Tuesday, 15 September 2026

शहरी निकाय चुनाव में आखिर 30 हजार उम्मीदवारों और नेताओं की बाड़ाबंदी का खर्च कौन वहन करेगा? इसलिए राजनीति में भ्रष्टाचार होता है। ================ राजस्थान में शहरी निकायों के 10245 वार्डों के अंतिम चरण का मतदान 11 सितंबर को सायं 6 बजे समाप्त होगा। पहले चरण का मतदान 9 सितंबर को हो गया। मतदान के तुरंत बाद भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। यानी 20 हजार से ज्यादा उम्मीदवार होटल, रिसोर्ट आदि में बंद रहेंगे। इसके साथ ही महिला उम्मीदवारों के साथ उनके पति या पिता भी है। ऐसे में होटल, रिसोर्ट में रहने वालों की संख्या 30 हजार से ज्यादा हो गई है। ये 30 हजार उम्मीदवार नेता 14 सितंबर को परिणाम आने पर 15 हजार उम्मीदवार और नेताओं को होटल रिसोर्ट से मुक्त कर दिया जाएगा। ऐसे उम्मीदवार वार्ड चुनाव में हारने वाले होंगे। यानी 14 सितंबर तक वो 30 हजार उम्मीदवारों का खर्चा वहन करना पड़ेगा और फिर 14 हजार उम्मीदवारों को 22 सितंबर तक निकाय के उपप्रमुख के चुनाव तक बंधक रहना पड़ेगा। यानी 15 हजार उम्मीदवारों को होटल रिसोर्ट का खर्चा 22 सितंबर तक वहन करना पड़ेगा। सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में भाजपा-कांग्रेस के उम्मीदवारों का खर्चा कौन वहन करेगा? चुनाव में तो उम्मीदवारों ने अपनी जेब से लाखों रुपया खर्च किया, लेकिन बाड़ाबंदी में रहने का खर्चा तो भाजपा और कांग्रेस के संगठन के स्तर पर ही होगा। एक अनुमान के अनुसार बाड़ाबंदी का खर्च करीब 35 करोड़ रुपए तक होगा। इतना बड़ा खर्चा कोई नेता अपनी जेब से नहीं देगा। स्वाभाविक है कि सत्ता का लाभ लेने वाले दलाल किस्म के लोग ही खर्च वहन करेंगे। जब दलाल किस्म के लोग पैसा खर्च करेंगे तो स्वाभाविक है कि पार्षद और निकाय प्रमुख बन जाने पर वसूली भी होगी। ऐसे चुनावी खर्च के कारण ही राजनीति में भ्रष्टाचार होता है। सबसे खास बात यह है कि दोनों ही दलों को अपने उम्मीदवारों और चुनाव जीतने के बाद पार्षद बनने वालों पर भरोसा नहीं है। यही वजह है कि मतदान के तुरंत बाद उम्मीदवारों की बाड़ाबंदी की जा रही है। भाजपा का कहना है कि हमारे उम्मीदवारों को पार्टी की रीति-नीति का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तो वहीं कांग्रेस इस बाड़ाबंदी को उम्मीदवारों से संवाद करने की बात कह रही है। दोनों दलों के तर्क मजाक जैसे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 11-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
राजस्थान के शहरी निकायों के चुनाव में कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने कहा, बटो तो कटोगे। कागजी बताएं कि किस हिन्दू शासक ने धर्म के आधार पर मुसलमानों पर अत्याचार किए। भाजपा के शासन में तो सबसे ज्यादा लाभ मुसलमानों को ही मिल रहा है। ================ राजस्थान में 309 शहरी निकायों के 10245 वार्डों के चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 11 सितंबर को हो रहा है। अंतिम चरण से एक दिन पहले जयपुर के मुस्लिम बाहुल्य किशनपोल क्षेत्र के कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने कहा, बटोगे तो कटोगे। कागजी ने यह बयान अपने निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के संदर्भ में कहा। कागजी चाहते है कि उसके क्षेत्र के मतदाता एकजुट होकर कांग्रेस के उम्मीदवारों को वोट दे। कागजी ने यह बयान वार्ड स्तर की चुनावी सभाओं में तो दिया ही और फिर मीडिया के सामने भी स्वीकार किया कि उन्होंने बटोगे तो कटोगे वाली बात कही है। सब जानते हैं कि बटोगे तो कटोगे की बात देश में सबसे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही। योगी आदित्यनाथ ने भारत के इतिहास के संदर्भ में अपनी बात को कहा था। इतिहास गवाह है कि आक्रमणकारी मुगल शासकों ने भारत में धर्म के आधार पर कत्लेआम किया। यहां तक कि सिख धर्म के गुरुओं के मासूम बच्चों को जिंदा दीवार में चिनवा दिया गया। टूटे हुए मंदिर आज भी बता रहे है कि मुगल शासकों ने हिंदू धर्मस्थलों को कितना नुकसान पहुंचाया। हर बड़े हिंदू धार्मिक स्थल के परिसर में ही इस्लामिक चिह्न और इमारतें बनवाई गई। ऐसी इमारतें आज भी विवाद का विषय बनी हुई है। इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जिसमें किसी हिन्दू शासक ने धर्म के आधार पर मुसलमानों पर अत्याचार किया हो। जब भारम  किसी भी स्थान पर मुसलमानों पर अत्याचार नहीं हुए तो फिर कांग्रेस विधायक अमीन कागजी, बटोगे तो कटोगे की बात क्यों कर रहे हैं? इतिहास ही नहीं बल्कि मौजूदा भाजपा शासन में मुसलमानों को ही सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है। सरकार की हर योजना का लाभ मुसलमान भी प्राप्त कर रहे हैं। यही वजह है कि प्रतिमाह प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज से लेकर मुफ्त में मकान तक मुसलमानों को मिल रहे हैं। अमीन कागजी अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर कुछ भी कहे, लेकिन आज जयपुर में नहीं राजस्थान और पूरे देश में मुसलमान सम्मान और समृद्धि के साथ रह रहे है। अमीन कागजी को बटोगे तो कटोगे जैसा बयान देने से पहले पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हालात देख लेने चाहिए। यह तीनों देश मुस्लिम है और यहां किस तरह मुसलमानों को काटा जा रहा है, यह जगजाहिर है।  S.P.MITTAL BLOGGER ( 11-09-2026) Website- www.spmittal.inFacebook Page- www.facebook.com/SPMittalblogFollow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11Blog- spmittal.blogspot.comTo Add in WhatsApp Group- 9166157932To Contact- 9829071511
जब धार्मिक आधार पर वंदेमातरम गीत गाने पर मुसलमानों को ऐतराज है तो मां दुर्गा की अराधना वाले गरबा पंडाल में प्रवेश की जिद क्यों? महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फणनवीस ने बड़ा दिल दिखाया। ================ विश्व हिन्दू परिषद ने आह्वान किया कि देशभर में नवरात्र में सजने वाले गरबा पंडालों में मुस्लिम व्यक्तियों को प्रवेश नहीं दिया जाए। विहिप के इस आह्वान का कांग्रेस नेताओं और अनेक मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया है। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि विहिप का यह आह्वान सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाडऩे वाला है। वही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस की पत्नी अमृता फणनवीस ने बड़ा दिल दिखाते हुए कहा है कि गरबा पंडालों में कोई भी व्यक्ति आ सकता है। यानी अमृता फणनवीस को गरबा पंडालों में मुस्लिम व्यक्तियों के आने पर कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन सवा लउठता है कि जब गरबा पंडालों में सनातन धर्म की प्रतीक मां दुर्गा की अराधना की जाती है, तब कोई मुसमान कैसे इस समारोह में भाग ले सकता है। किसी दूसरे धर्म की अराधना करना इस्लाम में मना है। इस्लाम की इस धार्मिक मान्यता के चलते ही मुसलमान वंदे मातरम गीत गाने से मना करते हैं। यह मनाही तब भी की जा रही है, जब वंदेमारतम गीत को कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि वंदे मातरम गीत में सनातन धर्म के देवी-देवताओं का उल्लेख है, इसलिए कोई मुसलमान इस गीत को गा नहीं सकता। मुसलमानों की भावनाओं का ख्याल करते हुए कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार ने फैसला किया है कि राज्य सरकार के समारोहों में वंदेमातरम के दो पैरे ही गाए जाएंगे। यानी कर्नाटक में 6 पैरों वाला वंदेमातरम नहीं गया जाएगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े भी कह चुके हैं कि कांग्रेस के समारोह में वंदेमातरम के दो ही पैरे गाए जाएंगे। कांग्रेस जब वंदेमातरम गीत पर मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रख रही है, तब सवाल उठता है कि मां दुर्गा की अराधना वाले गरबा पंडाल में मुसलमानों को प्रवेश दिलवाने के लिए कांग्रेस क्यों जिद कर रही है? जहां तक आम मुसलमान का सवाल है तो वह स्वयं ही गरबा पंडालों में प्रवेश नहीं करता है, लेकिन कांग्रेस और कुछ मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि राजनीति करने के लिए बयानबाजी करते है। देश में ऐसे अनेक मुसलमान है जो वंदेमातरम के भी सभी 6 पैरों को गाने के लिए तैयार है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 11-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
जोधपुर हाईकोर्ट के भवन के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग। हाईकोर्ट को खुद भवन का निर्माण करवाना चाहिए था-अशोक गहलोत, पूर्व सीएम। गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए ही भवन को हाईकोर्ट को सौंपा था। ================ राजस्थान में जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्यपीठ के नए भवन में निर्माण के दौरान घटिया सामग्री के उपयोग के संदर्भ में 9 सितंबर को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि पूर्व में हाईकोर्ट प्रशासन ही अदालतों के भवनों का निर्माण करवाता था। अब भी हाईकोर्ट प्रशासन को ही भवनों का निर्माण करवाना चाहिए। असल में जोधपुर हाईकोर्ट के नए भवन का शुभारंभ वर्ष 2019 में तब हुआ था, जब अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे। गहलोत के कार्यकाल में ही राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (आरएसआरडीसी) ने भवन की सुपुर्दगी हाईकोर्ट प्रशासन को दी थी। लेकिन शुरुआत से ही भवन निर्माण की खामियां उजागर हो रही थी। विगत दिनों जब भवन का गुबंद ही टेड़ा हो गया तो तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट की नाराजगी के चलते पुलिस ने भवन निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग करने के आरोप में आरएसआरडीसी के इंजीनियर सुरेश शर्मा, अजीत कुमार सांगी, शिवहरे माहोर, दीपक मित्तल, अजय कृष्ण मूथा के साथ साथ भवन का निर्माण करने वाली वरिंदर कंट्रक्शन कंपनी के मालिक वरिंदर गर्ग को गिरफ्तार कर लिया। चूंकि भ्रष्टाचार का यह मामला इन दिनों सुर्खियों में है और घटिया निर्माण की जिम्मेदारी सीधे सीधे कांग्रेस सरकार पर आ रही हे। वर्ष 2019 में जब मुख्यमंत्री रहते हुए अशोक गहलोत ने हाईकोर्ट भवन की सुपुर्दगी दी, तब गहलोत ने बढचढ़ कर श्रेय लिया था। गहलोत का गकहना रहा कि उनके कार्यकाल में ही जोधपुर में भूमि का आवंटन हुआ और उनके मुख्यमंत्री रहते हुए ही हाईकोर्ट का नया भवन तैयार हुआ है। जो अशोक गहलोत वर्ष 2019 में नए भवन के निर्माण का श्रेय ले रहे थे, वो ही अशोक गहलोत अब जिम्मेदारी हाईकोर्ट प्रशासन पर डाल रहे है। सवाल उठता है कि अदालतों के भवनों का निर्माण हाईकोर्ट प्रशासन करवाए यह बात गहलोत को कहने की जरुरत क्यों पड़ी? असल में गहलोत अपनी गलती की जिम्मेदारी कभी स्वीकार नहीं करते है। गहलोत ने हमेशा ही अपनी गलतियों की जिम्मेदारी दूसरों पर डाली है। गहलोत ने 25 सितंबर 2022 को मुख्यमंत्री रहते हुए जब कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत कीतब भी अपनी बगावत के लिए सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराया।
शहरी निकाय के चुनाव में प्रथम चरण में 76 प्रतिशत से ज्यादा की वोटिंग। बाड़ाबंदी : क्या भाजपा-कांग्रेस को अपने उम्मीदवारों की वफादारी पर भरोसा नहीं है? निकाय प्रमुख बनाने की चाबी निर्दलियों के पास। ================ राजस्थान में 309 शहरी निकायों के चुनाव का प्रथम चरण 9 सितंबर को हो गया। दूसरा चरण 11 सितंबर को होगा। मतगणना 14 सितंबर को होगी। पहले चरण में 162 निकायों के 5393 वार्डों में मतदान हुआ। 76 प्रतिशत से ज्यादा का मतदान बताता है कि लोगों ने स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अपने वोट का उपयोग किया है। निकाय चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढऩे का एक प्रमुख कारण निर्दलीय उम्मीदवारों की ताकत भी रही। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के साथ साथ निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगाया है। घर घर से मतदाताओं को निकालने में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मेहनत की। निर्दलीय उम्मीदवारों की मेहनत के कारण ही अब भाजपा और कांग्रेस के समक्ष निकाय प्रमुखों को बनाने में चुनौती हो गई है। माना जा रहा है कि अनेक निकायों में कांग्रेस और भाजपा को अपना प्रमुख बनवाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की मदद लेनी पड़ेगी। बाड़ाबंदी: जिन 162 निकायों में 9 सितंबर को चुनाव हो गया है, वहां के भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की बाड़ाबंदी शुरू हो गई है। यानी दोनों ही दल अपने अपने उममीदवारों को सुरक्षित स्थान पर एकत्रित कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उम्मीदवारों की पार्टी की रीति-नीति का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कांग्रेस के भी अपने तर्क है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या दोनों दलों के अपने उम्मीदवारों की वफादारी पर भरोसा नहीं है। यदि उम्मीदवार अपनी पार्टी के प्रति वफादार होते तो दोनों दलों को उम्मीदवारों की बाड़ाबंदी नहीं करनी पड़ती। दोनों ही दलों को आशंका है कि जीतने वाला उम्मीदवार दूसरे दल में जा सकता है। 14 सितंबर को जो उम्मीदवार चुनाव जीत गए उन्हें निकाय प्रमुख के चुनाव तक अति सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा और जो उम्मदवार हार गए उन्हें 14 सितंबर को ही बाड़ाबंदी से मुक्त कर दिया जाएगा। यहां यह खास तौर से उल्लेखनीय है कि दोनों दलों ने अपने अधिकृत प्रत्याशी को नामांकन के समय सिबंल भी नहीं दिया था। उम्मीदवारों के सिबंल सीधे निर्वाचन अधिकारी को जमा कराए गए। कांग्रेस और भाजपा भले ही यह दावा करे कि उनके कार्यकर्ता संगठन के प्रति वफादारी पर भरोसा नहीं है। निर्दलीयों के हाथ में चाबी: माना जा रहा है कि अनेक निकायों में प्रमुख बनाने की चाबदी निर्दलीयों के पास रहेगी। यानी निर्दलीय पार्षद के मत से ही भाजपा या कांग्रेस का प्रमुख बनेगा। यही वजह है कि जिन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार जीतने की स्थिति में है, उन पर अभी से ही भाजपा और कांग्रेस ने नजर गढ़ा दी है। ऐसे में धनबल का उपयोग होने की संभावना भी बढ़ गई है। पार्टी में ऐसे नेता सक्रिय हो गए हैं जो निर्दलीय पार्षदों को किसी भी कीमत पर अपने साथ रख सकते हैं। देखना होगा कि 309 निकायों में से कितने निकायों में निर्दलीयों के दम पर भाजपा और कांग्रेस अपना बोर्ड बनवाती है।