Friday, 30 October 2026
रिलायंस समूह की कंपनी जियो की सफलता से कांग्रेस और राहुल गांधी को देश का मूड समझना चाहिए।
एमएलसी की 28 सीटों में से कांग्रेस को एक भी नहीं।
तो फिर कांग्रेस दिल्ली में रैली क्यों कर रही है?
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28 अक्टूबर को रिलायंस समूह की डिजिटल सेवा कंपनी जियो प्लेट फार्मस लिमिटेड की शेयर मार्केट में लिस्टिंग हुई। जियो कंपनी का शेयर प्राप्त करने के लिए एक करोड़ 40 लाख लोगों ने आवेदन किया। करीब 80 लाख लोग जियो कपंनी का शेयर प्राप्त करने में सफल रहे। जियो कंपनी का शेयर लेने के लिएदेश भर में होड़ मची हुई थी। रिलायंस समूह मौजूदा समय में देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 28 अक्टूबर को जब जियो की लिस्टिंग हो रही थी, तब रिलायंस समूह के प्रमुख मुकेश अंबानी के पुत्र अनंत अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। अनंत अंबानी का कहना रहा कि रिलायंस समूह को समय समय पर पीएम मोदी का मार्गदर्शन मिलता है। रिलांयस समूह के प्रति देशवासियों ने जो भरोसा जताया है उससे कांग्रेस और राहुल गांधी को देश् ाका मूड भांपना चाहिए। सब जानते है कि राहुल गांधी लगातार रिलांयस समूह पर हमले करते हैं। राहुल गांधी उद्योगपति मुकेश अंबानी और पीएम मोदी के संबंधों को लेकर भी आरोप लगाते हैं। राहुल गांधी को मौका मिले तो वे रिलांयस समूह को बंद करवा दे, लेकिन जियो की सफलता में राहुल गांधी के आरोपों को नकार दिया है। रिलायंस समूह को लेकर राहुल गांधी के बयानों का कोई असर होता तो जियो को इतनी सफलता नहीं मिलती। शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि देश में अभी तक भी किसी अन्य कंपनी के प्रति इतना भरोसा नहीं जताया गया है। जबकि जियो सिर्फ डिजिटल प्लेटफार्मस का कारोबार ही कर रही है। असल में जियो के पीछे रिलायंस समूह की प्रतिष्ठा है। देशवासियों ने यह भरोसा रिलायंस समूह पर जताया है।
एक भी सीट नहीं:
कोई भी राजनीतिक दल चुनाव में सफलता हासिल करने के लिए काम करता है। यदि किसी दल को चुनाव में सफलता न मिले तो उसकी राजनीकि गतिविधियां कोई मायने नहीं रखती है। 28 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की एमएलसी की 28 सीटों के परिणाम सामने आए। 28 में से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। जबकि एमएलसी के चुनाव मतपत्र से हुए। कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि चुनाव मतपत्र से करवाए जाए। कांग्रेस को ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका है, लेकिन एमएलसी के चुनाव के परिणाम बताते हैं कि मतपत्र से चुनाव होने के बाद भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिलती है। कांग्रेस एक ओर वोट चोरी का आरोप लगा कर एक नवंबर को दिल्ली में महारैली कर रही है तो वहीं एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिली है। सवाल उठता है तो फिर कांग्रेस दिल्ली में किस उद्देश्य से रैली कर रही है? अगले वर्ष देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने है। यहां सत्तारूढ़ भाजपा के सामने प्रमुख विपक्षी दल के तौर पर समाजवादी पार्टी है। उत्तर प्रदेश में भी 11 एमएलसी सीटों परचुनाव हुए। सपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की सीट के साथ साथ पांच सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन कांग्रेस एक सीट भी जीत नहीं सकी। यानी उत्तर प्रदेश में सपा ही विपक्षी दल है। कांग्रेस तो सपा के कंधे पर सवार है। दिल्ली में भले ही कुछ क्षेत्रीय दल कांग्रेस केसाथ नजर आते हो, लेकिन अपने प्रभाव वाले प्रदेश में ऐसे क्षेत्रीय दल कांग्रेस को पनपने नहीं देते। कांग्रेस ने यूपी में गत विधानसभा का चुनाव अकेले दम पर लड़ा था और तब कांग्रेस को 403 सीटों में से मात्र 2 सीट मिली। इसके बाद 2024 में कांग्रेस ने जब लोकसभा का चुनाव सपा केसाथ मिलकर लड़ा तो कांग्रेस 6 संसदीय क्षेत्रों में जीत दर्ज करने में सफल रही।
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