भू राजस्व विभागों की प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत राजस्थान राजस्व मंडल में हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं हो रही है। इससे प्रदेश भर के किसानों-ग्रामीणों को न्याय मिलने में विलम्ब हो रहा है। मुकदमो को शीघ्र निपटाने एवं अन्य मुद्दों पर 14 मई को मंडल प्रबंधन और वकीलों के बीच एक बैठक होगी।
राजस्व मंडल में कोई 64 हजार मुकदमे लम्बित हैं, लेकिन इस संस्थान में प्रतिदिन मुश्किल से तीन घंटे ही न्यायिक कार्य होता है। वह भी सप्ताह में पांच दिन। इसे प्रदेश के ग्रामीणों और किसानों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जब सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट और जिला न्यायालय में प्रात: 10 से सायं 5 बजे तक न्यायिक कार्य होता है तब राजस्व मंडल में प्रात: साढ़े दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक ही कार्य होता है। सारे दिन शायद ही कोई सदस्य हो जो प्रात: साढ़े दस बजे अदालत में सुनवाई के लिए बैठता हो। अधिकांश सदस्य प्रात: साढ़े ग्यारह बजे बैठते हैं और डेढ़ बजने से पहले-पहले उठ जाते हैं। दो-ढाई घंटे में कितना कार्य होता होगा इसका अंदाजा लम्बित 64 हजार मुकदमों से लगाया जा सकता है। लंच के बाद राजस्व मंडल में सुनवाई का प्रावधान शुरू से ही नहीं है। इस दुर्दशा पर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। तब हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल में भी प्रात: साढ़े दस से सायं 5 बजे तक अदालतें लगाने के आदेश दिए। लेकिन इन आदेशों की आज तक भी पालना नहीं हुई है। गंभीर बात तो यह है कि मंडल में नियुक्त होने वाले अधिकारियों को हाईकोर्ट की अवमानना का भी डर नहीं है।
प्रशासनिक अधिकारी बनते हैं सदस्य
राजस्व मंडल में आईएएस और आरएएस को सदस्य नियुक्त किया जाता है। जबकि दो सदस्य न्यायिक सेवा में और दो को वकील कोटे से भरा जाता है। मंडल में कुल 20 सदस्यों का प्रावधान है तथा मंडल का अध्यक्ष मुख्य सचिव स्तर का आईएएस होता है। पूर्व में आईएएस को ही सदस्य बनाया जाता था लेकिन आईएएस की अरूचि के चलते सरकार ने आरएएस की नियुक्ति भी शुरू कर दी। इसे अजीब बात ही कहा जाएगा कि जहां आईएएस नियुक्त नहीं होना चाहते हैं वहीं आरएएस अफसर मंडल का सदस्य बनने के लिए राजनैतिक तिकड़मे लगाते हैं। अब तो सरकार ने भी 20 में से 10 सदस्य आरएएस लगाने का निर्णय ले लिया है। वर्तमान में 8 आरएएस सदस्य कार्य कर रहे हैं। आईएएस मंडल में आना नहीं चाहते इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 4 में से 2 पद खाली पड़े हैं जो दो आईएएस अशोक सावरिया और बीएल नवल काम कर रहे हैं वे भी आरएएस से पदोन्नत होकर मंडल में ही आईएएस बने हैं। यानि वर्तमान में अध्यक्ष नीलिमा जौहरी को छोड़कर एक भी सदस्य नहीं है जिसका चयन सीधे आईएएस सेवा में हुआ हो। वकील कोटे के दोनों पद लम्बे समय से रिक्त पड़े है जबकि न्यायिक सेवा का भी एक ही अधिकारी कार्य कर रहा है।
आरएएस की नियुक्ति का विरोध करते रहे है वकील
राजस्व मंडल में आरएएस को सदस्य बनाए जाने का वकील समुदाय विरोध करता रहा है इसको लेकर वकीलों ने पूर्व में हड़ताल भी की। वकीलों का ताजा विवाद मुवक्किलों के मोबाइल नम्बर को लेकर है। मंडल प्रबंधन ने वकीलों से कहा है कि वे अपने-अपने मुवक्किलों के मोबाइल नम्बर दर्ज करवाए ताकि आगामी सुनवाई की तारीख मोबाइल पर एसएमएस के जरिए मुवक्किल को दी जा सके। वकीलों का कहना है कि मंडल प्रबंधन का यह निर्णय संदेह से भरा है। इसी पकार वकील मंडल प्रबंधन के उस आदेश का भी विरोध कर रहे है जिसमें कहा गया है कि जो मुकदमे 2001 से पहले के है उन पर ही सुनवाई होगी। 2001 के बाद के मुकदमों में सिर्फ तारीख दी जाएगी। इसके पीछे पुराने मामलों को निपटाने का ही उद्देश्य है लेकिन मंडल प्रबंधन का यह निर्णय वकीलों को रास नहीं आ रहा है।
14 को वार्ता
मंडल प्रबंधन और राजस्व मंडल बार एसोसिएशन के बीच जो विवाद की स्थिति है उसे निपटाने के लिए 14 मई को मंडल के अध्यक्ष नीलिमा जौहरी की उपस्थिति में एक वार्ता निर्धारित की गई है। इस वार्ता में वकीलों की ओर से मंडल के सदस्यों के समय को लेकर भी विचार किया जाएगा। वकीलों का कहना है कि जब देश की सभी अदालतों में लंच बाद भी कार्य होता है तो फिर राजस्व मंडल में लंच बाद काम क्यों नहीं होता। यदि लंच बाद न्यायिक कार्य होना शुरू हो जाए तो लम्बित मुकदमों का निपटारा जल्द हो सकता है। वकील यह भी चाहते हैं कि राजस्व मंडल में सीनियर आईएएस और न्यायिक सेवा के डीजे स्तर के अधिकारियों की ही नियुक्ति हो ताकि मंडल में पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ काम हो सके।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Saturday, 9 May 2015
राजस्व मंडल में नहीं हो रही हाईकोर्ट के आदेश की पालना
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