Monday, 28 December 2015

जगतगुरु रामदयाल जी महाराज की प्रशंसा ने कर दिया भावविभोर।



अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक नगरी अजमेर में 51 अरब रामनाम मंत्रों की परिक्रमा का आयोजन हो रहा है। 27 दिसम्बर को इस आयोजन में अखिल भारतीय रामस्नेही सम्प्रदाय के महामंडलेश्वर जगतगुरु रामदयाल जी महाराज को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया। एक पत्रकार के तौर पर रामदयाल जी महाराज ने मुझे सम्मानित कर आशीर्वाद दिया। रामदयाल जी से मैं कोई 15 वर्ष बाद मिला था। मुझे देखते ही महाराज ने आत्मियता के साथ पूछा-मित्तलजी कैसे हो। मैंने कहा बस आपका आशीर्वाद बना रहे। मंच पर यह मुलाकात मुश्किल से दो मिनट की रही होगी। लेकिन जब महाराज ने अपने प्रवचनों में 15 वर्ष पूर्व मेरे साथ रहे संबंधों का सार्वजनिक बयान किया तो मेरी आंखों में आसूं आ गए। मुझे भी इस बात का आभास नहीं था कि 15 वर्ष पूर्व के संबंधों में जगतगुरु जैसे महाराज याद रखेंगे। महाराज ने कहा कि 15 वर्ष पूर्व जब मैंने धार्मिक नगरी पुष्कर में चातुर्मास किया था, तब मित्तल जी ने अपने लोकल न्यूज चैनल अब तक में मेरे प्रवचनों को प्रतिदिन प्रसारित किया। जिस आत्मियता के साथ रामदयाल जी ने मेरे बारे में कहा उससे मेरी आंखों में आसूं तो थे ही साथ ही इस बात का भी एक बार फिर अहसास हुआ कि पूर्व में किए गए सद्कार्यों का कभी न कभी फल तो मिलता ही है। मेरे लिए इससे बड़े सम्मान की और क्या बात हो सकती थी कि जब 51 अरब राम नाम के परिक्रमा समारोह में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो तब जगतगुरु के पद पर विराजमान कोईसंत अपने संबंधों का उल्लेख करें। मुझे भी याद आया कि दैनिक भास्कर के मुख्य संवाददाता की नौकरी छोडऩे के बाद जब मैंने वर्ष 2001 में उत्तर भारत का पहला केबल न्यूज चैनल अजमेर में शुरू किया था, तब रामदयाल जी महाराज ने अपना चातुर्मास पुष्कर में किया। तब मैंने ही महाराज के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि हमारा वीडियोग्राफर प्रतिदिन प्रवचनों की रिकॉर्डिंग करेगा और फिर प्रवचनों का प्रसारण किया जाएगा। चार माह तक जब मेरे अजमेर अब तक न्यूज चैनल पर महाराज के प्रवचन प्रसारित हुए तो चैनल को भी लोकप्रियता मिली। 

(एस.पी. मित्तल)
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