Monday, 29 September 2025

आखिर सोनम वांगचुक और मौलाना तौकीर रजा जैसे नेता लोकतांत्रिक व्यवस्था को क्यों चुनौती देते हैं?

भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है और आम जनता को अपने वोट से सरकार बदलने का अधिकार है। यदि कोई सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है तो पांच वर्ष बाद ऐसी सरकार को हटाया जा सकता है। ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं होती, लेकिन फिर भी पूरे देश ने देखा कि चीन की सीमा से सटे लद्दाख में जमकर हिंसा हुई। इस हिंसा में सरकारी संस्थानों को आग के हवाले कर दिया गया। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के बरेली में मुसलमानों के जुलूस में शामिल लोगों में जमकर पत्थरबाजी की जिससे अनेक पुलिस कर्मी बुरी तरह जख्मी हो गए। 25 और 26 सितंबर को हुई इन घटनाओं के पीछे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और मौलाना तौकीर रजा खान के उत्तेजित भाषण रहे। वांगचुक ने लद्दाख में और मौलाना रजा ने बरेली में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने वाले भाषण दिए। वांगचुक का कहना रहा कि यदि लद्दाख को राज्य का दर्जा नहीं दिया गया तो चीन का कब्जा हो जाएगा। वांगचुक की महत्वाकांक्षा किसी से भी छिपी नहीं है। लद्दाख के डीजीपी एसडी सिंह जामवाल का तो आरोप है कि वांगचुक के संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से है। हालांकि अब वांगचुक को गिरफ्तार कर राजस्थान की जोधपुर की सेंट्रल जेल में भेज दिया है, लेकिन सवाल उठता है कि जो हिंसा हुई उसका जिम्मेदार कौन होगा? वांगचुक को भी पता है कि लद्दाख एक सीमावर्ती क्षेत्र है। यहां विशेष परिस्थितियों में भारत की सीमा की रक्षा की जाती है। यदि वांगचुक अपने कुछ समर्थकों के साथ अशांति करेंगे तो चीन जैसे दुश्मन देश को फायदा होगा। क्या वांगचुक की मंशा लद्दाख पर चीन का कब्जा करवाने की है? अब समय आ गया है जब सोनम वांगचुक जैसे नेताओं को सबक सिखाया जाए। ऐसे नेता लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जहां तक मुस्लिम नेता मौलाना तौकीर रजा खान का सवाल है तो वे भी अपने समर्थकों के दम पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देते रहते हैं। बरेली में किसी भी जुलूस के निकलने पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया, लेकिन फिर भी तौकीर रजा ने धर्म की आड़ लेकर मुसलमानों को भड़काने का काम किया। तौकीर रजा के बयानों से प्रतीत होता है कि वह शासन प्रशासन को नहीं मानते हैं। उनका मकसद सिर्फ अपनी बात को मनवाना है। तौकीर रजा की भाषा भी एक मौलाना की नहीं हो सकती। लद्दाख के नेता सोनम वांगचुक की तरह तौकीर रजा भी महत्वाकांक्षी मुस्लिम नेता है। अच्छा हो कि यह दोनों नेता लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहकर अपनी बातों को रखे। यदि व्यवस्था को चुनौती दी जाएगी तो इससे देश का ही नुकसान होगा। जब भारत के चारों तरफ अशांति का माहौल है, तब देश के नेताओं के देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। S.P.MITTAL BLOGGER (28-09-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मां कामाख्या के दर्शन-आशीर्वाद: मेघालय और भूटान यात्रा-भाग 8 भूटान में भारतीय पर्यटकों से प्रतिदिन 12 सौ रुपए शुल्क वसूली। अन्य विदेशी पर्यटकों से प्रतिदिन सौ डॉलर शुल्क।

गुवाहाटी में मां कामाख्या के दर्शन और आशीर्वाद वाली यात्रा के दौरान में अपने साथियों के साथ 15 सितंबर को आकाश एयर लाइन से पश्चिम बंगाल के बागीदौरा एयरपोर्ट पर पहुंचा। इस एयरपोर्ट का संचालन भारतीय वायुसेना के द्वारा किया जाता है। चूंकि यह क्षेत्र बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए एयरपोर्ट पर विशेष सतर्कता बरती जाती है। एयरपोर्ट से हम भारत भूटान की सीमा पर पहुंचे। सीमा पर हम सभी के आवश्यक दस्तावेज देखे गए। कुद साथियों के पासपोर्ट तथा कुछ के पास मतदाता पहचान पत्र था। भूटान में भारतीय मतदाता पहचान पत्र के माध्यम से भी प्रवेश दे दिया जाता है। भूटान के कैम्प में हमारा अनुभव अच्छा नहीं रहा, क्योंकि हमारे दल की एक महिला सदस्य को प्रवेश देने से इंकार कर दिया। भूटान के अधिकारियों का कहना रहा कि मतदाता पहचान पत्र में ऑनलाइन सिस्टम में फोटो में बदलाव है। हालांकि हमारे पास और भी दस्तावेज थे, लेकिन अधिकारियों ने सहयोग नहीं किया। बाद में चाय पानी का मोटा खर्चा लेकर उसी मतदाता पहचान पत्र पर प्रवेश दे दिया गया। तब ऐसा लगा कि भूटान के राजतंत्र में भी भारत के लोकतंत्र की तरह भ्रष्टाचार व्याप्त है। जिस तरह भारत में बड़ी चालाकी से रिश्वत की राशि ली जाती है, उसी प्रकार भूटान के कैम्प में भी बड़ी चतुराई से चाय पानी के नाम पर मोटी राशि ली गई। चूंकि हमारी मजबूरी थी, इसलिए भूटान के अधिकारियों की बात को स्वीकार करना पड़ा। हमने रात्रि विश्राम भूटान सीमा के फुलसिलिंग के होटल पलाम में किया। भूटान के कानून के मुताबिक सीमा में प्रवेश लेने वाले पर्यटकों को परमिट भी लेना होता है। इस कानून के अंतर्गत हम सभी 13 सदस्यों 16 सितंबर को फुलसिलिंग में भूटान दूतावास पहुंचे और परमिट प्राप्त किया। यही पर हमने प्रत्येक सदस्य का प्रतिदिन का 12 सौ रुपया शुल्क भी जमा कराया। चूंकि हमें तीन दिन भूटान घूमना था, इसलिए प्रत्येक सदस्य के 36 सौ रुपए जमा कराए गए। यही पर हमें बताया गया कि भारत के अलावा अन्य विदेशी पर्यटकों से सौ डॉलर प्रतिदिन का शुल्क लिया जाता है। S.P.MITTAL BLOGGER (29-09-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

क्रिकेट के मैदान पर हुई भारत की जीत को कांग्रेस स्वीकार नहीं करेगी, क्योंकि टीम ने जीत वाली ट्रॉफी नहीं ली। यानी जीत का सबूत नहीं है। वहीं पीएम मोदी ने जीत को ऑपरेशन सिंदूर ही बताया है। कप्तान सूर्यकुमार यादव अपनी फीस की राशि सेना को देंगे।

28 सितंबर की रात को दुबई में एशिया कप में भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान पर पांच विकेट से जो जीत दर्ज की है, उसे भारत में कांग्रेस स्वीकार नहीं करेगी। भारतीय टीम ने भले ही क्रिकेट के मैदान पर पाकिस्तान की टीम को हरा दिया हो, लेकिन जीत के बाद भारतीय टीम के पास एशिया कप की ट्रॉफी नहीं है। असल में पाकिस्तान को हराने के बाद भारतीय टीम ने एशिया क्रिकेट परिषद और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नक़वी के हाथों से ट्रॉफी लेने से इंकार कर दिया था। ऐसे में नकवी ने जीत वाली ट्रॉफी को अपने कब्जे में ले यिला। कांग्रेस कह सकती है कि भारतीय टीम के पास जीत का सबूत नहीं है। यदि भारत की टीम जीतती तो ट्रॉफी होनी चाहिए थी। सब जानते हैं कि विगत दिनों युद्ध के मैदान में भी भारत ने पाकिस्तान को हराया था। तब इस युद्ध को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया था। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में हुए नुकसान के वीडियो भी जारी किए, लेकिन फिर भी कांग्रेस पार्टी और उसके नेता युद्ध में जीत के सबूत मांगते रहे। कांग्रेस की रुचि आज भी इस बात में है कि युद्ध में भारत को कितना नुकसान हुआ। जब कांग्रेस ऑपरेशन सिंदूर में ही भारत की जीत नहीं मान रही तो अब बगैर ट्रॉफी के एशिया कप में जीत कैसे स्वीकार करेगी? यह बात अलग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय टीम को जीत की बधाई देते हुए लिखा है कि खेल के मैदान पर ऑपरेशन सिंदूर..., नतीजा वही भारत जीत गया। यानी जिस प्रकार भारत ने युद्ध के मैदान में पाकिस्तान को हराया, उसी प्रकार खेल के मैदान पर भी भारत ने पाकिस्तान को हराया है। प्रधानमंत्री द्वारा क्रिकेट में जीत को भी ऑपरेशन सिंदूर से जोड़ने से साफ जाहिर है कि जिस प्रकार भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर विजय हासिल की, उसी प्रकार भारतीय क्रिकेट टीम ने भी पाकिस्तान पर जीत दर्ज की है। यह जीत पाकिस्तान के उन आतंकियों को भी जवाब है, जिन्होंने पहलगाम में 26 हिंदू पर्यटकें की हत्या की थी। कांग्रेस को अभी भी खेल के मैदान में भारत की जीत पच नहीं रही है, इसलिए कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने भारतीय टीम को बधाई तक नहीं दी है। फीस की राशि सेना को: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के हाथों से एशिया कप की ट्रॉफी लेने से इंकार करने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव ने घोषणा की है कि एशिया कप के मैचों की जो फीस की राशि मिलेगी उसे वे सेना को देंगे। कप्तान यादव शुरू से ही भारतीय सेना के साथ खड़े हैं। एशिया कप में ब पहली बार पाकिस्तान को हराया तब यादव ने कहा था कि यह जीत सेना के शौर्य को समर्पित है। मालूम हो कि एशिया कप में भारत ने पाकिस्तान के साथ तीन बार मैच खेला और तीनों बार ही पाकिस्तान को हराया। दारा का कार्टून: 28 सितंबर को दुबई में खेले गए भारत पाकिस्तान के क्रिकेट मैच पर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा का सटीक कार्टून मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER (28-09-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भाग-1 अजमेर में पहली बार 1941 में गंज में शुरू हुई संघ की शाखा। तब कार्यकर्ताओं को एकत्रित करना आसान नहीं था।

भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शुरुआत डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार ने नागपुर में 1925 में की थी। इसी के बाद देश भर में संघ का विस्तार हुआ। अब जब संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब देश भर में संघ की गतिविधियों का आकलन भी हो रहा है। इसके अंतर्गत अजमेर में भी संघ की गतिविधियों का संकलन किया गया है। संघ के पुराने स्वयं सेवकों और दिवंगत स्वयं सेवकों के परिजन से जो जानकारी जुटाई गई उसके अनुसार विश्वनाथ लिमये अजमेर में संघ के प्रथम प्रचारक के रूप में सामने आए हैं। यह वह समय था, जब अजमेर में आर्य समाज की गतिविधियां अच्छी थी। तब चांद करण शारदा आर्य समाज की गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। तभी डॉ. हेडगेवार ने एक पत्र चांदकरण शारदा को लिखा और विश्वनाथ लिमये के आवास आदि की व्यवस्था करवाने का आग्रह किया। डॉ. हेडगेवार के आग्रह पर शारदा ने लिमये के रहने और भोजन आदि की व्यवस्था की। इसके बाद लिमये ने जगह-जगह भ्रमण किया और संघ के स्वयंसेवकों को तलाशने का काम शुरू किया। तभी उन्होंने देखा कि अजमेर के गंज (कुत्ता शाला) के पास चंद्र कुंड के खुले मैदान पर कुछ बच्चे खेलते हैं। रोज आने वाले बच्चों से लिमेय ने मित्रता की। धीरे-धीरे बच्चों को स्वस्थ रहने के लिए खेलकूद सिखाने का काम किया। थोड़े ही दिनों में अनेक बच्चे नियमित आने लगे और तभी अजमेर के चंद्र कुंड में संघ की प्रथम शाखा की शुरुआत हुई। उस समय रामचरण (लालाजी), छगनलाल बंसल, किशन भैयाजी, शिवनारायण मेहरा (शिब्बन जी), द्वारका दास अग्रवाल (डीडी भाई), चिरंजीलाल गर्ग (वकील साहब), मोतीचंद बैरी, संतोष सिंह मेहता (वकील), प्यारेलाल गुप्ता आदि युवा संघ की शाखा में नियमित आते रहे। हालांकि अब जब संघ अपने सौ वर्ष पूरे कर रहा है, तब अजमेर में इन प्रथम स्वयं सेवकों में से कोई भी जीवित नहीं है। लेकिन आज अजमेर के हजारों स्वयं सेवकों को अपने प्रथम स्वयं सेवकों पर गर्व है कि अजमेर के अनेक प्रथम स्वयं सेवकों के परिवारों के सदस्य आज भी संघ की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। अजमेर में 1941 में संघ का कार्य तब शुरू हुआ, जब कार्यकर्ताओं को एकत्रित करना आसान नहीं था, लेकिन विश्वनाथ लिमये जैसे प्रचारक के मन में देश को आजाद कराने की ललक थी, इसलिए अकेले दम पर युवाओं का एक संगठन खड़ा किया जो बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में बदल गया। संघ के प्रथम स्वयं सेवक और बाद में संघ के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने वाले स्वयंसेवकों के बारे में आगे की किस्तों में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। S.P.MITTAL BLOGGER (29-09-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

भाजपा बोर्ड वाले अजमेर नगर निगम में अब मुख्यमंत्री को ही दखल देना होगा। पांचवें दिन भी नहीं हो सका घरों से कचरे का संग्रहण।

29 सितंबर को लगातार पांचवें दिन भी अजमेर शहर में घरों से कचरे का संग्रहण नहीं हो सका है। कचरा संग्रहण के ठेकेदारों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन ने ठेका कर्मी का भुगतान नहीं किया है। ठेकेदार की हड़ताल को खत्म करवाने के लिए 27 सितंबर को शहर के भाजपा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दखल दिया था, लेकिन देवनानी के दखल के बाद भी ठेकेदार ने कचरा संग्रहण का कार्य शुरू नहीं किया। असल में ठेकेदार को भाजपा के ही एक प्रभावशाली नेता का संरक्षण है, इसलिए ठेकेदार किसी की भी नहीं सुन रहा। ऐसे में अब अजमेर नगर निगम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ही दखल देना पड़ेगा। पांच दिन से शहर भर से कचरा एकत्रित नहीं होने से जगह जगह गंदगी के ढेर लग गए हैं। त्यौंहारी सीजन में जब घरों से भी कचरा ज्यादा निकल रहा है, तब कचरे का संग्रहण न होना लोगों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि नियमों के अनुरूप भुगतान किया गया है, लेकिन ठेकेदार अपनी मनमर्जी कर रहा है। इसे अधिकारियों की लाचारी ही कहा जाएगा कि प्रभावशाली नेता के संरक्षण के कारण ठेकेदार के खिलाफ बड़ी कार्यवाही नहीं हो रही है। चूंकि सफाई के ठेका कार्यों में जबरदस्त भ्रष्टाचार है, इसलिए इस मुद्दे पर कांग्रेस के पार्षद भी चुप हैं। पांच दिनों से कचरे का संग्रहण नहीं होने से सत्तारूढ़ भाजपा की छवि भी खराब हो रही है। भाजपा शहर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी खुद भी पार्षद है, लेकिन फिर भी संगठन स्तर पर हड़ताल को तुड़वाने का प्रयास नहीं हो रहा है। नगर निगम से लेकर केंद्र तक भाजपा का शासन है, लेकिन फिर भी एक ठेकेदार को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है। पांच दिनों से कचरा एकत्रित न होने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER (29-09-2025) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511