Friday, 30 October 2026
अजमेर के डीएवी कॉलेज के खेल मैदान का उपयोग व्यावसायिक कार्यों के लिए होने का विरोध।
प्रदर्शनी और मेले के आयोजन पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री और कलेक्टर से गुहार।
अदालतों ने भी खेल मैदानों के व्यावसायिक उपयोग को गलत माना है।
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अजमेर के ब्यावर रोड स्थित डीएवी कॉलेज के खेल मैदान पर प्रस्तावित प्रदर्शनी और मेले के आयोजन का विरोध किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कुलदीप सिंह राजपुरा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के साथ ही जिला कलेक्टरए पुलिस अधीक्षकए संभागीय आयुक्त तथा कॉलेज शिक्षा निदेशालय सहित संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रस्तावित मेले एवं प्रदर्शनी के आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है। डॉ. राजपुरा ने अपनी शिकायत में कहा है कि शिक्षण संस्थानों के खेल मैदानों और शैक्षणिक परिसरों का उपयोग मुख्य रूप से विद्यार्थियों की शैक्षणिकए खेलकूद एवं पाठ्यक्रम से संबंधित गतिविधियों के लिए होना चाहिएए न कि व्यावसायिक आयोजनों के लिए। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा संकाय एवं बीपीएड पाठ्यक्रम संचालित हैए जिसके विद्यार्थी नियमित रूप से खेल मैदान का उपयोग प्रायोगिक कक्षाओं और विभिन्न खेल गतिविधियों के लिए करते हैं। ऐसे में खेल मैदान में व्यावसायिक मेला आयोजित होने से विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं, प्रायोगिक प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला:
डॉ. कुलदीप सिंह राजपुरा ने अपनी शिकायत में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 अक्टूबर 2025 के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि शिक्षण संस्थानों की भूमि, भवनों और खेल मैदानों के उपयोग को लेकर न्यायालय द्वारा महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गई थीं। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि गिरजा शंकर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य प्रकरण में दिए गए निर्णय के अनुसार शिक्षण संस्थानों के परिसरों और खेल मैदानों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए थे तथा शैक्षणिक परिसरों के उपयोग को शिक्षा, खेलकूद, सांस्कृतिक एवं अन्य पाठ्यक्रम से संबंधित गतिविधियों तक सीमित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया था। डॉ. राजपुरा ने संबंधित अधिकारियों से उक्त न्यायिक निर्णय और उसके कानूनी प्रभावों के आलोक में मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
गौशाला और कृषि संकाय के विद्यार्थियों के हितों का भी उठाया मुद्दा:
शिकायत में दयानंद कॉलेज में संचालित कृषि संकाय से संबंधित विद्यार्थियों के हितों का मुद्दा भी उठाया गया है। डॉ. राजपुरा के अनुसार महाविद्यालय में कृषि संकाय के विद्यार्थियों को पशुपालन संबंधी व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक गौशाला संचालित की जाती थी। उनका कहना है कि उक्त गौशाला का उपयोग कृषि संकाय के विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और पशुपालन संबंधी जानकारी प्रदान करने के लिए किया जाता था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दान में प्राप्त भूमि के एक हिस्से, जहां पूर्व में गौशाला संचालित होती थी उसके उपयोग में परिवर्तन कर वहां एवं उससे जुड़े मार्गों पर मेले की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डॉ.राजपुरा ने कहा कि यदि गौशाला और पशुपालन प्रशिक्षण से संबंधित व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं तो कृषि संकाय के विद्यार्थी अपने पाठ्यक्रम की महत्वपूर्ण व्यावहारिक गतिविधियों से वंचित हो सकते हैं।
खेल मैदान तक मेले की गतिविधियां होने से बीपीएड विद्यार्थियों को नुकसान:
शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित मेले की गतिविधियां गौशाला क्षेत्र से होते हुए खेल मैदान तक संचालित किए जाने की योजना है। इससे महाविद्यालय में अध्ययनरत बीपीएड एवं शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं और खेल गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका जताई गई है। डॉ. राजपुरा ने कहा कि खेल मैदान विद्यार्थियों के शारीरिक विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में लंबे समय तक मैदान का अन्य गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और खेल प्रशिक्षण दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी उठाए सवाल:
मुख्यमंत्री एवं अन्य अधिकारियों को भेजे गए पत्र तथा संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायत में प्रस्तावित मेले की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में मेले में लगाए जाने वाले बड़े झूलों, अस्थायी विद्युत कनेक्शन, अग्निशमन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की गई है।
डॉ. राजपुरा ने संबंधित विभागों से निम्न व्यवस्थाओं एवं अनुमतियों की जांच कराने की मांग की है:
बड़े झूलों की तकनीकी फिटनेस एवं सुरक्षा जांच, अस्थायी विद्युत कनेक्शन एवं विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र, अग्निशमन विभाग से आवश्यक एनओसी, भीड़ नियंत्रण एवं पर्याप्त पुलिस व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, एंबुलेंस एवं प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं, अन्य आवश्यक प्रशासनिक एवं सुरक्षा अनुमतियां की जांच हो।
सात दिन में कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय जाने की चेतावनी:
डॉ. कुलदीप सिंह राजपुरा ने प्रशासन से मामले की जांच कर प्रस्तावित मेले एवं प्रदर्शनी के आयोजन के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत पर सात दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की जाती हैए तो वे उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने सहित अन्य कानूनी कदम उठा सकते हैं। डॉ. राजपुरा का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध व्यक्तिगत विरोध करना नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थान की भूमि, खेल मैदान, विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों और खेल गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 8058217342 पर डॉ. राजपुरा से ली जा सकती है।
S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-10-2026)
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