पाकिस्तान से इस वार्ता का क्या मतलब है।
पाकिस्तान और भारत के मध्य राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता 23 अगस्त को नई दिल्ली में होनी है। यानि पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज हमारे अजीत डोभाल से वार्ता करेंगे। भारत में लगातार मांग हो रही है कि यह वार्ता रद्द की जाए, क्योंकि पाकिस्तान पिछले दस दिनों से लगातार सीमा पर गोलाबारी कर रहा है। लेकिन इसके बावजूद भी पीएम नरेन्द्र मोदी के दबाव की वजह से वार्ता रद्द नहीं हो पा रही है। एक तरफ गोलाबारी के बीच भारत वार्ता कर रहा है, तो दूसरी ओर सरताज अजीज ने कहा है कि वे नई दिल्ली में पहले कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास में होगी। इसके लिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधि सैय्यद अलीशाह गिलानी, यासीन मलिक, मीरवाइज, उमर फारुख आदि को न्यौता भी भेज दिया है। यानि सरताज अजीज अब पहले उन लोगों से मुलाकात करेंगे, जो कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं। पाकिस्तान का यह कदम जले पर नमक छिड़कना जैसा है। सवाल उठता है कि गोलाबारी के बीच ऐसी वार्ता क्या मायने रखती है? नरेन्द्र मोदी और भाजपा जब विपक्ष में थे, तो कांग्रेस को इसलिए कोसते थे कि वार्ता और गोलाबारी अथवा आतंकवाद एक साथ नहीं हो सकते, लेकिन अब मोदी के शासन में गोलाबारी के बीच ही पाकिस्तान से वार्ता हो रही है। सवाल उठता है कि भारत कि ऐसी क्या मजबूरी है, जिसकी वजह से पाकिस्तान से वार्ता करने पड़ रही है। क्या हम पाकिस्तान से ऐसी चीजे आयात करते हैं, जिनकी वजह से हमारा काम नहीं चलेगा। जहां तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने का सवाल है, तो भारत कितनी भी विनम्रता दिखा ले, लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आने वाला नहीं है। इतना ही नहीं पाकिस्तान को आतंकवाद के चाहे जितने सबूत दे दिए जाएं फिर भी पाकिस्तान स्वीकार नहीं करेगा। देश के आम नागरिकों को उम्मीद थी कि भाजपा के शासन में पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा और ये उम्मीद तब और बढ़ गई जब नरेन्द्र मोदी देश के पीएम बने। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जो नरम रुख कांग्रेस के शासन में था, उससे भी लचीला रवैया भाजपा के शासन में दिख रहा है। केन्द्र सरकार को चाहिए सरताज अजीज को भारत आने ही न दे। इस वार्ता के पैरोकार ये अच्छी तरह समझ लें कि सरताज अजीज के नई दिल्ली आने से भारत सरकार को ही नीचा देखना पड़ेगा। मीडिया में भी सरताज अजीज और अजीत डोभाल की वार्ता के बजाए सरताज अजीज और अलगाववादी नेताओं की बीच हुई वार्ता का कवरेज ज्यादा प्रसारित होगा। जो चैनल पाकिस्तान से लाइव बहस दिखाते हैं, उन्हें तो सरताज अजीज के दिल्ली आने पर पाकिस्तान का पक्ष रखने का सुनहरा अवसर मिल जाएगा। समझ में नहीं आता कि इस वार्ता के पैरोकार हमारे विदेशी चैनल वालों को पाकिस्तान का पक्ष रखने का अवसर क्यों दे रहे हैं। पीएम मोदी ने हाल ही में यूएई में जाकर भारत को सम्मान बढ़ाया है, उसमें सरताज अजीज के दिल्ली आने से कमी होगी। सरताज अजीज भारत में वो ही बोलेंगे जो पाकिस्तान में हाफिज सईद जैसे नेता बोलते हैं।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Wednesday, 19 August 2015
इसे कहते हैं जले पर नमक छिड़कना।
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