Sunday, 25 October 2026
भारत के आध्यात्म को समझने के लिए मार्टिन लूथर जैसी दिव्य शक्ति हो।
छलनी से पानी निकालने जैसा धैर्य हो।
बुरे समय में पैसा नहीं प्रार्थना ही काम आती है। अंधाधुंध पैसा कमाने वाले लोग किसी जैन संत के जीवन से प्रेरणा लें।
जैन संत गौतम मुनि महाराज की खरी खरी। संगोष्ठी में न माइक, न कैमरा और न मोबाइल।
================
25 अक्टूबर को अजमेर के वरुण सागर मार्ग स्थित नवकार कॉलोनी के महावीर भवन में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ की ओर से शहर के प्रमुख सीए, एडवोकेट, व्यवसायी, बुद्धिजीवियों की एक संगोष्ठी हुई। इस संगोष्ठी में जैन संत गौतम मुनि महाराज ने धर्म संस्कारों के साथ प्रोफेशन की चुनौतियों विषय पर खरी खरी बात कही। इस संगोष्ठी की खास बात यह रही कि किसी भी श्रोता को पास मोबाइल नहीं था और न ही कैमरा व माइक था। गौतम मुनि की आवाज ही इतनी तेज थी कि बिना माइक के ही श्रोताओं को साफ सुनाई दे रहा था। संगोष्ठी में जैन मुनि ने भारत की आध्यात्म शक्ति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति सौभाग्यशाली है। अमेरिकी थिंकर मार्टिन लूटर से जब भारत यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं पहले भारत को प्राकृति सौंदर्य की दृष्टि से देखता था, लेनिक अब मैं भारत को पूजा ही दृष्टि से देखता हंू। भारत के लोगों में आध्यात्म के प्रति जो लगाव है, वह दुनिया के किसी भी नागरिक में नहीं है। जैन मुनि ने ईमानदारी, प्रार्थना और धैर्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी सीए और वकील को अपने हाथ में गलत केस नहीं लेना चाहिए। उन्होंने हर्षद मेहता का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके पास अथाह पैसा था, लेकिन बुरे दिनों में यह पैसा काम नहीं आया। बुरे दिनों में मनुष्य की प्रार्थना ही काम आती है। हमें अपने पूर्वजों के कार्यों से गौरवांवित होने के बजाए स्वयं के कार्यों पर गर्व करना चाहिए। हम समाज में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करें जिससे लोग सम्मान दिखाए। जैन मुनि ने कहा कि मुंबई में एक धनाढ्य परिवार प्रतिदिन एक करोड़ रुपए का दान करता है। यह कार्य पिछले दस वर्षों से किया जा रहा है। मेरी नजर में एक ऐसे आईएएस है जिनके पास सिर्फ चार जोड़ी कपड़े है। अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बाद भी अपने परिवार के लिए एक प्लाट भी नहीं खरीदा है। जो लोग अंधाधुंध कमाई में लगे हुए हैं उन्हें किसी जैन संत के जीवन को देखना चाहिए। जैन संत अपने जीवन में कोई सम्पत्ति एकत्रित नहीं करता। उन्होंने मिसाइल मैन के नाम से जाने जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम का दाहरण दिया। जैन मुनि ने बताया कि कलाम साहब जब राष्ट्रपति बने तो उन्होंने राष्ट्रपति भवन में मिलने वाली सुविधाओं का लाभ अपने परिवा को नहीं दिलवाया। राष्ट्रपति भवन में आने वाले रिश्तेदारों को कलाम साहब सिर्फ चाय पिलाते थे, लेकिन चाय का मूल्य अपने वेतन में से चुकाते थे। उद्योगपति रतन टाटा ने भी जीवन में नैतिकता और ईमानदारी की मिसाल कायम की है। जो लोग पराए धन को अपना समझते हैं उनके लिए जैन मुनि ने एक पति पत्नी की कहानी सुनाई। पति-पत्नी जब मिट्टी वाले रास्ते से गुजर रहे थे, तो पति की नजर मार्ग पर पड़ी स्वर्ण मुद्राओं पर गई। पत्नी थोड़ा पीछे चल रही थी। पति को लगा कि यदि पत्नी की नजर स्वर्ण मुद्राओं पर पड़ गई तो वहय उठा लेगी इसलिए पति ने स्वर्ण मुद्राओं पर मिट्टी डाल दी, लेकिन इस कृत्य को पत्नी ने देख लिया। पत्नी ने तपाक से कहा कि जिसे आप स्वर्ण मुद्राएं समझ रहे हैं वो मिट्टी है। आपने मिट्टी पर मिट्टी डालने का काम किया है। जैन मुनि ने कहा कि पति-पत्नी के बीच ऐसी ईमानदारी होनी चाहिए। जैन मुनि ने जीवन में धैर्य के भी कई उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि कई बार गुस्से की वजह से पूरा जीवन खराब हो जाता है। हर व्यक्ति को क्रिया पर प्रतिक्रिया धैर्य से देनी चाहिए। ौर्य इतना हो कि छलनी से पानी निकाल लिया जाए। उन्होंने कहा यदि हम छलनी लेकर कुंए से पानी निकालेंगे तो कभी सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन जब हम सर्दी के दिनों में पानी के बर्फ बनने तक धैर्य रखेंगे तो उसी छलनी से बर्फ को निकाल कर पानी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब हम पेप्सी की बोतल का ढक्कन खोलते हैं तो पेय पदार्थ उफान कर बाहर आता है, लेकिन जब हम पानी की बोतल का ढक्कन खोलते हैं तो पानी शांत रहता है। एक कक्षा में शरारती बच्चों ने शिक्षक के आने के पहले ब्लैक बोर्ड पर लिखा शिक्षक गधा है। स्वाभाविक था कि जब शिक्षक कक्षा में आएंगे तो उन्हें गुस्सा आएगा ही, लेकिन शिखक ने गुस्सा दिखाने के बजाए बार बार शिक्षक गधा शब्दों को पढ़ा और फिर पूरे धैर्य के साथ लिखा, शिखक गधे को भी इंसान बना सकता है।
जैन मुनि ने कहा कि हम जब भी धैर्य से काम लेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी। हमारा जीवन कोरा कागज है, इस पर लिखने का काम हम स्वयं करते हैं। कुछ लोग समझते हैं कि पैसा ही जीवन को सुरक्षित बनाता है। यह भ्रम है। मनुष्य की असली पूंजी ईश्वर के प्रति प्रार्थना है। हम अपनी तुलना दूसरों से करते है। जबकि हमें अपनी तुलना अपने कार्य से करनी चाहिए। हर व्यक्ति जब मां की कोख से जन्म लेता है तो रोता है। यदि कोई शिशु न रोए तो डॉक्टर उसे रुलाते है। यानी मनुष्य का जीवन रोने से शुरू होता है, लेकिन सफल व्यक्ति वही है जो रोते रोते न मरे। मरने के बाद जो व्यक्ति अपने कार्यों से पहचाना जाता है, उसी व्यक्ति का जीवन सफल माना जाता है। उन्होंने कहा कि सोने से पहले परिवार के सभी सदस्यों को सामूहिक तौर पर प्रार्थना करनी चाहिए, जिस परिवार में रात्रि के समय सामूहिक प्रार्थना होगी, उसमें कभी भी कष्ट उत्पन्न नहीं होगा। भारत की आध्यात्म की संस्कृति में प्रार्थना का विशेष महत्व है। संगोष्ठी में डॉ. एसके अरोड़ा, डॉ. अशोक मित्तल, डॉ. राजकुमार खसगीवाल, डॉ. दीपक जैन, डॉ. रत्ना जैन, राजस्थान बार कौसिल के अध्यक्ष योगेन्द्र शक्तावत, वरिष्ठ वकील बसंत विजयवर्गीय, जेपी शर्मा, उमरदान लखावत, चार्टर्ड एकाउंट एचएन जैन, विजय राका, जीएम जैन, निर्मल कोठारी, सीप कोठारी, सुनील पोरवाल, शिवशंकर हेड़ा, पारसमल राका, संतोष कांसवा व सोमदत्त यादव आदि विशेष तौर पर उपस्थित रहे। आचार्य 1008 श्री हीराचंद जी महाराज और भावी आचार्य श्री महेंद्र मुनि जी महाराज के अनुव्रति गौतम मुनि जी महाराज के अजमेर प्रवास के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829144425 पर सूर्य प्रकाश गांधी से ली जा सकती है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-10-2026)
Website- www.spmittal.in
Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog
Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11
Blog- spmittal.blogspot.com
To Add in WhatsApp Group- 9166157932
To Contact- 9829071511
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment