जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी
मैंने बहुत से आईएएस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को देखा है जो रिटायरमेन्ट के बाद या तो सुस्त हो जाते हैं या किसी कम्पनी में छोटी-मोटी नौकरी कर लेते हैं। ऐसे बहुत कम अधिकारी होते हैं जो रिटायरमेन्ट के बाद बिना स्वार्थ समाज की सेवा करे। ऐसे ही एक अधिकारी हैं आर.एन. अरविन्द। पांच जिलों के कलेक्टर और आखिर में राजस्थान राजस्व मंडल के सदस्य के पद से सेवानिवृत हुए अरविन्द ने रिटायरमेन्ट के बाद पांच पुस्तकें लिख दी हैं। उनकी ताजा पुस्तक सुख और सफलता के 100 सूत्र है। किताब का उद्देश्य उत्तर जीवन और सफलता की कला है। इस पुस्तक में अरविन्द ने देश-दुनिया के अनुभवी विद्वानों का जिक्र करते हुए बताया है कि जीवन में किस प्रकार सफलता हासिल की जा सकती है। सफलता ऐसी हो जो आपके मरने के बाद दूसरों के लिए प्रेरणा बने। यह पुस्तक गुरु गोविन्द सिंह जी के बलिदान को समर्पित करते हुए लिखी गई है। पुस्तक में सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चन्द्रशेखर आजाद, उद्यम सिंह, अश्फाक उल्लाह खान के नाम का उल्लेख कर अरविन्द ने दर्शा दिया है कि यह पुस्तक देशभक्ति से ओत-प्रोत है। पुस्तक में अरविन्द ने खुद की सफलता का भी उल्लेख किया है। किस प्रकार झुंझुनूं जिले के गांव की सरकारी स्कूल में पढ़कर जयपुर तक आए और फिर आईएएस की परीक्षा में टॉप किया। प्रशासनिक कुशलता की वजह से ही अरविन्द का आईएएस में चयन हुआ। इसलिए इस पुस्तक में अरविन्द ने उन शिक्षकों के नाम का उल्लेख किया है जिन्होंने स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक अरविन्द की योग्यता निखारी।
वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में यह पुस्तक उन युवाओं के लिए खास महत्व रखती है जिन्हें बार-बार प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिलती। माना कि आरक्षण और सामाजिक व आर्थिक हालातों की वजह से स्वयं को स्थापित करने में अनेक कठिनाईयां हैं। लेकिन यदि लक्ष्य सामने रखकर निरन्तर प्रयास किए जाएं तो सफलता मिल ही जाती है। इस पुस्तक का प्रकाशन बीकानेर के सूर्य प्रकाशन मंदिर की ओर से किया गया है। अरविन्द इन दिनों जयपुर में सक्रिय हैं और उनके निवास का फोन नंबर 0141-2810071 व मोबाईल नंबर 9829361171 है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Saturday, 26 September 2015
आर.एन. अरविन्द के सफलता के 100 सूत्र
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