यूं तो सभी क्षेत्रों में विकास समितियां बनी हुई है और अपनी-अपनी क्षमताओं के मुताबिक समस्याओं का समाधान भी किया जाता है, लेकिन अधिकांश विकास समितियों में पदाधिकारियों के बीच अहम की लड़ाई देखी गई है। बहुत कम ऐसी समितियां होंगी जिसमें सभी लोग एकजुट होकर अपनी समिति के प्रति आदर भाव रखते हैं। ऐसी ही एक समिति अजमेर के आदर्श नगर में बनी हुई है। आदर्श नगर कोई सरकारी कॉलोनी नहीं है, बल्कि गृहनिर्माण सहकारी समिति के माध्यम से बनी हुई है। आमतौर पर गृहनिर्माण सहकारी समितियों की कॉलोनियों का बुरा हाल होता है। समिति के पदाधिकारी अपने निहित स्वार्थों की वजह से सड़कों की चौड़ाई को घटाकर प्लॉट बेच देते हैं। इसी प्रकार पार्क और अन्य सार्वजनिक स्थलों के लिए निर्धारित भूमि को भी बेच दिया जाता है, लेकिन आदर्श नगर ऐसी सभी बुराइयों से बचा हुआ है। यदि कोई सदस्य नियम विरुद्ध कार्य करता है तो शेष सदस्य एकजुट होकर विरोध करते हैं। समिति के सदस्य एकजुट होकर सभी पर्व और त्यौहार धूमधाम के साथ मनाते हैं गर्मी के अवकाश में जहां विभिन्न प्रशिक्षण शिविर लगाए जाते हैं, वहीं स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहने के लिए योग शिविर भी आयोजित किए जाते हैं। साफ-सफाई का अपने स्तर पर ही इंतजाम होता है। जब कभी स्ट्रीट लाइट सरकारी महकमा ठीक नहीं करता है तो समिति अपने स्तर पर स्ट्रीट लाइट का काम भी करवाती है। समिति की ओर से एक वाचनालय भी चलाया जाता है तथा पार्क का रखरखाव बहुत ही शानदार तरीके से किया जाता है। समिति अपने आप में आत्मनिर्भर बनी हुई है। निर्धारित समय पर समिति के चुनाव भी होते हैं। पुरुष सदस्यों के साथ-साथ घर परिवार की महिलाएं भी विकास कार्यों में सक्रिय रहती हैं। सबसे खास बात यह है कि विवाद होने पर समिति के सदस्य आपस में ही बैठ कर समाधान कर लेते हैं। समिति ने ही सरकार के सैटेलाइट अस्पताल के लिए भूमि भी नि:शुल्क दी है। वृक्षारोपण, रक्तदान शिविर आदि सामाजिक कार्य तो वर्षभर होते रहते हैं। वर्तमान में समिति के कोषाध्यक्ष ललित जैन, सदस्य अशोक शर्मा, अरविंद शर्मा, संजीव अत्रे आदि सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त बाबूलाल अग्रवाल, गिरीश बाशानी आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे हंै।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in) M-09829071511
Friday, 22 May 2015
विकास समिति हो तो आदर्श नगर जैसी
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