Friday, 23 October 2026
पंचायत चुनाव के बीच पूर्व सीएम अशोक गहलोत अकाल प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर।
क्या यह राजस्थान में कांग्रेस को कमजोर करने की साजिश है?
अकाल की भीषण स्थिति-गहलोत।
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इन दिनों राजस्थान भर में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का शोर है। चार चारणों में होने वाले चुनाव के पहले चरण में 22 अक्टूबर को मतदान होगा। सभी चरण के मतदान हो जाने के बाद 20 नवंबर को परिणाम आएंगे। यही वजह है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली सहित तमाम बड़े नेता पंचायत चुनाव में व्यस्त है, लेकिन पूर्व सीएम अशोक गहलोत अपनी ढपली अलग ही बजा रहे हैं। चुनाव के शोर के बीच गहलोत अकाल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। 18 अक्टूबर को गहलोत ने जैसलमेर पहुंचकर अकाल प्रभावित किसानों से संवाद किया। तय कार्यक्रम के अनुसार 19 अक्टूबर को गहलोत फलौदी का दौरा करेंगे। इसके बाद लगातार अकाल प्रभावित जिलों में ही रहेंगे। सवाल उठता है कि जब पंचायत चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है, तब चुनाव कार्य करने के बजाए गहलोत अकाल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस संगठन में अपनी उपेक्षा के चलते गहलोत अपने नजरिए से राजनीति कर रहे हैं। गहलोत की इस बात की राजनीति से कांग्रेस को ही नुकसान होगा। शहरी निकाय के चुनाव में जब कांग्रेस की हार हुई, तब गहलोत ने ही कहा था कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चुनाव प्रबंधन करने में चूक की है। लेकिन अब वो ही गहलोत पंचायती राज के चुनाव में अकाल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे है। इससे जाहिर है कि गहलोत की रुचि पंचायतीराज के चुनावों में नहीं है। जानकारों का मानना है कि गहलोत अकाल प्रभावित क्षेत्रों के दौरे की आड़ में स्वयं का शक्ति प्रदर्शन कर रहे है। गहलोत यह प्रदर्शित करना चाहते है कि आज भी प्रदेश भर में उनकी लोकप्रियता है। गहलोत जहां भी जाते हैं, वहां उनके समर्थक चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाते हैं। मालूम हो कि गहलोत पूर्व में तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। चौथी बार गहलोत सरकार के नारों पर गहलोत पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह कार्यकर्ताओं की भावना है। यदि कार्यकर्ता कांग्रेस के किसी दूसरे नेता के समर्थन में ऐसे नारे नहीं लगाते तो मैं क्या कर सकता हंू। यानी अशोक गहलोत चौथी बार गहलोत सरकार के नारों से खुश है। देखना होगा कि वर्ष 2028 में यदि कांग्रेस को बहुमत मिता है, तो क्या गहलोत चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगे? जबकि बदली हुई परिस्थितियों में कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व गहलोत से खुश नहीं है। मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत ने सितंबर 2022 में जो बगावत की उससे श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बेहद खफा है। यही वजह है कि अब राष्ट्रीय राजनीति में भी गहलोत की कोई भूमिका नहीं रही है, लेकिन राजस्थान में अपनी ढपली अलग बजाकर गहलोत कांग्रेस के लिए चुनौती बन रहे है।
भीषण स्थिति:
18 अक्टूबर को जैसलमेर रवाना होने से पूर्व जयपुर में मीडिया से संवाद करते हुए पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली आदि क्षेत्रों में अकाल की भीषण स्थिति है। लेकिन सरकार ने अकाल प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की मदद के लिए अभी तक भी कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा, सरकार के पास बरसात के सारा आंकड़े मौजूद है,क्योंकि इस बार बरसात नहीं के बराबर हुई है, इसलिए बांध खाली है। सरकार को चाहिए कि अकाल की स्थिति का अध्ययन करते हुए राहत कार्य शुरू करवााए। उन्होंने कहा कि उनके दौरे का उद्देश्य अकाल की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। चूंकि मैं मुख्यमंत्री रह चुका हंू, इसलिए मुझे पता है कि अकाल के दौरान किसानों को कितनी परेशानी होती है। किसानों के साथ साथ पशुओं को भी परेशानी हो रही है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-10-2026)
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