राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने छह अक्टूबर को अजमेर जिले के मुहामी गांव में जनता दरबार लगाया। राज्यपाल ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए समस्याओं की जानकारी ली। हालांकि दरबार में राज्यपाल ने ग्रामीणों से कहा कि बिना किसी डर के समस्याओं को बताया जाए, लेकिन दरबार में वही हुआ जो नेता अधिकारी और एमडीएस यूनिवर्सिटी के शिक्षाविद् चाहते थे। तीनों के समूह ने राज्यपाल का जोरदार स्वागत किया। स्वागत भी ऐसा की राज्यपाल के पैरों में फूलों की चादर बिछा दी गई। गांव के जिस स्थान पर जनता दरबार लगाया गया, वहां चारों तरफ सफेद शामियाना लगाया गया ताकि राज्यपाल गांव की हकीकत नहीं जान सके। यूनिवर्सिटी के शिक्षिाविद् इस लिए भी चिंतित थे कि राजयपाल की पहल पर ही यूनिवर्सिटी ने मुहामी गांव को गोद लिया है। राज्यपाल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति होते है। इसलिए शिक्षाविद् कोई नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते थे। राज्यपाल को पैदल चलने में पहले से ही तकलीफ होती है, इसलिए राज्यपाल स्वयं भी कम ही पैदल चले। इस स्थिति का भी फायदा समूह ने उठाया।
कलेक्टर की शिकायत
जनता दरबार में निकटवर्ती कुचली गांव की 15 वर्षीय बालिका तस्मीन ने कहा कि जब वह गांव की गंदगी को लेकर जिला मुख्यालय पर कलेक्टर से मिलने आई तो कलेक्टर ने मिलने से इंकार कर दिया।
हाथों हाथ हटाया ठेका:
दरबार में ग्रामीणों ने जब शराब के ठेके का विरोध किया तो राज्यपाल ने ठेके को हटाने के निर्देश दिए। इस पर कलेक्टर आरुषि मलिक ने मोबाइल फोन पर ही आबकारी आयुक्त से संवाद किया। राज्यपाल को बताया गया कि अब मुहामी गांव में शराब का ठेका नहीं रहेगा।
जनता दरबार में शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी, यूनिवर्सिटी के वीसी कैलाश सोढानी जिला कलेक्टर आरुषि मलिक, क्षेत्रीय विधायक सुरेश रावत, जनसम्पर्क विभाग के उपनिदेशक प्यारे मोहन त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Tuesday, 6 October 2015
महामहिम को खुश कर दिया नेताओं, शिक्षाविदों और अफसरों ने
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