11 अगस्त को लोकसभा में जो कुछ भी हुआ उसे गुंडागर्दी की श्रेणी में ही माना जाएगा। लोकसभा के उपाध्यक्ष डॉ. एम. थम्बीदुरई जब सदन का संचालन कर रहे थे। तभी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने कागज के टुकड़ों को गोले बनाकर फेंका। या यंू कहा जाए कि विपक्षी सांसदों ने कागज के गोलों को उपाध्यक्ष के मुंह पर मारा। यह तो अच्छा हुआ कि सांसदों के पास कागज ही थे, यदि पत्थर होते तो थंबीदुरई का क्या हाल होता। जिस प्रकार गली-कूचों में छोटे-बड़े गुंडे अपराध करते हैं, ठीक उसी प्रकार 11 अगस्त को लोकसभा में भी नजारा देखने को मिला। कानून के जानकार बताए जब अध्यक्ष के मुंह पर गोले फेंके जा रहे हैं, तो क्या इसे गुंडागर्दी की श्रेणी में नहीं माना जाएगा? सवाल यह नहीं कि विपक्ष के सांसद सरकार की कार्यशैली से खफा है और इसलिए विरोध जता रहे हैं। विपक्ष की अपनी नाराजगी सही या गलत हो सकती है, लेकिन सांसदों को अध्यक्ष के आसान पर बैठे उपाध्यक्ष को अपमानित करने का कोई अधिकार नहीं है। इस घटना के बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा कि चालीस सांसद चार सौ चालीस का हक मार रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए आज बेहद ही दु:ख का दिन है। असल में सुमित्रा महाजन भी पिछले कई दिनों से लोकसभा को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। गत 21 जुलाई से संसद के दोनों सदन ठप पड़े हैं। कांग्रेस की जिद है कि पहले सुषमा स्वराज, शिवराज सिंह चौहान व वसुंधरा राजे का इस्तीफा हो। जब तक इन तीनों का इस्तीफा नहीं होता तब तक संसद को चलने नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस के बयान से प्रतीत होता है कि संसद को ठप कर कांग्रेस गत लोकसभा चुनाव में हुई हार का बदला ले रही है। 545 सांसदों में से कांग्रेस के मात्र 44 सांसद ही है, लेकिन फिर भी संसद को ठप कर कांग्रेस स्वयं को गौरवांवित महसूस कर रही है। यह वही कांग्रेस है जिसके घोटाले मनमोहन सिंह की सरकार में आए दिन होते थे। सवाल उठता है कि जब देश की जनता ने 283 सांसद देकर भाजपा को सरकार चलाने का अधिकार दिया है तो फिर कांग्रेस को 44 सांसदों के आधार पर संसद को ठप करने का अधिकार किसने दिया? क्या कांग्रेस पांच वर्ष सत्ता से बाहर नहीं रह सकती? कांग्रेस को लगता है कि संसद को ठप कर सत्ता का सुख भोगा जा सकता है। 11 अगस्त को राज्यसभा में सरकार की ओर से जीएसटी बिल प्रस्तुत किया गया। पूरा देश जानता है कि यह बिल कितना महत्त्वपूर्ण है। इस बिल के कानून बनने पर पूरे देश में टैक्स वसूली एक समान हो जाएगी। इससे सरकार, व्यापारी और आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी। इस बिल का मसौदा यूपीए सरकार का ही है, लेकिन इसे राजनीति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि अब कांग्रेस जीएसटी बिल को भी पास नहीं होने दे रही है। समझ में नहीं आता कि कांग्रेस के रणनीतिकार कौन है? यदि नरेन्द्र मोदी की सरकार जनविरोधी कार्य करेगी, तो अगले चुनाव में अपने आप निपट जाएगी, लेकिन यदि सरकार को काम करने ही नहीं दिया गया तो फिर अगले चुनाव में कांग्रेस को 44 सीटे भी नहीं मिलेगी। पूरा देश जानता है कि कांग्रेस ने साठ साल में देश को कितना नुकसान पहुंचाया है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Tuesday, 11 August 2015
अब तो संसद में हो रही है गुंडागर्दी
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