तो कैसे पकड़ा जाएगा आनंदपाल?
राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार और पुलिस को शर्मसार करने वाले आनंदपाल सिंह की फरारी के प्रकरण में प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और डीजीपी मनोज भट्ट के बीच ही तालमेल नहीं है। इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि कुख्यात बदमाश आनंदपाल कैसे पकड़ा जाएगी? 9 सितम्बर को गृहमंत्री और डीजीपी अजमेर आए, लेकिन दोनों ने ही विरोधाभासी बयान दिए। भट्ट ने कहा कि आनंदपाल की फरारी प्रकरण में महत्त्वपूर्ण सुराग मिले हैं और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सुराग की जानकारी मीडिया को देने से भट्ट ने इंकर कर दिया। लेकिन वहीं जब पत्रकारों ने कटारिया से संवाद किया तो उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में अभी तक हमारे पास कोई उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि सीएम वसुंधरा राजे स्वयं चिंतित है और अब वे इस मामले की जांच किसी बड़े अधिकारी से कराना चाहती है। इसलिए वे अजमेर आए और अब जयपुर जाकर सीएम से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि जांच का परिणाम आने से एक माह का समय लगेगा। यानि कटारिया ने डीजीपी के बयान के उलट बयान दिया है। सवाल उठता है कि जब गृहमंत्री और डीजीपी में ही तालमेल नहीं है तो फिर आनंदपाल कैसे पकड़ा जाएगा? असल में पुलिस की लापरवाही और मिलीभगत की वजह से ही आनंदपाल दिन दहाड़े पुलिस दल पर फायरिंग करके फरार हो गया। फरारी के समय पुलिस की जो विफलता उजागर हुई, उससे अभी भी सरकार और पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया है।
क्या मीडिया को बयान देेन से पहले गृहमंत्री और डीजीपी एकमत नहीं हो सकते थे? सवाल यह भी है कि गृहमंत्री और डीजीपी में से कौन झूठ बोल रहा है। डीजीपी सुराग मिलने और जल पकडऩे का दावा कर रहे हैं तो वहीं गृहमंत्री अब तक की जांच से ही संतुष्ट नहीं है। इसलिए तो सीएम से बात कर बड़ा जांच अधिकारी नियुक्त करने की बात कही गई है। इस सब विरोधाभास का ही फायदा आनंदपाल को और दूर चले जाने में मिलेगा।
अजमेर और नागौर एसपी पर गिर सकती है गाज
9 सितम्बर को गृहमंत्री और डीजीपी ने माना कि आनंदपाल की फरारी में गंभीर लापरवाही रही है। इस लापरवाही के दोषी अधिकारियों के खिलाफ होगी। कटारिया ने कहा कि अभी तक जो 8-10 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया है। वह पर्याप्त सजा नहीं है। गृहमंत्री और डीजीपी के बयान के बाद कयास लगाया जा रहा है कि अजमेर एसपी विकास कुमार और नागौर एसपी गौरव श्रीवास्तव का तबादला कर दिया जाए। 3 सितम्बर को अजमेर पुलिस भी आनंदपाल को जेल से नगौर की डीडवाना अदालत में पेशी के लिए ले गई थी। लौटते समय नागौर के परबतसर में समर्थकों ने पुलिस वाहन पर फायरिंग कर आनंदपाल को छुड़ा लिया।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Wednesday, 9 September 2015
गृहमंत्री और डीजीपी में ही तालमेल नहीं।
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