अजमेर की पीसांगन पंचायत समिति में प्रधान की हार भाजपा को भारी पड़ेगी।
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अजमेर जिले की पीसांगन पंचायत समिति में 12 अप्रैल को जिस तरह भाजपा के प्रधान दिलीप पचार को हटाया गया, उसकी अब राजनीतिक क्षेत्रों में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। भाजपा के लिए गंभीर बात ये है कि अविश्वास प्रस्ताव पर 33 सदस्यों में से 32 ने समर्थन किया। असल में भाजपा के प्रधान को हटाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के सदस्य एकजुट हो गए। सदस्यों को एकजुट करने में भाजपा से ही जुड़े सांवरलाल गुर्जर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि इसमें पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह गुर्जर भी सक्रिय देखे गए। कहा जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों को माउंट आबू और गोवा तक घुमाया गया। भाजपा के सदस्यों ने प्रधान दिलीप पचार की कार्यशैली को लेकर कई बार शिकायत की थी, लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं ने किसी की भी नहीं सुनी। यही वजह रही कि जब कांग्रेस की ओर से अविश्वास प्रस्ताव रखा गया तो भाजपा के सदस्य भी समर्थन में आ गए। जानकार सूत्रों की माने तो अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले भाजपा देहात जिला अध्यक्ष बीपी सारस्वत की उपस्थिति में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में भाजपा के सदस्यों के समक्ष यह सुझावा रखा गया कि दिलीप पचार का इस्तीफा दिलवाया जा सकता है। सदस्यों ने भरोसा दिलाया कि अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे और पचार को ही फिलहाल प्रधान बनाए रखा जाएगा। लेकिन भाजपा के सदस्य ऐन मौके पर अपने वायदे से मुकर गए। अविश्वास प्रस्ताव को रखवाने में भाजपा के सदस्य सतपाल सिंह की कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन बाद में उन्होंने भी अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर दिया। इससे भाजपा के सदस्यों की नाराजगी जाहिर होती है। विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह भाजपा के प्रधान को हटाया गया है उसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ेगा।
विधायक रावत ने बचाई इज्जतः
भले ही पीसांगन पंचायत समिति के प्रधान के पद से भाजपा के दिलीप पचार हट गए हों, लेकिन इस पूरे प्रकरण में पुष्कर के भाजपा विधायक और संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत ने अपनी राजनीतिक इज्जत बचा ली है। इस पंचायत समिति के अंतर्गत 12 ग्राम पंचायतें पुष्कर विधानसभा क्षेत्र में आती हैं। विधायक रावत को इस बात का आभास हो गया था कि भाजपा के अधिकांश सदस्य अपने ही प्रधान के खिलाफ हैं, इसलिए रावत ने अपने पुष्कर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों से चुने गए पंचायत समिति सदस्य अशोक सिंह रावत, भंवर सिंह खोरी, अंजलि पाराशर, शकुंतला ठाडा और संगीता रावत को वोट डालने ही नहीं भेजा। इन पाचों सदस्यों ने वोट नहीं डालकर एक तरह से अविश्वास प्रस्ताव का विरोध ही प्रकट किया। अब विधायक रावत यह कह सकते हैं कि भाजपा के प्रधान को हटाने में उनके समर्थक सदस्यों का सहयोग नहीं रहा।
एस.पी.मित्तल) (13-04-18)
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