उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से कहा है कि वह मुस्लिम समाज से भेदभाव की गलती को सुधारे। भारतीय मुसलमानों को अपनी पहचान, सुरक्षा, शिक्षा एवं सशक्तिकरण बनाए रखने में समस्या आ रही है। इन समस्याओं को दूर करने में मोदी सरकार को सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। हामिद अंसारी ने यह बात ऑल इंडिया मजलिस ए मुशावरात के स्वर्ण जयंती समारोह में कही। सवाल उठता है कि अंसारी का यह बयान क्या सही माना जा सकता है? अंसारी इस समय देश के संवैधानिक पद पर बैठे हैं जिनकी नजर में सिर्फ एक समुदाय नहीं बल्कि सभी समुदाय बराबर है और फिर अंसारी उस राजनैतिक दल कांग्रेस से जुड़े रहे, जिसने आजादी के बाद 50 साल से भी ज्यादा देश पर शासन किया। यदि अंसारी मुसलमानों के साथ भेदभाव होना मानते हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है। क्या इसके लिए स्वयं अंसारी जिम्मेदार नहीं हैं? सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की सभी राजनीतिक दलों की सरकारों ने मुसलमानों के सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए अनेक योजना चलाई। यह बात अलग है कि इन योजनाओं का लाभ मुस्लिम समाज के पिछड़े तबके तक नहीं पहुंचा। इसके लिए हामिद अंसारी जैसे राजनेता ही जिम्मेदार हैं। सवाल उठता है कि जब सरकार की कल्याणकारी योजना है तो उसका लाभ मुसलमानों को मिलना ही चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि अंसारी ने राजनीतिक नजरिए से बयान दिया है। अंसारी के ताजा बयान से विरोधी दलों को मोदी सरकार पर हमला करने का एक ओर अवसर मिल गया है।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Tuesday, 1 September 2015
क्या अंसारी ने उप राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुरूप बयान दिया है?
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