पीएम नरेन्द्र मोदी भले ही मंदिर मस्जिद राजनीति नहीं करने का कितना ही दावा करें, लेकिन उनकी राजनीति इसी मुद्दे पर अटकी रहती है। मोदी ने यूएई के 16 और 17 अगस्त के दौरे में आबूधाबी में बनी मस्जिद को न केवल देखा, बल्कि मस्जिद के विशाल परिसर में भ्रमण भी किया। मस्जिद के अपने दौरे को बैलेंस करने के लिए मोदी ने हाथों हाथ यूएई के शासकों से आग्रह किया कि मंदिर के लिए भूमि उपलब्ध करवाई जावे। यानि अब यूएई में हिन्दुओं का मंदिर भी बनेगा। मोदी के समर्थक इस बात से खुश है कि मोदी जब मस्जिद में गए तब केसरिया रंग का कुर्ता पहन रखा था। इसमें कोई दो राय नहीं है कि विदेश यात्राओं के दौरान पीएम मोदी भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार के साथ-साथ विकास का उद्देश्य भी रखते हैं, लेकिन भारत के अंदर की परिस्थितियों को देखने हुए मोदी को मंदिर मस्जिद की राजनीति करनी ही पड़ती है। मोदी के मस्जिद में जाने से भारत के मुसलमान खुश न हो जाए, इस आशंका को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि यह मस्जिद तो सैलानियों का आकर्षण का केन्द्र है, यानी मोदी मस्जिद में किसी अकीदत के साथ नहीं, बल्कि पर्यटक के तौर पर गए थे। मोदी की मस्जिद यात्रा पर उमर अब्दुल्ला की अपनी सोच हो सकती है, लेकिन इसका भारत की राजनीति पर असर पड़ेगा ही। अधिकांश मुस्लिम नेता मोदी को मुस्लिम विरोधी करार देते हैं। यह बात अलग है कि मोदी का अभी तक भी ऐसा कोई कृत्य सामने नहीं आया है, जिसमें मोदी का कदम मुस्लिम विरोधी दिखे। उल्टे कश्मीर में पीडीपी और भाजपा की गठबंधन की सरकार मोदी की रणनीति के अनुरूप ही चल रही है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Monday, 17 August 2015
मोदी की राजनीति फिर अटकी मंदिर-मस्जिद पर
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