सरकारी विज्ञापनों में केन्द्रीय मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों के फोटो को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई को जो महत्त्वपूर्ण फैसला दिया है, उसे देश के राजनेता पलट देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विज्ञापनों में महात्मा गांधी, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश के ही फोटो प्रकाशित करने की छूट दी है। एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंत्रियों और राज्यपालों की फोटो नहीं छपने चाहिए। स्वाभाविक है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजनेताओं को रास नहीं आएगा। फैसले के तुरंत बंाद से ही दिग्विजय सिंह और मायावती जैसे नेताओं की प्रतिकूल टिप्पणियां भी सामने आ गई है। सरकार चाहे कांग्रेस की हो अथवा भाजपा की। सभी राजनीतिक दलों की सरकार अपने नेताओं के फोटो सरकारी विज्ञापनों में छपवाते ही हंै। मंत्रियों के ही नहीं बल्कि पार्टी के पदाधिकारियों के फोटो भी प्रकाशित होते हैं। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि विभिन्न मंत्रालयों के विज्ञापनों में भी नेताओं के फोटो छापते है। इतना ही नहीं अब तो ग्राम पंचायतें भी नेताओं के फोटो प्रकाशित करवाती है। वार्ड पंच से लेकर क्षेत्र के विधायक तक फोटो छापते हैं। विज्ञापन में सूचना का स्थान तो कम होता है, जबकि फोटो ज्यादा स्थान घेरती है। कई नेता तो अपनी पत्नी के पद का दुरुपयोग कर अपना फोटो प्रकाशित करवाते हैं। जो ग्राम पंचायत घाटे में चलती है, उसका सरपंच भी अपने प्रधान और विधायक को खुश करने के लिए बड़े-बड़े फोटो प्रकाशित करवाता है। यही वजह है कि फोटो छाप नेता अब खुलकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करेंगे। ऐसे नेता अखबार में फोटो के बिना तो मर ही जाएंगे। यदि किसी नेता का फोटो अखबार में न छपे तो उसका पूरा दिन ही खराब हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध नेताओं ने जो प्रतिक्रिया दिखाई है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि संसद में कोई प्रस्ताव लाया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसा है, जैसे किसी मछली को पानी से बाहर निकाल कर दम तोडऩे के लिए छोड़ दिया जाए।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Wednesday, 13 May 2015
नेता पलट देंगे सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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