Sunday, 8 January 2023

अहंकार (घमंड) नहीं होने की सोच भी अहंकार का होना ही है-सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वीसी आनंद भालेराव।अजमेर के प्रमुख समाजसेवी सागरमल कौशिक पर लिखी पुस्तक का विमोचन।

7 जनवरी को अजमेर के चाचियावास स्थित राजस्थान महिला कल्याण मंडल के परिसर में प्रमुख समाजसेवी स्वर्गीय सागरमल कौशिक पर लिखी पुस्तक सेवाव्रती बाबूजी स्मृति चरित्र का विमोचन हुआ। इस अवसर पर राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति आनंद भालेराव के साथ मैं भी उपस्थित रहा। आमतौर पर ऐसे समारोह में  विमान कर्ता पुस्तक को पढ़े बिना ही भाषण दे देते हैं, लेकिन भालेराव ने स्वर्गीय कौशिक के जीवन को जिस तरह अपने भाषण में प्रस्तुत किया, उस से प्रतीत हुआ कि प्रोफेसर भालेराव ने पहले कौशिक के जीवन को अच्छी तरह समझा है। अपने संबोधन को सार्थक बनाते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार नहीं होने की सोच भी अहंकार ही है। हमने कई बार देखा है कि कुछ लोग अपनी ईमानदारी और कार्यशीलता का कुछ ज्यादा ही बयान करते हैं। यह अच्छी बात है कि कुछ लोग सेवा की भावना से निस्वार्थ होकर करते हैं। ऐसे लोगों की समाज में मान सम्मान होना भी चाहिए, लेकिन जब ऐसे व्यक्ति अपनी उपलब्धि पर स्वयं ही अहंकार करे तो इसे भी अहंकार (घमंड) होना ही माना जाएगा। प्रो. भालेराव ने कहा कि उपलब्धि तब है, जब अपने कार्यों की दूसरे लोग प्रशंसा करें। आपको तो सिर्फ अपना कार्य करना है। आज सागरमल कौशिक भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उन्होंने जरूरतमंद महिलाओं और विमंदित बच्चों के लिए निस्वार्थ भाव से जो कार्य किए, उस की प्रशंसा आज हम कर रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी सेवाओं के फल की अपेक्षा न करने की बात कही है। स्व. कोशिक पर डॉ. स्वाति जाधव द्वारा पुस्तक लिखे जाने पर प्रो. भालेराव ने कहा कि राजस्थान और महाराष्ट्र का ऐतिहासिक संबंध है। मुगलकाल में जब महाराष्ट्र के शिवाजी को आगरा में कैद किया गया था, तब राजस्थान के योद्धाओं ने उन्हें छुड़ाने में मदद की थी। यह अच्छी बात है कि स्वाति जाधव ने मराठी होते हुए भी राजस्थान के प्रमुख समाजसेवी पर पुस्तक लिखी है। प्रोफेसर भालेराव ने समारोह में एक प्रेरणादायक कहानी भी रोचक तरीके से सुनाई। मराठी कहानीकार सोनोपंत दांडेकर की कहानी को अपने शब्दों पर पिराते हुए उन्होंने कहा कि एक बुजुर्ग विधवा महिला के पोते का एडमिशन जब इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ तो उसे 15 सौ रुपए की जरूरत हुई। क्योंकि बुजुर्ग महिला का पांडुरंग विट्ठल भगवान पर बहुत भरोसा था, इसलिए उसने एक पत्र भगवान  विट्ठल  को लिखकर आग्रह किया कि पोते के एडमिशन के लिए 15 सौ रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए। महिला ने पत्र पर पता भी  विट्ठल  भगवान का ही लिखा। जब इस पत्र को पोस्टमैन ने पढ़ा तो उसे महिला के भगवान  विट्ठल  के भरोसे पर आश्चर्य हुआ। यह भरोसा बना रहे इसके लिए पोस्टमैन ने अपने साथी पोस्टमैनों की मदद से 750 रुपए एकत्रित कर बुजुर्ग महिला को भिजवा दिए। लेकिन महिला को तो 15 सौ रुपए की जरूरत थी। इसलिए उसने फिर भगवान  विट्ठल  को पत्र लिखा कि आपने तो मुझे 15 सौ रुपए ही भिजवाए होंगे, लेकिन बीच के लोगों ने 750 रुपए चुरा लिए। इसलिए आप मुझे 750 रुपए और भेजे। बुजुर्ग महिला का जब यह पत्र पोस्टमैनों ने पढ़ा तो उन्हें गुस्सा भी आया, लेकिन बुजुर्ग महिला के भरोसे को कायम रखने के लिए फिर 750 रुपए एकत्रित किए गए और महिला तक पहुंचाए गए। प्रो. भालेराव ने कहा कि ऐसी छोटी छोटी घटनाएं और कहानियां हमारे जीवन को नई प्रेरणा देती है।
 
प्रेरणादायक है जीवन:
जिस राजस्थान महिला कल्याण मंडल संस्था की स्थापना सागरमल कौशिक ने छोटे से पौधे के रूप में की थी, आज वह समाज सेवा का वट वृक्ष बन गया है। संस्था के प्रमुख राकेश कौशिक ने बताया कि उनके पिता का जीवन ही उनके लिए प्रेरणादायक है। रेलवे में कार्मिक होने के कारण जो वेतन मिलता था, उसमें से ही कुछ राशि समाज सेवा के कार्यों पर खर्च की जाती थी। संस्था की प्रमुख क्षमा कौशिक ने संस्था की गतिविधियों पर विस्तृत तौर पर प्रकाश डाला और बताया कि आज यह संस्था महिलाओं और विमंदित बच्चों के लिए कितना काम कर रही है। संस्था की गतिविधियों की और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829140772 पर संस्था प्रमुख राकेश कौशिक से ली जा सकती है। 

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जाती-जाती गहलोत सरकार से कुछ हासिल करने के लिए प्राइवेट स्कूलों के संचालकों का पुष्कर में सम्मेलन।यह सम्मेलन आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ की पहल पर हुआ।सम्मेलन के आयोजक अनिल शर्मा आम आदमी पार्टी के नेता है और अरविंद केजरीवाल को भगवान राम के रूप में देखते हैं।

राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ पुष्कर से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कितने लालायित है, इसका एक और उदाहरण 8 जनवरी को पुष्कर के निकट बांसेली में विजय लक्ष्मी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के परिसर में पुष्कर क्षेत्र के प्राइवेट स्कूलों के संचालकों के सम्मेलन में देखने को मिला। यह सम्मेलन प्राइवेट स्कूलों के संचालकों की प्रदेश स्तरीय संस्था शिक्षा स्कूल परिवार के अध्यक्ष अनिल शर्मा की ओर से आयोजित किया गया। इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ रहे। सम्मेलन में भीड़ जुटाने के लिए अनिल शर्मा ने अपना ओडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया। शर्मा ने माना कि यह सम्मेलन आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ को दिखाने के लिए किया जा रहा है ताकि हमारी बात मुख्यमंत्री गहलोत तक पहुंच सके। शर्मा ने राठौड़ को सीएम गहलोत का सबसे खास आदमी बताया। शर्मा ने प्राइवेट स्कूल संचालकों से कहा कि इस सम्मेलन का मकसद जाती जाती गहलोत सरकार से कुछ हासिल करना है। यह मौका हमें गवाना नहीं चाहिए। शर्मा ने कहा कि मैं चाहता तो पुष्कर से बाहर से भीड़ लाकर एकत्रित कर सकता था, लेकिन हमें धर्मेन्द्र राठौड़ को अपनी ताकत दिखानी है, इसलिए सिर्फ पुष्कर विधानसभा में संचालित प्राइवेट स्कूलों के संचालकों और उनमें काम करने वाले शिक्षकों को ही आमंत्रित किया गया है। शर्मा का इशारा था कि यदि पुष्कर विधानसभा के इतने मतदाताओं को धर्मेन्द्र राठौड़ एक साथ देखेंगे तो उन पर प्रभव पड़ेगा। जाहिर है कि यह सम्मेलन सिर्फ धर्मेन्द्र राठौड़ की पहल पर ही हुआ। सम्मेलन को सफल बनाने के लिए अनिल शर्मा पिछले तीन दिनों से पुष्कर स्थित आरटीडीसी के होटल में मेहमान बने हुए थे। पूरा होटल प्रबंधन अनिल शर्मा की खातिरदारी में लगा रहा। सम्मेलन में भीड़ को देखकर धर्मेन्द्र राठौड़ उत्साहित भी हुए, लेकिन भीड़ को एकत्रित करने वाले अनिल शर्मा की क्या सोच है, यह उनके ऑडियो संदेश से जाहिर होती है। अनिल शर्मा को गहलोत सरकार को जाती हुई सरकार मान रहे हैं, ऐसे में क्या गारंटी है कि सम्मेलन में एकत्रित लोग विधानसभा चुनाव में धर्मेन्द्र राठौड़ को वोट देंगे। राठौड़ को लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत के प्रभाव से उन्हें कांग्रेस का टिकट तो पुष्कर से मिल जी जाएगा। चूंकि धर्मेन्द्र राठौड़ अपने टिकट के प्रति आश्वस्त है, इसलिए पुष्कर विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं।
 
केजरीवाल में राम का स्वरूप:
धर्मेन्द्र राठौड़ भले ही अनिल शर्मा को अपना मददगार मानते हो, लेकिन अनिल शर्मा को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल में भगवान राम का स्वरूप दिखता है। कुछ दिनों पहले ही अनिल शर्मा ने केजरीवाल की पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। तब उन्होंने कहा कि राम राज्य की तरह दिल्ली में अरविंद केजरीवाल लोगों को शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी आदि मुफ्त में उपलब्ध करवा रहे हैं। भगवान राम ने भी अपने राज्य में ऐसी ही व्यवस्थाएं की थी। आम आदमी पार्टी के नेता के तौर पर अनिल शर्मा का मानना है कि राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के बीच गुप्त समझौता हो रखा है, इसलिए 25 वर्षों से एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बनती है। उन्होंने कहा कि अब राजस्थान में केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी सक्रिय हो गई है, इसलिए इन दोनों ही पार्टियों को जीतने नहीं दिया जाएगा। राजस्थान में 10 माह बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। अनिल शर्मा भी चौमू विधानसभा क्षेत्र से अपनी उम्मीदवारी जता रहे हैं। 

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Friday, 6 January 2023

अजमेर के बांदनवाड़ा कस्बे में 52 मकानों को तोड़ने के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई।वार्डपंच नीतू शर्मा की शिकायत पर हुई थी कार्यवाही। गुर्जर समाज से मात खाए प्रशासन को मिली राहत।

राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ के न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह ने अजमेर के अतिरिक्त कलेक्टर कैलाश शर्मा और बांदनवाड़ा क्षेत्र के तहसीलदार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें बांदनवाड़ा के मसूदा रोड स्थित 52 मकानों और दुकानों को तोड़ने पर अमल किया जाना था। इस मामले में 5 जनवरी को एडवोकेट महेंद्र शांडिल्य और मनोज आहूजा ने पीड़ितों की ओर से पैरवी की। न्यायालय को बताया गया कि गलत तथ्यों के आधार पर मकानों को तोड़ने के आदेश प्रशासन ने जारी किए हैं। दोनों वकीलों के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह ने तोडफ़ोड़ की कार्यवाही पर रोक लगा दी। एडवोकेट आहूजा ने बताया कि वार्ड पंच नीतू शर्मा ने द्वेषतापूर्ण शिकायत पर पीडब्ल्यूडी ने बांदनवाड़ा के मसूदा रोड पर 52 मकानों और दुकानों को अतिक्रमण माना था। पीडब्ल्यूडी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तहसीलदार 52 मकानों तो तोडऩे के नोटिस जारी किए। उच्च न्यायालय की नजीर देकर वार्ड पंच नीतू शर्मा ने एक शिकायत जिला कलेक्टर को भी की। इस शिकायत के आधार पर ही अतिरिक्त कलेक्टर कैलाश शर्मा ने जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर बांदनवाड़ा के तहसीलदार को पुलिस फोर्स उपलब्ध करवाने का आग्रह किया ताकि संबंधित मकानों और दुकानों को ध्वस्त किया जा सके। हालांकि प्रशासन की इस कार्यवाही से बांदनवाड़ा कस्बे में आक्रोश देखा गया। क्षेत्रीय लोगों ने वार्डपंच नीतू शर्मा के रवैये की भी निंदा की।
 
प्रशासन को राहत:
उच्च न्यायालय द्वारा तोडफ़ोड़ की कार्यवाही पर रोक लगाए जाने से जिला प्रशासन ने भी राहत महसूस की है। तोडफ़ोड़ की आशंका से बांदनवाड़ा में तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी, प्रशासन नहीं चाहता था कि इन दिनों बड़ी संख्या में मकानों और दुकानों को तोड़ा जाए। क्योंकि हाल ही में अजमेर शहर में वैशाली नगर क्षेत्र में भगवान देवनारायण के मंदिर की बाहरी दीवार को तोडऩे पर प्रशासन को गुर्जर समुदाय के आंदोलन का सामना करना पड़ा था। बांदनवाड़ा की तरह इस दीवार को भी पीडब्ल्यूडी ने अतिक्रमण माना था। बाद में कलेक्टर के आदेश पर ही तहसीलदार ने मंदिर की बाहरी दीवार को हटाने की कार्यवाही की थी, लेकिन जब गुर्जर समुदाय ने आंदोलन किया तो प्रशासन को मजबूरी में मंदिर की बाहरी दीवार को दोबारा से बनवाना पड़ा। हो सकता है कि जो स्थिति अजमेर के वैशाली नगर में उत्पन्न हुई वैसी ही स्थिति बांदनवाड़ा में भी उत्पन्न होती। हाईकोर्ट की रोक के बाद अब प्रशासन को बांदनवाड़ा में फिलहाल अतिक्रमण हटाने की कोई कार्यवाही नहीं करनी है। इस संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414434927 पर एडवोकेट मनोज आहूजा से ली जा सकती है।

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जयपुर में एक और जैन मुनि समर्थ सागर ने प्राण त्यागे। 5 दिन से अनशन पर थे।सम्मेद शिखर के मुद्दे पर अब जैन समाज और मुनियों को आंदोलन विरोध से बचना चाहिए।सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित करवाने के लिए भाजपा जिम्मेदार-महेंद्र सिंह रलावता।

6 जनवरी को सुबह राजस्थान के जयपुर में सांगानेर स्थित संघी मंदिर में जैन मुनि समर्थ सागर महाराज ने भी अपने प्राण त्याग दिए। 3 जनवरी को भी जैन मुनि सुज्ञेय सागर ने अपने प्राण त्याग दिए थे। झारखंड स्थित जैन समाज के तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित करने के विरोध में दोनों जैन मुनियों ने अन्न जल का त्याग कर दिया था। सुज्ञेय सागर 9 दिन और समर्थ सागर 5 दिन अनशन पर रहे। तीन दिन में दो जैन मुनियों ने अपने सर्वोच्च धार्मिक स्थल को बचाने के लिए प्राण त्यागे हैं। लेकिन अब जैन समाज को अपने देशव्यापी आंदोलन और जैन मुनियों को आमरण अनशन से बचना चाहिए। क्योंकि झारखंड सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखर को वन्य जीव अभ्यारण घोषित करने वाली अधिसूना को वापस ले लिया है। यानी अब सम्मेद शिखर पर्यटन स्थल नहीं बनेगा। राज्य और केंद्र सरकार की इस कार्यवाही के बाद आंदोलन की जरूरत नहीं है। दोनों ही सरकारों ने जैन समाज की धार्मिक भावनाओं का आदर किया है। जो कुछ मुद्दे रहे हैं उन्हें आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता है। समाज में जैन मुनियों की आवश्यकता है। जैन मुनि भी भारत की सनातन संस्कृति के संरक्षक हैं। ऐसे में जैन मुनियों का जीवन सर्व समाज के लिए महत्व रखता है। जैन समाज के प्रतिनिधियों को भी अपने मुनियों से आग्रह करना चाहिए कि अब वे आमरण अनशन नहीं करे। जैन समाज और मुनियों के जीवन के महत्व को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी समझा है।
 
भाजपा जिम्मेदार-रलावता:
राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता ने आरोप लगाया है कि सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित करवाने के लिए भाजपा जिम्मेदार है। रलावता ने बताया कि 2018 में ब झारखंड में रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी, तब सम्मे शिखर से जुड़े वन क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। इस प्रस्ताव पर ही 2019 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भाजपा सरकार संबंधित क्षेत्र को वन्य जीव अभ्यारण घोषित करने की अधिसूचना जारी की। इसी के बाद सम्मेद शिखर क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित किया गया है। भाजपा अपनी बुराई को छिपाने के लिए झारखंड की मौजूदा गठबंधन सरकार को जिम्मेदार बता रही है। रलावता ने माना कि अभी कांग्रेस के समर्थन से झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार चल रही है, लेकिन सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित करवाने में गठबंधन सरकार की कोई भूमिका नहीं है। भाजपा ने जिस तरीके से जैन समाज के आंदोलन को हवा दी, उससे भाजपा और उनके नेताओं का दोहरा चरित्र उजागर हुआ है। रलावता ने कहा कि 5 जनवरी को जब केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने 2019 वाली अपनी  अधिसूचना को वापस लिया तो झारखंड की सरकार ने भी पर्यटन स्थल वाला आदेश वापस ले लिया है। कांग्रेस पूरी तरह जैन समाज की धार्मिक भावनाओं का आदर करती है। जैन मुनिओं को जैन समाज के आंदोलन में शामिल भाजपा नेताओं से पूछना चाहिए कि 2018 में जब राज्य सरकार ने पर्यटन स्थल वाला प्रस्ताव स्वीकृत किया, तब झारखंड में किस दल की सरकार थी। रलावता ने कहा कि भाजपा सरकार वाला प्रस्ताव और केंद्र सरकार की अधिसूचना वाले सभी दस्तावेज उनके पास है। चाहे तो भाजपा नेता भी ऐसे दस्तावेज देख सकते हैं। रलावता ने आरोप लगाया कि मीडिया के माध्यम से झारखंड की गठबंधन सरकार की छवि खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब अधिसूचना वापस लेने का श्रेय भी भाजपा ले रही है, जबकि भाजपा तो सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित करवाने के लिए खुद जिम्मेदार है। रलावता ने कहा कि मोबाइल नंबर 9414497073 पर संवाद कर सम्मेद शिखर से संबंधित दस्तावेज देखे जा सकते हैं। 

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आखिर किस बात के मुख्यमंत्री हैं अशोक गहलोत।भ्रष्टाचार के आरोपी की पहचान उजागर नहीं करने का मामला।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि उनके अधीन काम करने वाले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी ने 4 जनवरी को जो काला आदेश निकाला है, उसकी जानकारी उन्हें नहीं है। मालूम हो कि प्रियदर्शी ने ब्यूरो के सभी अधिकारियों को आदेशित किया है कि जिन सरकारी कार्मिकों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा जाए, उनकी पहचान उजागर नहीं की जाए। यानी मीडिया को यह नहीं बताया जाए कि गिरफ्तार कार्मिक का नाम क्या है और न ही फोटो खींचने दिए जाए। एसीबी के कार्यवाहक डीजी हेमंत प्रियदर्शी के इस काले आदेश की जानकारी मुख्यमंत्री को नहीं होने पर ही सवाल उठता है कि अशोक गहलोत किस बात के मुख्यमंत्री हैं? यह सवाल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि गहलोत के पास ही गृह विभाग का भी प्रभार हैं। जो मुख्यमंत्री प्रदेश का गृहमंत्री भी हों, उन्हें अपने ही विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा निकाले गए जनविरोधी आदेश की जानकारी न हो, यह बात समझ से परे हैं। ऐसा नहीं कि आदेश किसी छोटे मोटे अधिकारी ने निकाला हो और आदेश किसी एक जिले में लागू हो। हेमंत प्रियदर्शी का आदेश प्रदेशभर में लागू हुआ है और यह आदेश अशोक गहलोत सरकार की इमेज से भी जुड़ा है। सीएम गहलोत भ्रष्टाचार पर सख्त रवैया होने का दावा बार बार करते हैं, लेकिन वहीं उनके अधीनस्थ अधिकारी भ्रष्टाचारियों को बचाने वाला आदेश जारी कर रहे हैं। अब यदि सीएम गहलोत अपने मातहत डीजी के आदेश की जानकारी होने से इंकार कर रहे हैं तो उनके कथन पर भरोसा करना ही पड़ेगा, क्योंकि महात्मा गांधी के अनुयायी अशोक गहलोत सार्वजनिक तौर पर झूठ नहीं बोलेंगे। गहलोत के कथन को सही माने तो प्रियदर्शी ने अपने ही विवेक से काला आदेश जारी कर दिया। यदि ऐसा है तो फिर गहलोत को प्रियदर्शी को एसीबी के डीजी पद से हटाना चाहिए। प्रियदर्शी के आदेश से कांग्रेस सरकार की छवि खराब हुई है। एक ओर भारत जोड़ो यात्रा कर राहुल गांधी भ्रष्टाचार पर हमला कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस शासित राजस्थान में सरकार भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाला आदेश जारी कर रही है। भले ही हेमंत प्रियदर्शी का आदेश सीएम गहलोत की जानकारी में न हो, लेकिन यह आदेश सरकार का कही माना जाएगा। कोई भी अधिकारी सरकार की नीतियों की क्रियान्विति ही करता है। हेमंत प्रियदर्शी तो सीएम गहलोत के भरोसेमंद आईपीएस हैं, इसलिए 2 जनवरी को ही एसीबी का डीजी नियुक्त किया गया। प्रियदर्शी की नियुक्ति बीएल सोनी के स्थान पर की गई। सोनी 31 दिसंबर को पुलिस सेवा से रिटायर हुए। इसमें कोई दो राय नहीं कि सोनी के कार्यकाल में प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान चला। ऐसे अधिकारियों को भी पकड़ा गया जो सामूहिक तौर पर मासिक रिश्वत वसूलते थे। रंगे हाथों पकड़े गए अधिकारियों के बारे में मीडिया को भी प्रमुखता से जानकारी उपलब्ध करवाई गई। इतना ही नहीं गिरफ्त में आए कार्मिकों के फोटो और वीडियो भी तैयार किए गए। यानी भ्रष्टाचार के आरोपियों की पहचान उजागर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई, लेकिन वहीं अब आरोपियों के मानवाधिकारों की दुहाई देकर भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है। 

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