राजस्थान लोक सेवा आयोग पर जो ग्रहण लगा हुआ है, वह उतरने का नाम ही नहीं ले रहा। पिछले अध्यक्ष हबीब खान गौराण को इसलिए पद छोडऩा पड़ा था कि उन्होंने अपनी बेटी की खातिर आरजेएस की परीक्षा का प्रश्न पत्र प्रिंटिंग प्रेस से ही चुरा लिया। प्रश्न पत्र चुराने का मामला आज भी अदालत में चल रहा है। और अब वर्तमान अध्यक्ष ललित के.पंवार भी प्रदेश के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण की चपेट में आ गए हैं। 13 अक्टूबर को पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2000 में जब पंवार जयपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष थे, तब सबसे पहले शैलेन्द्र अग्रवाल को भूमि आवंटन की सिफारिश की गई थी। इस सिफारिश में पंवार का कितना दोष है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन जिस तरह से धारीवाल ने पंवार पर आरोप लगाया है, उससे राजस्थान लोक सेवा आयोग के काम काज पर निश्चित तौर पर असर पड़ेगा। इस एकल पट्टा प्रकरण में यूडीएच के डिप्टी सेकेट्री निष्काम दिवाकर और शैलेन्द्र अग्रवाल गिरफ्तार हो चुके हैं तथा यूडीएच के पूर्व प्रमुख शासन सचिव जी.एस.संधु की एसीबी को सरगर्मी से तलाश है। इतना ही नहीं एसीबी ने धारीवाल को भी तलब किया है। यदि यह मामला आगे बढ़ा तो तब के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी चपेट में आ सकते हैं। ललित के.पंवार को एक कुशल और योग्य अधिकारी मानते हुए ही आईएएस की सेवानिवृत्ति के बाद आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। पिछले दो माह में पंवार ने आयोग को ढर्रे पर लाने का प्रयास भी किया, लेकिन 13 अक्टूबर को धारीवाल ने जिस तरह से पंवार पर हमला किया है, उससे एक बार फिर आयोग की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सब जानते हैं कि आयोग के माध्यम से ही प्रदेश के युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलती हैं। हर युवा यह उम्मीद करता है कि आयोग में निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ काम हो, लेकिन जब आयोग के अध्यक्ष की विश्वसनीयता पर ही संदेह हो तो फिर प्रदेश के युवाओं के भरोसे को धक्का लगता है। प्रदश्ेा का युवा हबीब खान गौराण के कार्यकाल को भुला भी नहीं पाया था कि अब वर्तमान अध्यक्ष भी एकल पट्टा प्रकरण की चपेट में आ गए हैं। मजे की बात यह है कि कांग्रेस-भाजपा दोनों दल स्वयं को ईमानदार बता रहे हैं। दिन में धारीवाल ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट के साथ प्रसे कॉन्फ्रेंस की तो 13 अक्टूबर को शाम को ही भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने सरकार और सीएम वसुंधरा राजे की ओर से सफाई दी। यह बात अलग है कि दिन में ही केन्द्रीय मंत्री वैंकेय्या नायडू परनामी के घर गए और उनकी पत्नी के निधन पर शोक जताया। लेकिन शाम को परनामी ने पूरी दृढ़ता के साथ सरकार का पक्ष रखा तथा सरकार के गोपनीय कागजात भी मीडिया को दिए। 135 करोड़ के इस मामले में कौन दोषी है, यह तो अब अदालत के फैसले के बाद ही पता चलेगा। लेकिन फिलहाल यह मामला दिलचस्प हो गया।
(एस.पी. मित्तल)(spmittal.blogspot.in)M-09829071511
Tuesday, 13 October 2015
पट्टा प्रकरण में आयोग के अध्यक्ष पंवार भी चपेट में आए।
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