ा। हालांकि विभाजन के समय पूरे परिवार ने विभाजन की त्रासदी को झेला और बड़ी मुश्किल से अजमेर में दो वक्त की रोटी का इंतजाम किया। लेकिन आपातकाल में तत्कालीन सरकार का संघ के प्रति दमनात्मक रुख था, इसलिए संघ के अधिकांश स्वयंसेवकों को जेल में डाला। सेवकराम जब अजमेर की सेंट्रल जेल में थे, तभी दूसरी बैरक से गीत की आवाज सुनाई दी। यह आवाज सेवकराम के पुत्र कन्हैया की थी। सेवकराम को जेल में ही पता चला कि उनका पुत्र भी आ गया है। पिता पहले से ही जेल में थे और ऊपर से पुत्र भी आ गया। यदि सेवकराम के पास संघ की शिक्षा दीक्षा नहीं होता तो वे टूट जाते, लेकिन संघ का पक्का और मजबूत स्वयंसेवक होने के कारण सेवकराम ने इस बात पर गर्व जताया कि अत्याचारी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए उनके पुत्र कन्हैया सोनी का भी योगदान शामिल हो गया है। बाद में पिता-पुत्र दोनों ने गीतों से सेंट्रल जेल का माहौल देशभक्ति पूर्ण कर दिया। जेल में ही सेवकराम, भानु कुमार शास्त्री के साथ पूजा-पाठ करते थे। आपातकाल के समय धर्मनारायण, जयंती जी, शंकरलाल जी आदि स्वयंसेवकों ने सेवक राम के परिवार की देखभाल की। वर्ष 1956-57 के समय जब अजमेर में मोती कटला क्षेत्र में हिंदू बहन-बेटियों के साथ छेड़छाड़ की जाती थी, तब सेवकराम ही अपने साथी ठाकुरमल सोनी, हरीश आदि के साथ बदमाशों को सबक सिखाते थे। इसे सेवकराम जी की कड़ी मेहनत ही कहा जाएगा कि शरणार्थी बनकर अजमेर आने के बाद इसी अजमेर शहर में नगर परिषद के पार्षद भी बने। 1990 में वैशाली नगर के वार्ड 2 से सेवकराम तब पार्षद बने जब नगर परिषद के अध्यक्ष रतनलाल यादव होते थे। इतना ही नहीं वर्ष 2005 में वैशाली नगर क्षेत्र से ही सेवकराम जी के दूसरे नंबर के पुत्र मनोहर सोनी की पत्नी रीना देवी पार्षद चुनी गई। सेवकराम जी का निधन 2 अक्टूबर 2011 को हुआ, लेकिन आज उनका पूरा भरा परिवार अजमेर में अच्छे मुकाम पर खड़ा है। सेवकराम जी के छह पुत्रों में से एक कन्हैया सोनी का स्वर्गवास हुआ है, जबकि मनोहर, लक्ष्मण, पुरुषोत्तम, मोहन, नारायण (राजाजी) अभी संघ में सक्रिय हैं। नारायण यानी राजा सोनी का एक पुत्र हिमांशु संघ में घोष प्रमुख तथा दूसरा पुत्र पार्थ शाखा प्रमुख है। इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रभाव ही कहा जाएगा कि पीढ़ी दर पीढ़ी संघ के कार्य में सक्रिय रहती है। सेवकराम जी के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9214675492 पर पुत्र राजा सोनी से ली जा सकती है।
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गाजा के शांति प्रयासों के लिए पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की सराहना की। ट्रंप को अब मिल सकता है नोबेल शांति पुरस्कार। तबाही की धमकी के बाद सरेंडर हुआ हमास।
गाजा में सक्रिय मुस्लिम चरमपंथी संगठन हमास ने आखिरकार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्लान को स्वीकार कर लिया है। इसके अंतर्गत जल्द ही इजरायली बंधकों की रिहाई होगी। साथ ही अमेरिका की मदद से गाजा पट्टी को विकसित किया जाएगा। हमास और इजरायल के बीच शांति प्रयास सफल होने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की सराहना की है। मोदी ने एक्स पर लिखा है कि ट्रंप के प्रयासों से ही मध्य पूर्व में शांति की पहल हुई है। भारत शुरू से ही शांति प्रयासों का पक्षधर रहा है। मोदी ने जिस तरह ट्रंप की प्रशंसा की है उससे प्रतीत होता है कि अब ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिल ही जाएगा। शांति के लिए नोबेल पुरस्कार पाने के लिए ट्रंप लालायित है। ट्रंप का दावा है कि भारत पाकिस्तान सहित छह देशों के बीच युद्ध रुकवाने में उन्होंने पहल की है। यदि भारत और पाकिस्तान का युद्ध आगे बढ़ता तो दुनिया के हालात बिगड़ते क्योंकि दोनों देश परमाणु संपन्न हैं। हालांकि ट्रंप के इस बयान का भारत की ओर से खंडन किया गया, लेकिन अब जब ट्रंप ने इजरायली और हमास के बीच शांति की पहल की है तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की सराहना की है। मोदी की सराहना से ट्रंप को शांति का नोबेल पुरस्कार मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने हमास के समक्ष जो शांति का प्लान रखा था, उसे पूर्व में हमास ने मानने से इंकार कर दिया था। लेकिन 3 अक्टूबर को ट्रंप ने कहा कि यदि 5 अक्टूबर तक हमास ने शांति प्लान स्वीकार नहीं किया तो फिर हमास की तबाही शुरू हो जाएगी। ट्रंप की इस धमकी के बाद ही हमास ने शांति प्लान को स्वीकार करने की घोषणा की है। माना जा रहा है कि अब गाजा में इजरायली की बमबारी भी रुक जाएगी।
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सरस्वती की कृपा से ही कविताएं व साहित्य का सृजन संभव। विख्यात कवि बुद्धि प्रकाश दाधीच की उपस्थिति में कविता के भाव सृजन पुस्तक का विमोचन। कवयित्री मधु खंडेलवाल ने कविता के भाव कविता से जाने।
3 अक्टूबर को अजमेर के पंचशील स्थित होटल ब्रेविया में कवयित्री कविता जोशी की पुस्तक कविता के भाव सृजन का विमोचन हुआ। इस अवसर पर अतिथि के तौर पर सुविख्यात कवि बुद्धि प्रकाश दाधीच राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सोलंकी, आकाशवाणी जयपुर के उद्घोषक गोपाल लखन और संपादक ब्लॉगर एसपी मित्तल उपस्थित रहे। विमोचन समारोह में कवि दाधीच ने कहा कि लेखन का कार्य सरस्वती की कृपा से ही संभव है। आज में भी सरस्वती की कृपा से ही कविताएं लिखकर मंचों पर सुना रहा हंू। कविता जोशी ने जो कविताएं लिखी है वे भी सरस्वती की कृपा से ही है। उन्होंने कहा कि साहित्य लेखन का कार्य आसान नहीं है। हालांकि अब महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं है, लेकिन फिर भी जो महिलाएं लेखन का कार्य कर रही है उन्हें समाज में सम्मान मिलना ही चाहिए। इस अवसर पर अजमेर लेखक मंच की प्रमुख और सुप्रसिद्ध कवयित्री मधु खंडेलवाल ने पुस्तक की लेखिका कविता जोशी से कुछ सवाल भी किए। कविता जोशी का कहना रहा कि कविताएं लिखने का शौक स्कूल कॉलेज के समय से ही था। अपनी डायरियों में उन्होंने आसपास के जीवन को लेकर कतिवाएं लिखी है। इस बार उनके पति चंद्र प्रकाश जोशी (राजस्थान पत्रिका के अजमेर संस्करण के संपाकद) की प्रेरणा और सहयोग से पुस्तक तैयार की है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने भावों का सृजन किया है। पुस्तक के बारे में आकाशवाणी के उद्घोषक गोपाल लखन ने कहा कि यह पुस्तक सरल शब्दों में है, इसलिए कविता के शब्दों के भाव आसानी से समझे जा सकते हैं। साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सोलंकी का कहना रहा कि साहित्य अकादमी युवा कवियों को प्रोत्साहित करती रहती है। इसलिए कविता के भावसृजन के प्रकाश में भी आर्थिक सहयोग किया गया है। पुस्तक का प्रकाशन जयपुर स्थित मानसरोवर विस्तार के बोधि प्रकाशन द्वारा किया गया है। 199 रुपए की कीमत वाली इस पुस्तक को मोबाइल नंबर 9660520078 व 9829018087 पर फोन कर मंगाया जा सकता है। पुस्तक की लेखक कविता जोशी मौजूदा समय में अजमेर के मित्तल कॉलेज ऑफ नर्सिंग संस्थान में पुस्तकालय अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। पुस्तक के लेखन के लिए मोबाइल नंबर 9460041244 पर कविता जोशी को बधाई दी जा सकती है। होटल ब्रेविया में आयोजित विमोचन समारोह के अंत में सीपी जोशी ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। समारोह में जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक भानु प्रताप गुर्जर, अजमेर दाधीच समिति के अध्यक्ष घनश्याम दाधीच, समाजसेवी अशोक पंसारी, साहित्यकार उमेश चौरसिया, राजस्थान पत्रिका के जोनल हैड बजरंग सिंह राठौड़ आदि उपस्थित रहे।
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राजीव गांधी के समय की 414 सीटों का उल्लेख कर क्या अशोक गहलोत ने राहुल गांधी के नेतृत्व को चुनौती दी है? सेवादल के ट्रेनिंग प्रोग्राम में गहलोत ने कांग्रेस में गुटबाजी स्वीकारी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत इन दिनों अपने विवादित बयानों से चर्चित हैं। 3 अक्टूबर को जयपुर जिले के सामोद में कांग्रेस सेवादल के ट्रेनिंग प्रोग्राम में भी गहलोत ने ऐसी बातें कही, जिन्हें अब कांग्रेस पार्टी में विवादित माना जा रहा है। गहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि राजीव गांधी के समय लोकसभा में कांग्रेस के 414 सांसद थे, लेकिन आज मात्र 90 सांसद हैं। इससे पहले तो 52 तथा 2014 में मात्र 44 सांसद चुने गए। कांग्रेस को इस स्थिति पर मंथन करना चाहिए। उन कारणों का पता लगाना चाहिए, जिससे हमारे सांसदों की संख्या कम हुई है। गहलोत ने इस बात को भी स्वीकारा की कांग्रेस में गुटबाजी है। कार्यकर्ता पार्टी के कार्यक्रम में जाने से डरता है। उसे लगता है कि यदि वह शामिल हुआ तो उस पर एक गुट का समर्थन करने का आरोप लग जाएगा। गुटबाजी के कारण कार्यकर्ता कन्फ्यूजन रहता है। गहलोत ने कहा कि हम सभी को मिलकर कांग्रेस को मजबूत करना है। सवाल उठता है कि गहलोत ने राजीव गांधी के समय के 414 और राहुल गांधी के समय के 98 सांसदों का उल्लेख कर क्या राहुल गांधी के नेतृत्व को चुनौती दी है? पिछले 15 वर्षों से राहुल गांधी ही कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष भले ही सोनिया गांधी या मल्लिकार्जुन खड़े हों, लेकिन कांग्रेस के बड़े फैसले राहुल गांधी ही करते हैं। यह सही बात है कि पिछले पौने दो वर्ष से अशोक गहलोत को कांग्रेस में कोई पद नहीं मिला है। गहलोत के चालीस वर्ष के राजनीतिक जीवन में पहला अवसर है, जब वे कांग्रेस में किसी पद पर नहीं है। मालूम हो कि 25 दिसंबर 2022 को राजस्थान का मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत ने जो बगावत की उसी की वजह से गांधी परिवार गहलोत से खफा है। अशोक गहलोत अब तक कहते रहे कि कांग्रेस में गुटबाजी नहीं है। स्वयं के सचिन पायलट के साथ मतभेदों की खबरों को भी गहलोत नकारते रहे। गहलोत का कहना रहा कि मतभेद वाली खबरें मीडिया की उपज हैं। लेकिन 3 अक्टूबर को गहलोत ने स्वीकार किया कि कांग्रेस में गुटबाजी है।
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