Wednesday, 30 September 2026
विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा को मूक बधिर वाला प्रदेश अध्यक्ष बताया।
तो क्या अब कांग्रेस में डोटासरा के खिलाफ बगावत हो रही है?
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस के हालात चिंताजनक।
भरतपुर नगर निगम के 65 में से कांग्रेस के 7 पार्षद है।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भरतपुर संीााग में दबदबा रखने वाले पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंहडोटासरा पर बड़ा हमला बोला है। सोलश मीडिया पर जारी बयान में विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि डोटासरा मूक बधिर बने बैठे हैं। इसलिए शहरी निकायों के चुनाव में अधिकांश स्थानों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर और डीग के जिलाध्यक्षों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब जनता कांग्रेस के कुछ नेताओं को कब्र में दफनाने के लिए तैयार बैठी है। डोटासरा की ओर इशारा करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि भरतपुर आने पर पूर्व अध्यक्ष चंद्रभान से भी अच्छा स्वागत किया जाएगा। यहां उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष चंद्रभान ने भरतपुर में एक बैठक ली। इस बैठक में विश्वेंद्र सिंह के समर्थकों ने तत्कालीन जिलाध्यक्ष के साथ बुरी तरह मारपीट की। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रभान को बड़ी मुश्किल से बैठक से सुरक्षित निकाला। ब इस घटना की गूंज कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व तक हुई। विश्वेंद्र सिंह ने अपने बयान में एक बार फिर डोटासरा के रिश्तेदारों के आरएएस में चयन का मुद्दा उठाया। उन्होंने लिखा कि आरएएस के साक्षात्कार में डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया, उनकी बहन प्रज्ञा और भाई गौरव को समान रूप से 80-80 अंक मिले। इतना ही नहीं वर्ष 2016 में पुत्र अविनाश ने आरएएस में नॉन क्रीमीलेयर का प्रमाण पत्र देकर ओबीसी कोटे का लाभ लिया। कांग्रेस की राजनीति में विश्वेंद्र सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थक माना जाता है। मौजूदा हालातों में विश्वेंद्र सिंह का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि शहरी निकाय के चुनाव परिणाम के बाद अशोक गहलोत ने भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी कीचुनावी रणनीति पर सवाल उठाए थे। कई नेताओं ने भी दबी जुबान से डोटासरा की कार्यशैली पर ऐतराज जताया है। कांग्रेस में यह खींचतान तब हो रही है, जब पंचायत चुनाव होने वाले हैं। शहरी निकाय चुनाव की हार से कांग्रेस अभी संभल भी नहीं पाई है कि वरिष्ठ नेताओं के बयान सामने आने लगे है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रदेश् ाअध्यक्ष सचिन पायलट फिलहाल प्रदेश की राजनीति से दूर है। पायलट का सारा ध्यान पंजाब में लगा हुआ है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पायलट को पंजाब का प्रभारी बना रखा है। पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं।
निगम में सिर्फ 7 पार्षद:
भरतपुर में कांग्रेस के नेताओं के बीच जो खींचतान चल रही है, उसी का परिणाम रहा कि नगर निगम के 65 में से कांग्रेस के मात्र 7 पार्षद ही चुनकर आए। इसी खींचतान के कारण कांग्रेस भरतपुर में मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार भी खड़ा नहीं कर सकी। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार अनुराधा सिंह का निर्विरोध निर्वाचन हुआ। भरतपुर के सभी निकायों में भाजपा के ही प्रमुख बने हैं।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-10-2026)
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