Thursday, 21 May 2015

क्यों लाचार रहे मेयर कमल बाकोलिया


दैनिक भास्कर के 21 मई के अजमेर संस्करण में मेयर कमल बाकोलिया का एक इंटरव्यू छपा है। इस इंटरव्यू में बाकोलिया ने बड़ी मासूमियत के साथ कहा कि मेरे कार्यकाल में शहर में जो भी अवैध निर्माण हुए, उसके लिए मैं जिम्ममेदार नहीं हंू। मैंने तो समय-समय पर निगम के सीईओ को अवैध निर्माणों के बारे में पत्र लिखे, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की। यानि मैं तो दूध का धुला हंू और सीईओ व निगम के अधिकारी कोयले की खान में डूबे हुए हैं। मेयर का यह बयान कितना सही है, इसकी सच्चाई वे जानते हैं, जिन्होंने अवैध निर्माण किए हैं। यदि अवैध निर्माणकर्ताओं से उनके माता-पिता की सौगंध का वास्ता देकर सच कहलवाया जाए तो मेयर के बयान की भी सच्चाई सामने आ सकती है। इतना ही नहीं जो लोग अतिक्रमणकारियों और कोयले की खान में मुंह काला करने वाले के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे, उनका भी आज कहना है कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है। चलो माना की मेयर दूध और मक्खन के धुले हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब प्रदेश में उन्हीं की कांग्रेस पार्टी की सरकार थी तो उन्होंने कोयले की खान में मुंह काला कर रहे अफसरों के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं करवाई? सब जानते हैं कि कांग्रेस राज में अजमेर के सांसद और केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट शक्तिशाली नेता थे और पायलट का पूरा संरक्षण मेयर बाकोलिया को था।
क्या कभी मेयर ने पायलट को किसी अधिकारी की शिकायत की? यदि मेयर किसी अधिकारी की शिकायत करते तो पायलट ऐसे बेईमान अधिकारी को हाथों हाथ हटवा देते। बाकोलिया ने पांच वर्ष मेयरगिरी कैसे की है, इसको अजमेर की जनता और अवैध निर्माण करने वालों ने अच्छी तरह देखा है। इसलिए मेयर का यह बयान किसी के गले नहीं उतर रहा कि अवैध निर्माण में बाकोलिया निर्दोष हैं। जिन अवैधनिर्माणों को लेकर बाकोलिया ने पत्रों का उल्लेख किया है, उन निर्माणों पर क्या मेयर अपने विशेषाधिकार का उपयोग नहीं कर सकते थे?
अब जब बाकोलिया का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है, तो मेयर स्वयं को दूध का धुला बता रहे हैं। अच्छा होता कि मेयर के पद पर रहते हुए बाकोलिया अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करते। क्या दो-चार मामलों में सिर्फ पत्र लिख देने से मेयर की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है? मात्र दो माह बाद ही कांग्रेस को नगर निगम के चुनाव में उतरना है, लेकिन कांग्रेस पार्टी एक भी काम नहीं गिना सकती, जो मेयर बाकोलिया के कार्यकाल में हुआ हो। हो सकता है कि बाकोलिया दो माह बाद जब मेयर के पद से हट जाएंगे, तब अवैध निर्माण करने वाले के मुंह से सच सामने आएगा।
मेयर बाकोलिया को यह भी बताना चाहिए कि निगम में विभिन्न समितियों का गठन क्यों नहीं हुआ। क्यों समय पर साधारण सभाएं नहीं हुई, क्यों भू-उपयोग परिवर्तन की बैठकें नहीं हुई। जिन व्यक्तियों ने नक्शे स्वीकृति के लिए आवेदन किए उनके नक्शे दो-तीन वर्षों तक क्यों लटकाए रखे। क्या कभी मेयर ने यह सोचा कि लोगों के नक्शे पास क्यों नहीं हो रहे हैं। बाकोलिया बताएं तो सही कि पांच वर्ष में क्या किया? जब खुद के मकान का नक्शा स्वीकृत करवाना था तो दो-तीन दिन में ही प्रक्रिया पूरी करवाली। यह बात अलग है कि माधव नगर में बने मकान का वह नक्शा भी सरकार ने अवैध घोषित कर दिया।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

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