Wednesday, 11 January 2023

विधायिका में न्यायपालिका को हस्तक्षेप करने का अधिकार तो सांसद और विधायकों का आचरण ही देता है।लोकतंत्र की आड़ में जब बिकाऊ और दागी जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे तो विधायिका का यही हश्र होगा।जयपुर में विधायिका का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू।

11 जनवरी को राजस्थान के जयपुर में लोकतंत्र के सबसे मजबूत पिलर विधायिका का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। इस मौके पर राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के साथ साथ देश की अधिकांश विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव मौजूद रहे। ऐसे सम्मेलन इससे पहले भी 82 बार हो चुके हैं। इस बार भी सम्मेलन का मुख्य फोकस लोकतंत्र के तीनों पिलरों में से विधायिका को सबसे मजबूत दिखाना है। लोकसभा अध्यक्ष और विधानसभाओं के अध्यक्षों का यह पसंद नहीं है कि उनके फैसलों पर न्याय पालिका रोक लगाए या फिर कोई प्रतिकूल टिप्पणी करें। अध्यक्षों का तर्क है कि विधायिका जनता के प्रति जवाबदेह होती है और लोकतंत्र में जनता ही मालिक है। अध्यक्षों का तर्क अपनी जगह है, लेकिन सवाल उठता है कि विधायिका के कार्य क्षेत्र में न्यायपालिका यानी अदालतों को हस्तक्षेप का अधिकार कौन देता है? क्या कभी विधायिका ने अपने सांसद और विधायकों के आचरण पर विचार विमर्श किया है? विधानसभाओं में अध्यक्ष अपनी राजनीतिक विचारधारा के अनुरूप किस प्रकार निर्णय लेते हैं, यह पूरा देश देखता है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा का सभापति बनने पर जगदीप धनखड़ कुछ भी उपदेश दें लेकिन पश्चिम बंगाल का राज्यपाल रहते हुए उनके भाषणों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे पत्रों को अब पढ़ा जाए तो विधायिका की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। एक राज्यपाल के रूप में धनखड़ को पश्चिम बंगाल की विधायिका ने कितना अपमानित किया, यह धनखड़ ही जानते हैं। तब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के विधायक कैसा आचरण करते थे, यह धनखड़ से ही पूछा जाना चाहिए। विधायिका अपने अधिकारों की दुहाई तो देती है, लेकिन तब चुप हो जाती है, जब महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक अलग दल बना कर उद्धव ठाकरे की सरकार को गिरा देते हैं। इतना ही नहीं राजस्थान में सभी 6 बसपा विधायकों को रातों रात कांग्रेस का विधायक मान लिया जाता है। 91 विधायकों के इस्तीफा के मामला तीन माह तक विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित रहे, तब भी विधायिका चाहती है कि न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं करे। विधायिका में कैसे कैसे जनप्रतिनिधि हैं, यह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पूछा जाना चाहिए। गहलोत ने अपनी ही कांग्रेस पार्टी के विधायकों पर 10-10 करोड़ रुपए में बिक जाने का आरोप लगाया है। विधानसभाओं के अध्यक्ष अपने अधिकारों को लेकर उपदेश तो बहुत दे रहे हैं, लेकिन अपने विधायकों के आचरण पर चुप रहते हैं। आज विधायिका को मजबूत करने से जरूरी है कि सांसद और विधायकों का आचरण सुधारा जाए। माना तो यही जाता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही सांसद और विधायक चुने जाते हैं, लेकिन हम सब देखते हैं कि चुनाव में जाति धर्म और धन बल का कितना प्रभाव होता है। जिस जाति के वोट सबसे ज्यादा होते हैं, उसी जाति का व्यक्ति सांसद विधायक बनता है। जाति धर्म के आधार पर एक ही क्षेत्र से पीढ़ी दर पीढ़ी सांसद विधायक चुने जाते रहते हैं जहां तक न्यायपालिका का सवाल है तो विधायिका जो कानून बनाती है उसी के अनुरूप फैसले होते हैं। विधायिका खुद अपने कानून तो तोड़ती है, तब न्यायपालिका हस्तक्षेप करती है। विधानसभा अध्यक्ष माने या नहीं लेकिन उनकी निष्ठा उनके राजनीतिक दल के साथ ही होती है। और जब विधानसभा अध्यक्ष खुद की पार्टी का संरक्षण करता है, तब न्यायपालिका को दखल देना ही पड़ता है। 75 साल पहले संविधान बनाने वालों ने आज के सांसद और विधायकों की कल्पना नहीं की होगी। 

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गंगरार (चित्तौड़) के एसडीएम रामसुख गुर्जर ने हनुमान जी पर लिखी चमत्कारिक पुस्तक।पुस्तक की आय का 50 प्रतिशत गौशालाओं पर खर्च होगा।एक पेड़ राष्ट्र के नाम अभियान में अजमेर में एक लाख पेड़ लगाए जाएंगे।

ऐसा कम ही देखने को मिलता है जब प्रशासनिक सेवा में रहते हुए कोई अधिकारी भक्ति भाव में लीन हो। कार्यकुशलता में सफल रहने वाले ऐसे अधिकारी अपनी सफलता का श्रेय भी अपने देवता को ही देते हैं। राजस्थान में ऐसे प्रशासनिक अधिकारी हैं, गंगरार (चित्तौड़) के एसडीएम रामसुख गुर्जर। गुर्जर सालासर बालाजी के परम भक्त  हैं। सालासर बालाजी की प्रेरणा से ही वर्ष 2012 में उन्होंने हनुमान वंदना पुस्तक लिखी थी। इस पुस्तक में हनुमान जी पूजा अर्चना की पद्धति से लेकर विभिन्न आरतियां लिखी गई हैं। गुर्जर का मानना है कि जिस भी व्यक्ति ने यह पुस्तक पढ़ी और अपने घर अथवा व्यावसायिक संस्थान में रखी उसके जीवन में अनेक चमत्कार हुए। ऐसे चमत्कारों को देखते हुए ही गुर्जर ने पुस्तक को नए सिरे से लिखा और इसमें संबंधित व्यक्तियों के अनुभव भी शामिल किए। गुर्जर का मानना है कि अब यह पुस्तक और अनुकरणीय व लाभकारी हो गई है। नए स्वरूप वाली पुस्तक हनुमान वंदना का विमोचन 12 जनवरी को चित्रकूट धाम के पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य महाराज करेंगे। इस अवसर पर सालासर बालाजी के पुजारी परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहेंगे। सेना के कोटे में प्रशासनिक अधिकारी बने रामसुख गुर्जर का मानना है कि उनकी सफलता हनुमान जी के आशीर्वाद से हुई है। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए जब विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता, तब भी बालाजी का ही सहयोग रहा। नए स्वरूप में प्रकाशित पुस्तक की कीमत 100 रुपए रखी गई है। लेकिन प्राप्त आय की 50 प्रतिशत राशि गौशालाओं पर खर्च की जाएगी। शेष 50 प्रतिशत राशि से और पुस्तकें छपवाई जाएगी। गुर्जर ने कहा कि पुस्तकों की बिक्री से प्राप्त राशि में से एक रुपया भी स्वयं के लिए खर्च नहीं होगा। उन्होंने बताया कि जब वे रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं तो पहले स्वयं रक्तदान करते हैं। आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए वे हमेशा तत्पर रहते है। मोबाइल नंबर 9414354751 पर एसडीएम रामसुख गुर्जर से हनुमान वंदना पुस्तक के बारे में और अधिक जानकारी ली जा सकती है।
 
एक लाख पेड़ लगेंगे:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से देश भर में पर्यावरण संरक्षण के तहत एक पेड़ राष्ट्र के नाम अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का अजमेर में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता निरंजन शर्मा को प्रभारी बनाया गया है। शर्मा ने बताया कि एक पेड़ राष्ट्र के नाम अभियान में अजमेर महानगर में एक लाख पेड़ लगाए जाएंगे। इसके लिए 10 हजार परिवारों से संपर्क किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक परिवार में 10 पेड़ों के लिए रोपण की व्यवस्था की जाएगी। यही परिवार आसपास के परिवारों में पेड़ लगाने का काम करेंगे। यह अभियान आगामी एक वर्ष तक पूरे देश में चलेगा। शर्मा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण की सख्त आवश्यकता हो गई है। पेड़ लगाकर हम पर्यावरण का संरक्षण बहुत आसानी से कर सकते हैं, हम सबने देखा है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन का कितना महत्व था। हम यदि पेड़ लगाते हैं तो पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता रहता है। उन्होंने कहा कि बदलते माहौल में अब पेड़ लगाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। लेकिन इसके प्रति और जागरूकता की आवश्यकता है। एक पेड़ राष्ट्र के नाम अभियान से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मोबाइल नंबर 9828171560 पर निरंजन शर्मा से अभियान के बारे में और अधिक जानकारी ली जा सकती है। 

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Tuesday, 10 January 2023

इस बार ख्वाजा उर्स में दरगाह के अंदर हरी और सफेद पगड़ी वाले बरेलवी मौलवियों ने तकरीर या नारेबाजी की तो हालात बिगड़ने की आशंका।दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा तथा सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी किया।ख्वाजा साहब की दरगाह को सभी धर्मों के लोगों की आस्था का केंद्र बताया।

हिजरी संवत के रजब माह का चांद दिखने पर इस बार ख्वाजा साहब का 6 दिवसीय सालाना उर्स 22 या 23 जनवरी से शुरू होगा। इससे पहले 18 जनवरी को उर्स का झंडा दरगाह के बुलंद दरवाजे पर चढ़ जाएगा। ख्वाजा साहब के उर्स के दौरान मुस्लिम विद्वानों और धर्मगुरुओं के तकरीर की परंपरा रही है। ऐसी धार्मिक तकरीर दरगाह के अंदर ही अकबरी और शाहजहानी मस्जिदों में होती है। इन तकरीरों में बरेलवी के मौलाना, मौलवी और बरेलवी विचारधारा के विद्वान भी भाग लेते हैं। लेकिन इस बार दरगाह के खादिमों की प्रतिनिधि संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने बरेलवी मौलवियों की तकरीर पर एतराज जता दिया है। ख्वाजा साहब की दरगाह में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर नाजिम नियुक्त होते हैं। चिश्ती ने मौजूदा नाजिम समी अहमद को एक पत्र लिख कर हरी और सफेद पगड़ी बांधने वाले बरेली मौलवियों की तरीर पर रोक लगाने की मांग की है। चिश्ती ने बरेलवी विचारधारा की धार्मिक सामग्री के वितरण पर भी रोक लगाने की मांग की है। पत्र लिखने के साथ साथ सरवर चिश्ती ने एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया है। इस वीडियो में कहा है कि ख्वाजा साहब की दरगाह सभी धर्मों को मानने वाले लोगों की आस्था का केंद्र है। दरगाह में पिछले आठ सौ सालों से रसूल और नबी की शान में सलाम पढ़े जाते हैं। लेकिन जब कुछ लोग अपनी विचारधारा के अनुरूप तकरीर और अन्य सलाम पढ़ते हैं तो यह दरगाह की परंपराओं के विपरीत होता है। कई बार इससे तनावपूर्ण हालात भी उत्पन्न हो जाते हैं। चिश्ती ने कहा कि जब हम (खादिम) इसका विरोध करते हैं तो हमारे ही खिलाफ फतवे जारी होते हैं। जबकि ऐसी विचारधारा के लोग अपने अनुयायियों को दरगाह नहीं जाने की हिदायत देते हैं। यहां तक कि हमें काफिर तक कहा जाता है। चिश्ती ने कहा कि उर्स के दौरान सुकून बना रहे इसके लिए जरूरी है कि बरेलवी विचारधारा के अनुरूप होने वाली धार्मिक तकरीरों को रोका जाए। दरगाह के खादिमों ने भी बरेलवी तकरीरों पर रोक लगाने की मांग की है। बरेलवी के मौलवियों की तकरीरों और नारेबाजी पर दरगाह में पहले भी एतराज जताया गया है, लेकिन यह पहला अवसर है, जब खादिमों की प्रतिनिधि संस्था ने खुला विरोध किया है। अजमेर प्रशासन के लिए यह चिंता की बात है कि उर्स में बड़ी संख्या में बरेलवी विचारधारा के मुसलमान भी आते हैं। लाखों जायरीन की भीड़ में बरेलवी विचारधारा को मानने वालों की पहचान करना आसान नहीं होगा। यह सही है कि दरगाह के अंदर प्रशासनिक और सुरक्षा के इंतजाम केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली दरगाह कमेटी और नाजिम करते हैं, लेकिन दरगाह में धार्मिक रस्तें खादिम समुदाय द्वारा ही की जाती है। खादिम ही आने वाले जायरीन को जियारत करवाते हैं। इस मुद्दे पर यदि प्रशासन और दरगाह कमेटी ने सतर्कता नहीं बरती तो उर्स में हालात बिगड़ भी सकते हैं। सूफी और बरेलवी विचारधारा में काफी अंतर है। बरेलवी मौलवियों के संबंध में सरवर चिश्ती द्वारा जारी वीडियो को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। 

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73वें जन्मदिन के मौके पर चुनौतियां भी कम नहीं है, भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी के सामने।केकड़ी में पूर्व पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल का भी जन्मदिन पर शक्ति प्रदर्शन।

राजस्थान में भाजपा के चर्चित विधायक वासुदेव देवनानी 11 जनवरी को अपना 73वां जन्मदिन धूमधाम से मना रहे हैं। देवनानी लगातार चार बार से अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत रहे हैं। देवनानी ने 2003 से 2018 तक हर परिस्थितियों में चुनाव जीता है। लेकिन इस बार देवनानी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं है। ऐसी चुनौतियों को देखते हुए ही देवनानी ने इस जन्मदिन के अवसर पर सिंधी समाज की धार्मिक परंपरा के अनुरूप बहिराणा साहिब का आयोजन भी 9 जनवरी को फॉयसागर रोड स्थित हंस पैराडाइज समारोह स्थल पर किया है। इस समारोह में सिंधी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। अजमेर उत्तर क्षेत्र को सिंधी बाहुल्य माना जाता है। इसीलिए देवनानी की दावेदारी मजबूत मानी जाती है। 10 माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भी पांचवीं बार देवनानी ने अपनी दावेदारी जता दी है। भाजपा की राजनीति में देवनानी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संरक्षण भी माना जाता है, इसलिए देवनानी के समर्थकों को लगता है कि पांचवीं बार भी भाजपा का टिकट तो मिल ही जाएगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि देवनानी फुल टाइम पॉलिटिशियन हैं, इसलिए पॉलिटिक्स करने का कोई मुद्दा नहीं छोड़ते हैं। अपने क्षेत्र से लेकर प्रदेश स्तर तक देवनानी सक्रिय रहते है। लेकिन इस बार देवनानी को भाजपा में ही चुनौती मिल रही है। कोई एक दर्जन भाजपा नेता देवनानी के सामने दावेदारी जता रहे हैं। ऐसे आंकड़े भी दिए जा रहे हैं कि जिसमें उत्तर क्षेत्र सिंधी मतदाताओं की संख्या को कम बताया जा रहा है। यह बात अलग है कि कांग्रेस ने गत तीन बार से गैर सिंधी को उम्मीदवार बनाया और तीनों ही बार हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की लगातार हार से भी देवनानी के हौसले बुलंद रहते हैं। पार्टी के अंदर प्रतिद्वंदी चाहे जितनी भाग दौड़ कर लें, लेकिन देवनानी अपने टिकट के प्रति आश्वस्त हैं। पांचवीं बार के टिकट में देवनानी अपनी उम्र को भी बाधा नहीं मानते हैं, क्योंकि गुलाबचंद कटारिया, कैलाश मेघवाल जैसे 80 के पार नेताओं के टिकट भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी नहीं काट सकता है। वैसे भी देवनानी भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की टीम के प्रमुख सदस्य हैं। पूनिया के साथ देवनानी भी प्रदेश स्तर पर सक्रिय हैं। 73वें जन्मदिन पर 11 जनवरी को फॉयसागर रोड स्थित आवास पर देवनानी ने दोपहर को तीन बजे सुंदर कांड का पाठ रखा है तथा फिर अपने विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया है। समर्थकों ने संपूर्ण उत्तर विधानसभा क्षेत्र में देवनानी के जन्मदिन के बैनर, फ्लैक्स लगाए हैं। मोबाइल नंबर 9414155744 पर देवनानी को जन्मदिन की बधाई दी जा सकती है।
 
केकड़ी में मित्तल का भी शक्ति प्रदर्शन:
अजमेर जिले के केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में भी पूर्व पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल भी 11 जनवरी को अपने जन्मदिन पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। केकड़ी से भाजपा उम्मीदवार बनने के लिए अनिल मित्तल पिछले दो वर्ष से पूरे विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। एक वर्ष पहले मित्तल तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए 51 लाख रुपए की सहायता राशि दी। हालांकि कांग्रेस शासन में अनिल मित्तल को प्रताडि़त भी बहुत किया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। मित्तल अभी भी अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस और कांग्रेस के ताकतवर विधायक रघु शर्मा के सामने मोर्चा खोले बैठे हैं। मित्तल को अब सहानुभूति का लाभ भी मिल रहा है। 11 जनवरी को जन्मदिन के अवसर पर मित्तल परिवार की ओर से केकड़ी क्षेत्र में अस्पतालों में फल और गौशाला में हरा चारा वितरण किया जाएगा। मंदिरों में पूजा अर्चना के बाद मित्तल शहर भर में जनआशीर्वाद यात्रा भी निकालेंगे तथा दोपहर दो बजे केकड़ी में राजपुरा रोड स्थित आदिनाथ वाटिका में सामूहिक भोज भी होगा। मोबाइल नंबर 9928021482 पर अनिल मित्तल को जन्मदिन की बधाई दी जा सकती है। 

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Sunday, 8 January 2023

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के मालिकाना हक वाली रिलायंस जियो की 5जी सेवा राजस्थान के लिए लॉन्च की।अब अशोक गहलोत के लिए सिर्फ नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करना शेष है।सवाल-तो फिर राहुल गांधी अंबानी-अडानी को देश लूटने वाला क्यों बताते हैं?

7 जनवरी को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रिलायंस जियो की 5जी इंटरनेट सेवा अपने प्रदेश में लॉन्च की। इस मौके पर हुए समारोह में गहलोत ने रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी उनके पुत्र आकाश अबंानी और 5जी के राजस्थान हैड उमेश भंडारी की भी प्रशंसा की। गहलोत ने माना कि इंटरनेट की 5जी सर्विस से कम्प्यूटर क्रांति और तेज होगी तथा रोजगार भी बढ़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि रिलायंस जियो की सेवा जल्द ही राजस्थान भर में मिलेगी। कोई मुख्यमंत्री किसी उद्योगपति और उनके कार्य की प्रशंसा करता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है, क्योंकि प्रदेश के विकास भी निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उद्योगपति और बड़े कारोबारी भी चाहते हैं कि संबंधित प्रदेश के मुख्यमंत्री का संरक्षण मिलता रहे। राजस्थान में सीएम गहलोत के संरक्षण के कारण रिलायंस जियो के 5जी वाले टावर शहरों के डिवाइडरों के साथ साथ सार्वजनिक स्थलों पर भी धड़ल्ले से लगे हैं। इन टावरों की वजह से ही लोगों को इंटरनेट की हाई स्पीड मिलेगी। हालांकि राजस्थान में 5जी सेवा का लाइसेंस एयरटेल को भी मिला है, लेकिन सर्विस लॉन्च करने में रिलायंस का जियो आगे निकल गया है। स्वाभाविक है कि इसका फायदा आर्थिक रूप से मुकेश अंबानी को मिलेगा। अब राजस्थान के इंटरनेट उपभोक्ता जियो से जुड़ जाएंगे। इंटरनेट कितना जरूरी है यह सब जानते हैं। युवा पीढ़ी के लिए तो भोजन से ज्यादा जरूरी इंटरनेट है। सीएम गहलोत ने अच्छा किया कि जियो की 5जीं सेवा को लॉन्च किया, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर अशोक गहलोत के नेता राहुल गांधी मुकेश अंबानी को देश लूटने वाला उद्योगपति क्यों बताते हैं? राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा में भी अंबानी और गौतम अडानी पर तीखे हमले करते हैं। सवाल यह भी है कि यदि अडानी-अंबानी देश लूटने वाले हैं तो फिर कांग्रेस शासित राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इन्हीं उद्योगपतियों पर इतने मेहरबानी क्यों हैं? सब जानते हैं कि अडानी समूह पर तो गहलोत जबर्दस्त मेहरबान हैं। सोलर पार्क के लिए रियायती दर पर भूमि देने के साथ साथ बिजली दर की अंतर राशि का भुगतान अडानी की कंपनी को करने के लिए उपभोक्ताओं से वसूली की जा रही है। पिछले दिनों गहलोत सरकार द्वारा आयोजित उद्योगपतियों के सम्मेलन में गौतम अडानी खास तौर से उपस्थित हुए और मंच पर सीएम गहलोत के साथ बैठे। बड़ी अजीब बात है कि अशोक गहलोत अपने प्रदेश के विकास की दुहाई देकर अडानी-अंबानी की औद्योगिक कार्य की प्रशंसा करते हैं, वहीं उनके महबूब नेता राहुल गांधी इन दोनों उद्योगपतियों को देश लूटने वाला बताते हैं। राहुल गांधी कभी भी अशोक गहलोत से यह नहीं पूछते कि राजस्थान में इन लूटरे उद्योगपतियों को सरकारी संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तो आरोप लगाते हैं कि देश के प्राकृतिक संसाधन अंबानी और अडानी को बेचे जा रहे हैं,लेकिन वहीं राहुल गांधी राजस्थान में अशोक गहलोत के मुद्दे पर चुप रहते हैं। आखिर इसे किस का दोहरा चरित्र माना जाए? क्या यह राहुल गांधी से मोदी की आलोचना का एक मुद्दा छीनना नहीं है? देखा जाए तो अब अशोक गहलोत के लिए सिर्फ नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करना शेष रह गया है। वैसे गत 25 सितंबर को गहलोत ने गांधी परिवार को खुली चुनौती दे दी। कांग्रेस के 91 विधायकों के इस्तीफे का मामला अभी भी विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के समक्ष लंबित है। ये इस्तीफे अशोक गहलोत को ही मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए दिए गए हैं। यानी राजस्थान में कांग्रेस की सरकार अशोक गहलोत के दम पर ही चल रही है।

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