Monday, 2 June 2025
सरकार आरएएस की मुख्य परीक्षा स्थगित कर सकती है, पर आरपीएससी में अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति नहीं करेगी। सरकारी नौकरियां देने वाली संस्था का भाजपा शासन में भी कांग्रेस जैसा हाल।
राजस्थान प्रशासनिक एवं अधीनस्थ सेवा की 2024 की मुख्य परीक्षा के अभ्यर्थियों को 2 जून को जयपुर में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात की। अभ्यर्थियों ने राठौड़ को बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग ने मुख्य परीक्षा 17 व 18 जून को प्रस्तावित कर रखी है, जबकि अभी आरएएस परीक्षा 2023 के इंटरव्यू ही चल रहे हैं। अभ्यर्थियों ने मांग की कि 2023 वाली परीक्षा के इंटरव्यू के परिणाम के बाद ही 2024 की मुख्य परीक्षा ली जाए। यदि 2023 वाली परीक्षा के इंटरव्यू के दौरान वर्ष 2024 की मुख्य परीक्षा ली जाती है तो अभ्यर्थियों के हित प्रभावित होंगे। ऐसे अनेक अभ्यर्थी है जो 2023 की परीक्षा के इंटरव्यू में भी और 2024 की मुख्य परीक्षा में भी शामिल है। सत्तारूढ़ भाजपा के अध्यक्ष राठौड़ ने अभ्यर्थियों की इस मांग पर सहमति जताई और स्पष्ट तौर पर कहा कि 2024 की मुख्य परीक्षा स्थगित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बात करेंगे। स्वाभाविक है कि जब सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष ने परीक्षा स्थगित करने पर सहमति जता दी है तो फिर सरकार के निर्देश के बाद आयोग भी आरएएस की मुख्य परीक्षा को स्थगित करने का निर्णय ले ही लेगा। मालूम हो कि आयोग ने प्रदेश के 21 हजार 539 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए पात्र घोषित किया है। इस परीक्षा के माध्यम से 1096 पदों पर नियुक्ति होगी। यानी सरकार आरएएस की मुख्य परीक्षा स्थगित कर सकती है। लेकिन आयोग में अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति नहीं करेगी। आयोग में अध्यक्ष सहित दो सदस्यों के पद पिछले छह माह से रिक्त पड़े हैं। यदि आयोग में अध्यक्ष और एक सदस्य की नियुक्ति हो जाती तो सरकार को आरएएस की मुख्य परीक्षा स्थगित नहीं करनी होती, क्यों कि अब तक वर्ष 2023 वाली आरएएस की परीक्षा के इंटरव्यू पूरे हो जाते। आयोग में इंटरव्यू 21 अप्रैल से शुरू हुए, लेकिन ये इंटरव्यू भी चरणबद्ध हो रहे हैं। चौथा चरण 4 से 13 जून तक चलेगा। एक चरण में मुश्किल से 200 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू हो पा रहे है। जबकि आयोग को 2 हजार 168 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू लेने हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2023 वर्ष वाली परीक्षा के इंटरव्यू कितने दिनों तक चलेंगे। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में आयोग में कार्यवाहक अध्यक्ष सहित पांच सदसय है, इनमें से दो सदस्य श्रीमती संगीता आर्य (पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य की पत्नी) तथा श्रीमती मंजू शर्मा (कवि कुमार विश्वास की पत्नी) को आरएएस के इंटरव्यूज प्रक्रिया से अभी तक अलग रखा गया है। आयोग की परीक्षाओं में हुई गड़बडिय़ों के मामले में इन दोनों महिला सदस्यों से जांच एजेंसी एसओजी ने पूछताछ की है। ऐसे में आरएएस के इंटरव्यू का दारोमदार सदस्य कर्नल केसरी सिंह राठौड़ और प्रोफेसर अयूब खान पर ही है। आयोग में सदस्यों के अभाव में आरएएस के इंटरव्यू के लिए एक बोर्ड ही बन पा रहा है। चयन बोर्ड का अध्यक्ष आयोग के सदस्य को बनाया जाता है। गत विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजस्थान लोक सेवा आयोग को बड़ा मुद्दा बनाया था, लेकिन भाजपा शासन में भी आयोग का हाल कांग्रेस जैसा ही है। मौजूदा समय में सभी पांच सदस्य कांग्रेस सरकार में नियुक्त हुए है। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बने डेढ़ वर्ष हो गया, लेकिन आयोग में रिक्त पदों पर भी नियुक्ति नहीं हो पाई है।
S.P.MITTAL BLOGGER (03-06-2025)
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आतंकवाद को मात देने के लिए जरूरी है चीन के सामान का बहिष्कार किया जाए। अजमेर में स्वदेशी जागरण मंच ने होली जलाई। आईएनआई सीईटी की मेरिट में अजमेर के भाविक चोटरानी की दसवीं रेंक। बड़ी उपलब्धि।
1 जून को अजमेर के बजरंगगढ़ चौराहे पर स्वदेशी जागरण मंच की ओर से चीन निर्मित सामान की होली जलाई गई। मंच से जुड़े कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि भविष्य में चीन के सामान का उपयोग नहीं करेंगे। इस अवसर पर मंच के चित्तोड़ प्रांत के संयोजक डॉ. संत कुमार ने कहा कि पाकिस्तान और आतंकवाद को मात देने के लिए जरूरी है कि चीन के सामान का बहिष्कार किया जाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत में जो आतंकवादी गतिविधियां कर रहा है उसके पीछे चीन का ही हाथ है। हाल ही में सैन्य संघर्ष में हमने देखा कि पाकिस्तान की मदद के लिए चीन खड़ा था। चीन ने अपने हाथियार भी पाकिस्तान को दिए हैं। ऐसे में जरूरी है कि भारत के नागरिक चीन के सामान का बहिष्कार करें। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि रोजमर्रा की सामाग्री भी चीन में बनकर भारत में आ रही है, यहां तक कि हेयरपिन, टूथपिक, लिपिस्टिक, पेन, कंघी, बटन, लाइटर, खुशबू वाले स्प्रे, खिलौने, क्राफ्ट आईटम, कागज के डिब्बे, चित्रकारी की किताबे जैसी वस्तुएं भी चीन से आ रही है। यही वजह है कि हमारा व्यापार घाटा सौ अरब डॉलर तक आ गया है। यानी हम चीन को जो सामान निर्यात करते हैं, उसके मुकाबले में सौ अरब डॉलर से ज्यादा का माल आयात करते हैं। भारत और चीन के बीच व्यापार की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सरकार तो अपने स्तर पर प्रतिबंध लगाएगी लेकिन हर भारतीय का यह दायित्व है कि वह चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है, जब हमें अपने ही देश में निर्मित सामग्री का उपयोग करना चाहिए। इस अवसर पर महानगर संयोजक योगेंद्र सिंह, विभाग सह संयोजक डॉ. कुलदीप सिंह, डिप्टी मेयर नीरज जैन आदि ने भी अपने विचार रखे।
चोटरानी को दसवीं रेंक:
राष्ट्रीय महत्व के मेडिकल संस्थानों के लिए एमडी, एमएस डीएम के छह वर्षीय कोर्स के लिए ली जाने वाली आईएनआई सीईटी परीक्षा में अजमेर के भाविक चोटरानी ने ऑल इंडिया में दसवीं रेंक हासिल की है। अजमेर के जेएलएन अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि भाविक चोटरानी सामान्य परिवार का सदस्य है, लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय स्तर की संयुक्त परीक्षा में दसवां स्थान हासिल कर अजमेर का मान बढ़ाया है। भाविक के मौसा दुर्गालाल जागवानी ने बताया कि दसवीं रेंक हासिल कर भाविक ने पूरे परिवार का मान बढ़ाया है। भाविक की इस उपलब्धि के लिए मोबाइल नंबर 9414281103 व 9929593989 पर बधाई दी जा सकती है।
S.P.MITTAL BLOGGER (02-06-2025)
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पाकिस्तान हमला करता इससे पहले भारत ने हमारे एयरबेस तबाह कर दिए। शहबाज शरीफ के इस बयान पर कांग्रेस भारतीय सेना की प्रशंसा क्यों नहीं करती? आखिर सीडीएस अनिल चौहान ने ऐसा क्या कह दिया, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के एक बयान को आधार बनाकर कांग्रेस अब ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े का कहना है कि सीडीएस चौहान के बयान के बाद हमें मोदी सरकार से सवाल पूछने हैं, इसलिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। यह बात अलग है कि सेना और मोदी सरकार को पाकिस्तान के मुकाबले में कमजोर साबित करने में कांग्रेस संसद के बाहर कोई कसर नहीं छोड़ रही है। सवाल यह भी है कि आखिर सिंगापुर में जनरल अनिल चौहान ने ऐसा क्या कह दिया कि जिसमें कांग्रेस को भारतीय सेना कमजोर नजर आती है। सिंगापुर में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में जनरल चौहान ने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान का यह दावा गलत है कि हाल ही के संघर्ष में भारत के 6 लड़ाकू विमान गिरा दिए गए। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं कि कितने विमान गिरे? सवाल यह है कि शुरुआती नुकसान के बाद हमने क्या सीखा। दुनिया ने देखा कि 8-9 व 10 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सौ किलोमीटर अंदर अनेक एयरबेस ध्वस्त कर दिए। सीडीएस अनिल चौहान के बयान में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसकी वजह से भारतीय सेना की कमजोरी नजर आती हो। खुद जनरल चौहान ने माना कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना का 15 प्रतिशत समय तो फर्जी खबरों से मुकाबले करने में गुजर गया। इतनी स्पष्टता के बाद भी कांग्रेस सेना और मोदी सरकार पर हमलावर है। जबकि इसके विपरीत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया है कि 8 व 9 मई की रात को जब पाकिस्तान की सेना भारत पर हमला करने वाली थी, तब इससे पहले ही भारतीय सेना ने हमारे रावलपिंडी और अन्य एयरबेस पर हमले कर दिए, जिसकी वजह से भारत को जवाब नहीं दिया जा सका। सवाल उठता है कि शहबाज शरीफ के बयान पर कांग्रेस अपनी सेना को शाबाशी क्यों नहीं देती? कांग्रेस भले ही राजनीतिक कारणों से मोदी सरकार की प्रशंसा न करे, लेकिन उसे सेना के शौर्य की तो प्रशंसा करनी ही चाहिए। जब चीन जैसा शक्तिशाली देश भी मान रहा है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर सटीक निशानेबाजी की है, तब कांग्रेस की रुचि यह जानने में है कि आखिर भारतीय सेना के कितने विमान नष्ट हुए। इससे कांग्रेस की देश विरोधी सोच को समझा जा सकता है।
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मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी को संभागीय आयुक्त के पद का चार्ज देकर सुधांश पंत ने राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में नायाब उदाहरण पेश किया है। आरपीएससी में पहले ही अध्यक्ष नहीं है और अब सचिव को भी पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग का आईजी बना दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दो दिन पहले ही सुधांश पंत की प्रशंसा कर चुके हैं।
31 मई को जयपुर में लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के जयंती समारोह में जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कामकाज की प्रशंसा कर रहे थे, तभी उन्होंने मुख्य सचिव सुधांश पंत की भी प्रशंसा की। नड्डा ने यह प्रदर्शित किया कि वह सुधांश पंत को व्यक्तिगत तौर पर जानते हैं। जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशंसा कर रहे हो, तो फिर सुधांश पंत के कामकाज करने के तरीके का अंदाजा लगाया जा सकता है। सुधांश पंत अपने कार्यकाल में जो फैसले कर रहे हैं वे प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में उदाहरण है। हाल ही में कार्मिक विभाग ने अजमेर के संभागीय आयुक्त पद का चार्ज राजस्थान राजस्व मंडल के अध्यक्ष हेमंत गेरा को सौंपा है। मंडल के अध्यक्ष का पद मुख्य सचिव के समकक्ष होता है। जो सीनियर आईएएस मुख्य सचिव नहीं बनता या बनने के इंतजार में होता है उसे राजस्व मंडल का अध्यक्ष बनाया जाता है। सुधांश पंत ने कई आईएएस की वरिष्ठता को लांघकर पहले हेमंत गेरा को राजस्व मंडल का अध्यक्ष बनाया और अब उन्हीं गेरा को अजमेर के संभागीय आयुक्त के पद का अतिरिक्त चार्ज भी दे दिया। ऐसा तब हुआ जब हेमंत गेरा के पास पहले से ही कर बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त चार्ज है। कर बोर्ड के अध्यक्ष के पद को भी मुख्य सचिव के समकक्ष माना जाता है। राजस्व मंडल के अध्यक्ष को संभागीय आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज देने पर प्रदेश भर की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा हो रही है। लेकिन सरकार के किसी भी मंत्री और सीनियर आईएएस में हिम्मत नहीं कि वह सुधांश पंत के फैसले पर सवाल उठाए। राजस्व मंडल के अध्यक्ष और संभागीय आयुक्त के पद के बीच रात और दिन का अंतर है। संभागीय आयुक्त का चार्ज लेने के साथ ही हेमंत गेरा राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रशासक भी बन जाएंगे। सरकार ने बोर्ड प्रशासक के पद पर अजमेर के संभागीय आयुक्त की पदेन नियुक्ति कर रखी है। यानी हेमंत गेरा के पास चार पदों का काम एक साथ हो जाएगा। यह तब होगा, जब खुद राजस्व मंडल सदस्यों की कमी से जूझ रहा है। मंडल में दस सदस्यों के पद रिक्त पड़े हैं। प्रशासनिक हलकों में सवाल पूछा जा रहा है कि हेमंत गेरा संभागीय आयुक्त राजस्व मुकदमों की सुनवाई भी करते हैं। अब यदि हेमंत गेरा संभागीय आयुक्त की हैसियत से किसी राजस्व मुकदमे का निस्तारण करते हैं तो भविष्य में उस मुकदमे की क्या स्थिति होगी? संभागीय आयुक्त के फैसले को राजस्व मंडल में ही चुनौती दी जाती है। यह सही है कि राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में हेमंत गेरा की छवि साफ सुथरी और मेहनती आईएएस की है, लेकिन सुधांश पंत के निर्णयों से खुद गेरा आश्चर्यचकित है, क्योंकि ब्यूरोक्रेसी के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब संभागीय आयुक्त के पद का चार्ज मुख्य सचिव के स्तर वाले राजस्व मंडल के अध्यक्ष को दिया गया हो। मालूम हो इससे पहले जब कभी संभागीय आयुक्त का पद रिक्त हुआ तो राजस्व मंडल के किसी सदस्य को चार्ज दिया गया। मालूम हो कि 31 मई को महेश चंद्र शर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद अजमेर के संभागीय आयुक्त का पद रिक्त हुआ है।
सचिव को आईजी का चार्ज:
सुधांश पंत के अधीन काम करने वाले कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार अजमेर स्थित राजस्थान लोक सेवा के सचिव रामनिवास मेहता को पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आईजी का पद का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। आयोग के सचिव को यह अतिरिक्त कार्यभारी तब सौंपा गया है, जब आयोग में पिछले छह माह से अध्यक्ष और एक सदस्य का पद रिक्त पड़ा है। अध्यक्ष के नहीं होने से आयोग का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यहां तक कि आरएएस के 21 सौ अभ्यर्थियों के इंटरव्यू के लिए सिर्फ एक चयन बोर्ड ही बन पाया है। यह बोर्ड भी टुकड़े टुकड़े में अभ्यर्थियों के साक्षात्कार ले रहा है। मौजूदा समय में आयोग में सचिव रामनिवास मेहता की महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है, लेकिन कार्मिक विभाग ने मेहता को ही पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग का आईजी बना दिया। आईजी का यह पद भी राज्य स्तरीय है। पंजीयन विभाग के प्रदेश भर के सब रजिस्टार आईजी के आधीन ही काम करते है। इस विभाग के महत्व का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अकेला पंजीयन विभाग 11 हजार करोड़ रुपए का राजस्व एकत्रित करता है।
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ओंकार सिंह लखावत की पत्नी रतन कंवर (78) का निधन। पैतृक गांव टहला में हुआ अंतिम संस्कार।
राज्यसभा के पूर्व सांसद और मौजूदा समय में राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत की पत्नी श्रीमती रतन कंवर (78) का 1 जून की रात को निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार नागौर के मेड़ता रोड के टहला गांव में 2 जून की सुबह किया गया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। लखावत के पुत्र और प्रसिद्ध वकील उमरदान लखावत ने बताया कि अगले 12 दिनों तक पैतृक गांव टहला में ही बैठक होगी। श्रीमती रतन कंवर के निधन पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और राज्य सरकार के मंत्रियों ने शोक व्यक्त किया है। श्रीमती रतन कंवर अपने पीछे दो पुत्री और एक पुत्र छोड़ गई है। पत्नी के निधन पर ओंकार सिंह लखावत ने भी गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि मेरे संघर्षपूर्ण जीवन में पत्नी ने एक साथी के तौर पर साथ दिया। उनकी सफलता के पीछे पत्नी का बड़ा योगदान रहा है। मोबाइल नंबर 9414281331 पर उनके पुत्र एडवोकेट उमरदान लखावत को संवेदनाएं व्यक्त की जा सकती है।
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